Child becomes soldier in Hindi Children Stories by कमल चोपड़ा books and stories PDF | बच्चा-बच्चा बना सिपाही

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बच्चा-बच्चा बना सिपाही

बच्चा-बच्चा बना सिपाही   
   कमल चोपड़ा​

हर तरफ सजग के साहस और बुद्धिमानी-समझदारी की प्रशंसा हो रही थी। स्कूल के अध्यापक, उसके सहपाठी, गली-मुहल्लेवाले सभी उसे बधाइयाँ दे रहे थे। वे लड़के जो उसे पहले चिढ़ाते थे, शर्मिंदा थे और अब वे भी उसकी प्रशंसा कर रहे थे। प्रिंसिपल ने भी आकर उसे शाबाशी दी और सम्मानित किया। सजग की आँखें भीग गई थीं। वह बोला, "इस सम्मान की हकदार तो दीदी हैं। वो मुझे इस सबके लिये प्रोत्साहित न करतीं तो यह संभव नहीं था।"​स्कूल से छुट्टी मिलने के बाद स्कूल के तीन-चार लड़कों ने उसे रोका और उसकी प्रशंसा करते हुए बोले— "हम तेरे साथ दोस्ती करना चाहते हैं। तुमने तो कमाल कर दिया।"​"हाँ क्यों नहीं? कमाल तो तुम भी कर सकते हो। एकजुट होकर हम असंभव को संभव बना सकते हैं। कल शाम को मैं दीदी के घर गया था। वो भी कह रही थीं कि संगठन में बहुत शक्ति होती है।"​वे पाँचों मिलकर दीदी के घर गये तो दीदी बहुत खुश हुईं और बोलीं, "तुम इंडियन चिल्ड्रेन फोर्स यानी बाल सेना बनाओ। तुम पाँचों मिलकर रोजाना नहीं तो सप्ताह में एक दिन हर मुहल्ले, शहरों में राउण्ड लगाओ और जहाँ कहीं भी कुछ गलत होता दिखे, उसका उसी वक्त विरोध करो.....।      ​रविवार को रोहण, राहुल, श्रेयस, कुणाल और सजग पाँचों मिलकर मुहल्ले के राउण्ड पर हँसते-खिलखिलाते और लेफ्ट राइट करते हुए निकल पड़े। रोहण गाने लगा— बाल सेना की यह टुकड़ी, समाज के दुश्मनों को खोजने निकली। एकाएक सजग बोला, "ऐसे चलते जाने का कुछ फायदा नहीं, अपनी आँख, कान खुले रखो। बड़े ध्यान से देखते रहो कि कोई कहीं गलत तो नहीं कर रहा है?"​अभी वह कह ही रहा था कि सामनेवाले मकान की छत से एक आदमी ने कूड़े की थैली सड़क पर फेंकी। थैली फेंकने के बाद वह आदमी झट से पीछे हट गया ताकि कोई देख न ले पर बच्चों ने उसे देख लिया था। सजग ने आगे बढ़कर देखा उस मकान के बाहर कोई बैल का बटन नहीं लगा हुआ था। सजग ने अपनी बैसाखी से दरवाजा खटखटाया तो एक आदमी ने छज्जे से झाँककर कहा— "क्या बात है?" बड़े रौब से सजग ने कहा— "नीचे आइये.. जल्दी।" दरवाजा खोलकर वह आदमी बाहर आया तो सजग ने कहा— "आप देश के दुश्मन हैं। कूड़ा फेंककर आप गली को गंदा कर रहे हैं। अपने शहर को गंदा कर रहे हैं यानी अपने देश को गंदा कर रहे हैं। कूड़ा फैलाकर देश को बीमार बनाना चाहते हैं।"​वह आदमी शर्मिंदा-सा हो गया। आस-पास के लोग इकट्ठे हो गये थे। सजग ने अपने साथियों से कहा— "पुलिस के साथ कमेटीवालों दोनों को बुलवाकर इसका चालान करवाऊँगा।"​अपने-आपको लोगों से घिरा देखकर वह आदमी बुरी तरह डर गया और बोला— "आगे से मैं ऐसा हरगिज नहीं करूँगा। सॉरी-सॉरी..." कहता हुआ वह आदमी कूड़े की थैली उठाकर नजदीक के कूड़ेघर की तरफ चल दिया।​हँसते गुनगुनाते वे आगे बढ़े तो एक मकान के बाहर एक आदमी कूड़े के ढेर को आग लगा रहा था। माचिस जलाकर ज्योंही वह आदमी कूड़े को तिल्ली लगाने लगा तो सजग चिल्लाया, "ओये...!"​दौड़कर उन्होंने उसे घेर लिया और डाँटने लगे, "आप अपराध कर रहे हैं। पता है इससे प्रदूषण कितना बढ़ जायेगा?"​"कूड़े का ढेर जलकर थोड़ी-सी राख में बदल जायेगा, बात खत्म।"​"पता है जलते हुए कूड़े से कितना प्रदूषण फैलेगा? कितनी हानिकारक गैसें निकलती हैं जो लोगों के फेफड़ों में जायेंगी। लोगों के साँसों में जायेंगी और उन्हें दमा आदि कई तरह की बीमारियाँ हो जायेंगी। आप समाज के दुश्मन हैं। गीले और सूखे कूड़े को अलग करो और कूड़ेघर में फेंक आओ।"​उस आदमी को अपनी गलती का अहसास हो गया था। उसने माफी माँगी और कहा, "मैं अभी कूड़े को छाँटकर कूड़ेघर में फेंककर आता हूँ।"​वे पाँचों आगे बढ़ गये। एक जगह एक आदमी थूक रहा था तो कुणाल ने कहा कि सार्वजनिक जगह पर थूकना अपराध है। इससे गंदगी और बीमारियाँ फैलती हैं। हमारे साथ थाना चलना होगा, तुम्हारा चालान होगा। वह आदमी बुरी तरह डर गया। लड़कों ने उसे डाँटा तो वह थर-थर काँपने लगा फिर माफी माँगते हुए अपने थैले से एक कपड़ा निकालकर अपनी थूक को साफ किया। तब उन्होंने उसे वार्निंग देकर छोड़ दिया। उसके जाने के बाद वे खूब हँसे। कुणाल गुनगुनाने लगा— देश के हैं हम सिपाही।​हँसते-गाते वे आगे बढ़े तो एक आदमी एक जगह दीवार पर पेशाब कर रहा था। श्रेयस ने झट से अपनी जेब से मोबाइल निकाला और उसका वीडियो बनाने लगा। उन्होंने आगे बढ़कर उसे पीछे से घेर लिया। चौंककर वह आदमी पलटा तो उन्हें देखकर एकदम घबरा गया। उसका चेहरा देखने लायक था। वह शर्मिंदा हो रहा था। सॉरी कहकर वह आदमी जाने लगा तो एकाएक सजग ने कहा— "तुम्हें शर्म नहीं आती कि देश की दीवार को गंदा कर रहे हो?"​रोहण बोला— "गली गंदी तो मुहल्ला गंदा हो जायेगा?"​श्रेयस बोला— "मुहल्ला गंदा तो शहर गंदा?" राहुल बोला— "शहर गंदा तो देश गंदा, तुम देश को गंदा कर रहे हो।" श्रेयस बोला— "हमने आपकी वीडियो बना ली है। हम इसे नेट पर डाल देंगे। इसे सारा देश देखेगा।" वह आदमी गिड़गिड़ाने लगा— "ऐसा मत करो मेरी बेइज्जती हो जायेगी। मेरे परिवार की बेइज्जती हो जायेगी। मेरी नई-नई मँगनी हुई है। मेरा रिश्ता टूट जायेगा।" "तो क्या हुआ? देश-शहर की दीवारें गंदा करने में जो सुख है? वो तो तुम्हें मिला ही है न?"​राहुल ने हँसते हुए कहा तो वह आदमी गिड़गिड़ाने लगा— "प्लीज ये वीडियो डिलीट कर दो! मैं आगे कभी ऐसा नहीं करूँगा। इसे नेट पर मत डालो।"​"नहीं-नहीं, नेट पर डालना ही पड़ेगा।" कुछ देर उसे परेशान करने के बाद सजग ने कहा— "ठीक है। कान पकड़कर सात बार उठक-बैठक करो, फिर मुर्गा बनना पड़ेगा।" उस आदमी ने कान पकड़कर उठक-बैठक किया फिर मुर्गा बना तो उन्होंने उसे छोड़ दिया।​शाम ढलने लगी थी। अँधेरा घिरने लगा। वे लौटने लगे। आज उन्हें जितनी खुशी मिली थी उतनी खुशी उन्हें कभी नहीं मिली थी। सजग ने कहा, "अब जब भी हमें मौका मिले हम इसी तरह राउण्ड पर निकला करेंगे।" बाकी सबने भी हामी भरी। श्रेयस ने कहा, "हमने आज जो-जो किया है उसकी मैंने वीडियो बना ली है। मैं इसे सोशल मीडिया पर भी डालूँगा।"​कुछ देर सोचने के बाद सजग ने कहा—"नहीं, तुम अभी इसे सोशल मीडिया पर मत डालना। सोशल मीडिया पर कुछ भी डालने से पहले सोच-विचार कर लेना चाहिये कि कहीं इसका गलत असर तो नहीं होगा?"​अगले दिन वे दीदी से मिले और सारी बात बतायी।​दीदी ने वह वीडियो देखी फिर बोलीं, "इसे ज्यों का त्यों नहीं डाल सकते। थोड़ा काट-छाँटकर एडिटिंग करनी पड़ेगी।"​श्रेयस ने वह वीडियो दीदी के मोबाइल पर भेज दिया।​दीदी ने कहा, "ठीक है; मैं इसे एक-दो दिन में ‘बाल सेना की कहानी’ के रूप में सोशल मीडिया पर डाल दूँगी।" दीदी ने उन पाँचों सिपाहियों को शाबाशी और आशीर्वाद दिया।