New Bodyguard - 1 in Hindi Fiction Stories by Miss Secret books and stories PDF | नया बॉडीगार्ड - 1

Featured Books
Categories
Share

नया बॉडीगार्ड - 1

मुंबई की रात हमेशा की तरह चमक रही थी।
ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच से गुजरती सड़कों पर गाड़ियों की लाइट्स किसी नदी की तरह बहती दिखाई दे रही थीं।
लेकिन उस चमक के बीच एक लड़की के मन में अजीब सी बेचैनी थी।
उसका नाम था नैना कपूर।
नैना मुंबई के सबसे अमीर और ताकतवर बिज़नेसमैन राघव कपूर की इकलौती बेटी थी।
बड़ी-बड़ी पार्टियाँ, महंगे कपड़े, लग्ज़री कारें… ये सब उसकी जिंदगी का हिस्सा थे।
लेकिन आज उसकी जिंदगी में कुछ बदलने वाला था।
नैना की कार धीरे-धीरे कपूर मेंशन के बड़े गेट के सामने आकर रुकी।
सिक्योरिटी गार्ड ने तुरंत गेट खोल दिया और कार अंदर चली गई।
कार से उतरते ही नैना ने लंबी साँस ली।
"Finally… घर आ गई," उसने धीरे से कहा।
आज उसका दिन बहुत थकाने वाला था। कॉलेज के बाद वह अपनी दोस्त के साथ कैफे गई थी, और अब सीधा घर लौटी थी।
जैसे ही वह मेंशन के अंदर दाखिल हुई, उसे कुछ अजीब सा महसूस हुआ।
घर का माहौल थोड़ा अलग था।
लिविंग रूम में उसके पापा सोफे पर बैठे थे… और उनके पास एक अजनबी लड़का खड़ा था।
नैना की नजर तुरंत उस पर टिक गई।
लड़का लंबा था… करीब छह फीट।
उसने काले रंग की शर्ट और डार्क पैंट पहनी हुई थी।
उसका चेहरा शांत था… लेकिन उसकी आँखों में कुछ ऐसा था जो पहली नजर में ही डर पैदा कर सकता था।
नैना थोड़ी देर के लिए रुक गई।
“ये कौन है?” उसने मन ही मन सोचा।
तभी उसके पापा ने उसे देखा।
“नैना, इधर आओ,” राघव कपूर ने कहा।
नैना धीरे-धीरे उनके पास गई।
“क्या हुआ, पापा?”
राघव कपूर ने उस लड़के की तरफ इशारा किया।
“नैना… ये है समीर। आज से ये तुम्हारा बॉडीगार्ड है।”
नैना की आँखें तुरंत बड़ी हो गईं।
“WHAT?”
वह लगभग चिल्ला पड़ी।
“बॉडीगार्ड? मुझे क्यों चाहिए बॉडीगार्ड?”
राघव कपूर ने शांत आवाज़ में कहा,
“क्योंकि अब ज़रूरत है।”
नैना ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“पापा, मैं कोई बच्ची नहीं हूँ। मैं खुद अपना ख्याल रख सकती हूँ।”
लेकिन राघव कपूर का चेहरा बिल्कुल सख्त था।
“ये फैसला हो चुका है, नैना।”
कमरे में कुछ सेकंड के लिए खामोशी छा गई।
नैना ने गुस्से में उस अजनबी लड़के की तरफ देखा।
“और तुम… सच में सोचते हो कि मैं तुम्हें अपने साथ हर जगह घुमाऊँगी?”
समीर अब तक बिल्कुल चुप था।
उसने पहली बार सीधे नैना की तरफ देखा।
उसकी आँखें गहरी और ठंडी थीं।
“मेरा काम सिर्फ आपकी सुरक्षा करना है,” उसने शांत आवाज़ में कहा।
नैना को उसकी आवाज़ सुनकर अजीब सा महसूस हुआ।
उसकी आवाज़ में कोई घबराहट नहीं थी… कोई भावना नहीं थी।
जैसे वह सिर्फ अपना काम कर रहा हो।
नैना ने आँखें घुमाईं।
“Great… अब मेरे पीछे एक बॉडीगार्ड घूमेगा।”
राघव कपूर उठ खड़े हुए।
“समीर अब हर जगह तुम्हारे साथ रहेगा। कॉलेज, बाहर, पार्टी… हर जगह।”
नैना का गुस्सा और बढ़ गया।
“Seriously? ये तो जेल जैसा हो गया।”
लेकिन उसके पापा बिना कुछ कहे वहाँ से चले गए।
अब लिविंग रूम में सिर्फ नैना और समीर खड़े थे।
कुछ सेकंड तक दोनों चुप रहे।
नैना ने आखिरकार कहा,
“सुनो… मुझे बॉडीगार्ड की जरूरत नहीं है। तुम चाहो तो अभी चले जाओ।”
समीर ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया,
“मैं कहीं नहीं जा सकता।”
“क्यों?”
“क्योंकि ये मेरा काम है।”
नैना ने गहरी साँस ली।
“तुम बहुत irritating हो।”
समीर ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह बस शांत खड़ा रहा।
नैना ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा।
“तुम हमेशा ऐसे ही चुप रहते हो?”
समीर ने हल्का सा सिर झुकाया।
“जब जरूरत होती है तब बोलता हूँ।”
“और अभी जरूरत नहीं है?”
“नहीं।”
नैना ने झुंझलाकर कहा,
“Great… silent bodyguard।”
फिर वह मुड़कर सीढ़ियों की तरफ चलने लगी।
लेकिन अचानक उसे पीछे से कदमों की आवाज़ सुनाई दी।
वह तुरंत पलटी।
समीर उसके पीछे आ रहा था।
“तुम मेरे पीछे क्यों आ रहे हो?”
समीर ने सीधा जवाब दिया,
“क्योंकि मुझे आपके साथ रहना है।”
नैना ने माथा पकड़ लिया।
“ओह गॉड…”
वह बिना कुछ कहे अपने कमरे की तरफ चली गई।
लेकिन उसी रात…
मेंशन के पीछे वाले गार्डन में एक आदमी खड़ा था।
अंधेरा था… और चारों तरफ सन्नाटा।
वह आदमी फोन पर किसी से बात कर रहा था।
और वह आदमी था…
समीर।
उसकी आवाज़ अब पहले जैसी शांत नहीं थी।
“हाँ… मैं घर के अंदर पहुँच चुका हूँ।”
फोन के दूसरी तरफ से किसी ने कुछ कहा।
समीर की आँखें अंधेरे में चमक उठीं।
“हाँ… लड़की का नाम नैना है।”
कुछ सेकंड की खामोशी के बाद उसने धीरे से कहा,
“मिशन शुरू हो चुका है।”
फोन के दूसरी तरफ से फिर आवाज़ आई।
समीर ने ठंडी आवाज़ में जवाब दिया,
“चिंता मत करो… सही समय आने पर मैं उसे खत्म कर दूँगा।”
यह कहकर उसने कॉल काट दी।
फिर उसने ऊपर की तरफ देखा।
नैना के कमरे की लाइट अभी भी जल रही थी।
समीर की आँखों में एक अजीब सी चमक आई।
और उसने धीमे से कहा—
“तुम्हें बचाने नहीं…
मारने आया हूँ, नैना।”



Chapter 1 End.