एपिसोड 5: आरव का सामना और रिया का साहस
सुबह की धूप पटना की गलियों में फैल रही थी। चाय की दुकानों से उठती भाप और मोहल्ले के बच्चों की हंसी हवा में घुली हुई थी। लेकिन रिया के घर का माहौल भारी था। मां चुपचाप रसोई में काम कर रही थीं, उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं। रिया की आंखें रात भर रोने से लाल थीं। दिल में डर और उम्मीद दोनों साथ-साथ पल रहे थे।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। रिया ने दरवाजा खोला – सामने आरव खड़ा था। नीली शर्ट, गंभीर चेहरा और हाथ में फूलों का गुलदस्ता। उसकी आंखों में दृढ़ता थी। मां बाहर आईं।
“कौन?” मां ने कठोर स्वर में पूछा।
आरव ने विनम्रता से कहा, “आंटी, मैं आरव हूं। रिया से शादी करना चाहता हूं। आपसे बात करने आया हूं।”
मां का चेहरा सख्त हो गया। “बेटा, तुम अमीर हो। हमारी बेटी गरीब है। ये रिश्ता बराबरी का नहीं है।”
आरव ने गहरी सांस ली। “आंटी, प्यार बराबरी नहीं देखता। मैं रिया को चाहता हूं। और उसके परिवार को भी अपनाना चाहता हूं। मैं वादा करता हूं कि आपकी बेटी को कभी दुख नहीं होने दूंगा।”
रिया की आंखों में चमक आ गई। लेकिन मां ने गुस्से से कहा, “वादे अमीर लोग बहुत करते हैं। निभाते नहीं। राजेश अच्छा लड़का है। सरकारी नौकरी है। हमारी बेटी का भविष्य सुरक्षित रहेगा।”
आरव ने दृढ़ता से कहा, “आंटी, मैं सिर्फ अमीर नहीं हूं। मैं इंसान हूं। और इंसानियत से वादा कर रहा हूं। अगर आप चाहें, तो मैं आपके घर की जिम्मेदारी उठाऊंगा। लेकिन रिया को खो नहीं सकता।”
रिया ने साहस जुटाया। “मां, मैं आरव को चाहती हूं। राजेश अच्छे हैं, लेकिन मेरा दिल आरव के साथ है। अगर मैं अपनी खुशी छोड़ दूं, तो जिंदगी भर पछताऊंगी।”
मां की आंखों में आंसू आ गए। “बेटी, मैं तुम्हें दुखी नहीं देखना चाहती। लेकिन समाज क्या कहेगा? लोग ताने देंगे।”
आरव ने हाथ जोड़कर कहा, “आंटी, लोग हमेशा कुछ न कुछ कहते हैं। लेकिन अगर हम सच में खुश हैं, तो उनकी बातों का कोई मतलब नहीं। मैं रिया को सम्मान दूंगा, प्यार दूंगा। और आपको मां की तरह मानूंगा।”
माहौल भारी था। तभी दरवाजे पर फिर दस्तक हुई। राजेश खड़ा था। “नमस्ते आंटी। मैं आया हूं जवाब लेने।”
मां चौंक गईं। रिया ने हिम्मत जुटाई। “राजेश जी, मैं आपकी इज्ज़त करती हूं। लेकिन मेरा दिल आरव के साथ है। मैं झूठ नहीं बोल सकती।”
राजेश का चेहरा कठोर हो गया। “रिया जी, मैं समझ गया। आप खुश रहें। लेकिन याद रखिए, समाज आसान नहीं होगा।”
राजेश चला गया। मां चुप रहीं। रिया ने मां का हाथ पकड़ा। “मां, प्लीज़। मुझे मेरी खुशी चुनने दीजिए।”
मां ने आंसू पोंछे। “ठीक है बेटी। अगर तू खुश है, तो मैं मान जाती हूं। लेकिन वादा कर, कभी मुझे छोड़कर नहीं जाएगी।”
रिया ने गले लगाकर कहा, “कभी नहीं मां।”
आरव की आंखों में खुशी थी। उसने रिया का हाथ थाम लिया। “अब कोई हमें अलग नहीं कर सकता।”
गली में बच्चे खेल रहे थे, हवा में हल्की ठंडक थी। मोहल्ले की औरतें खुसर-पुसर कर रही थीं – “रिया ने अमीर लड़के को चुना है।” कुछ ने ताने दिए, कुछ ने मुस्कुराकर कहा, “प्यार किस्मत से होता है।”
रिया और आरव की कहानी अब नए सफर की ओर बढ़ रही थी। लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी – समाज की नजरें, परिवार की उम्मीदें और प्यार की ताकत।
(एपिसोड समाप्त। अगले एपिसोड में: आरव और रिया का रिश्ता समाज के सामने – मोहल्ले की चर्चा
, परिवार की परीक्षा और प्यार की जीत।)