एपिसोड 3: राजेश का सरप्राइज़ और आरव की जलन
रात का सन्नाटा था। रिया बिस्तर पर लेटी हुई थी, लेकिन नींद उसकी आंखों से कोसों दूर थी। फोन की स्क्रीन पर आरव का मैसेज चमक रहा था – “आज का दिन जिंदगी का बेस्ट। कल फिर मिलें?” दिल धड़क रहा था, होंठों पर मुस्कान थी। तभी दरवाजे की घंटी बजी।
मां ने दरवाजा खोला। सामने राजेश खड़ा था – हाथ में गिफ्ट, चेहरे पर आत्मविश्वास। “नमस्ते आंटी, रिया जी से मिलने आया हूं। कल हमारी फैमिली ने शादी की बात की थी, सोचा आज खुद आकर बात करूं।” मां खुश हो गईं। “आओ बेटा, बैठो।”
रिया बाहर आई। चेहरा सफेद पड़ गया। राजेश ने गिफ्ट थमाया – एक सुंदर किताब और मिठाई का डिब्बा। “रिया जी, आप टीचर हैं, तो सोचा किताब आपको पसंद आएगी। और मिठाई तो मीठे रिश्ते की शुरुआत के लिए।” रिया ने मजबूरी में मुस्कुराकर धन्यवाद कहा। मां की आंखों में उम्मीद चमक रही थी।
राजेश ने सीधे कहा, “रिया जी, मैं जानता हूं आपके घर की हालत आसान नहीं है। मेरी नौकरी स्थिर है, परिवार अच्छा है। मैं चाहता हूं कि आप मेरी पत्नी बनें। हम दोनों मिलकर सब संभाल लेंगे।” रिया चुप रही। दिल में आरव की तस्वीर घूम रही थी।
उसी वक्त फोन बजा – आरव का कॉल। रिया ने घबराकर फोन उठाया। “रिया, तुम ठीक हो? आवाज़ क्यों कांप रही है?” रिया ने धीरे कहा, “राजेश आया है घर पर। शादी की बात कर रहा है।” आरव की सांसें भारी हो गईं। “क्या? तुमने उसे मिलने दिया? रिया, मैं तुम्हें खो नहीं सकता। तुम मेरी हो।”
रिया ने आंसू रोकते हुए कहा, “आरव, सब इतना आसान नहीं है। मां खुश हैं। घर की जिम्मेदारी है। मैं कैसे मना करूं?” आरव की आवाज़ में जलन थी, “क्या तुम्हें मेरी परवाह नहीं? मैं तुम्हें दुनिया दूंगा, लेकिन तुम सरकारी नौकरी वाले राजेश को चुनोगी?”
राजेश ने देखा कि रिया फोन पर है। “किससे बात कर रही हैं?” रिया ने फोन छुपा लिया। “कोई दोस्त है।” राजेश मुस्कुराया, “ठीक है, लेकिन मैं चाहता हूं कि आप सोचें। मैं सीरियस हूं।”
मां ने राजेश को विदा किया। जाते-जाते उसने कहा, “रिया जी, कल मैं फिर आऊंगा। उम्मीद है जवाब मिलेगा।”
रिया कमरे में भागी। फोन पर आरव इंतजार कर रहा था। “रिया, मैं कल तुम्हें लेने आऊंगा। हमें बात करनी होगी। मैं तुम्हें राजेश से दूर रखूंगा।” रिया ने रोते हुए कहा, “आरव, प्लीज़ समझो। मैं तुम्हें पसंद करती हूं, लेकिन मां को कैसे समझाऊं?”
आरव ने ठान लिया, “कल मैं तुम्हारी मां से मिलूंगा। उन्हें बताऊंगा कि मैं तुम्हें कितना चाहता हूं।”
रिया चौंक गई। “नहीं आरव, ऐसा मत करना। मां तुम्हें अमीर लड़का समझेंगी, लेकिन गरीब लड़की से शादी करने पर नाराज़ होंगी।”
आरव ने दृढ़ता से कहा, “प्यार में बैकग्राउंड मायने नहीं रखता। मैं साबित करूंगा।”
रात लंबी थी। रिया के दिल में दो रास्ते थे – एक तरफ राजेश की स्थिरता, दूसरी तरफ आरव का जुनून।
सुबह होते ही मोहल्ले में चर्चा फैल गई – “रिया की शादी तय हो रही है राजेश से।” पड़ोस की औरतें बधाई देने लगीं। रिया का दिल टूट रहा था।
दोपहर में आरव ने मैसेज किया – “आज शाम गंगा घाट पर मिलो। मुझे तुम्हें कुछ बताना है।”
रिया ने हिम्मत जुटाई। “ठीक है।”
शाम को गंगा घाट पर दोनों मिले। सूरज डूब रहा था। आरव ने रिया का हाथ पकड़ लिया। “रिया, मैं तुम्हें खो नहीं सकता। अगर तुमने राजेश को चुना, तो मैं टूट जाऊंगा।”
रिया की आंखों में आंसू थे। “आरव, मैं भी तुम्हें चाहती हूं। लेकिन मां की खुशी? घर की हालत?”
आरव ने गहरी सांस ली। “मैं सब संभाल लूंगा। बस तुम हां कहो।”
तभी पीछे से आवाज़ आई – “रिया जी!” राजेश वहां आ गया। दोनों चौंक गए। राजेश ने आरव को देखा। “तो यही है वो लड़का?”
हवा में तनाव भर गया। रिया बीच में खड़ी थी – दो दिल, दो रास्ते।
(एपिसोड समाप्त। अगले एपिसोड में: गंगा घाट पर टकराव – राजेश का प्रस्ताव और आरव का इज़हार, रिया का फैसला और मां की प्रतिक्रिया