Neta Jee in Hindi Short Stories by Rajeev kumar books and stories PDF | नेता जी

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नेता जी

उन्होंने वाणी को विराम देना ही आवश्यक समझा। उन्होंने अपने ही जवाब से कई सवाल खड़े कर दिए थे। अपनी मानसिकता छुपाने के चक्कर में छुपी हुई मानसिकता को उन्होंने उजागर कर दिया था। विकास के सारे दावे गलत सिद्ध हुए।
रामभजन सिंह, उंची कद-काठी, गोरा-चिट्टा चेहरा और गोल-मटोल तोंद लिए जहाँ भी प्रवेश करते तो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते। अपने भाषण में भजन की प्रस्तूती यदा-कदा वो कर ही दिया करते थे।
अपने गोदाम में रखे अनाज के सड़ने के सवाल के जवाब में पहले तो उन्होंने जोरदार ठहाका लगाया और फिर दांत निपोर कर कहा ’’ थोड़ा बहुत अनाज तो सड़ ही जाता है, इस अनाज को सड़ाने में मेरी तो कोई कलाकारी नहीं है, मैं तो जनता का सेवक हूं, जनता का हमेशा समझना मर्म मेरा रहा है धर्म। ’’
अगले सवाल महीला पत्रकार के द्वारा पुछा गया तो नेता जी सन्न रह गए। सवाल था कि ’’पिछले साल तो इस अनाज की जरूरत जनता को थी, फिर आपने जनता में बंटवा क्यों नहीं दिया। ’’इसका कोई सटीक जवाब देने के बजाय उन्होंने एक पत्रकार से कहा ’’ क्या पुछा था आपने, शिक्षा की स्थिति के बारे में, तो सुनिए, मैंने बेहतर शिक्षा प्रदान करने की पुरजोर कोशिश की और बहुत हद तक सफल भी रहा। मेरे क्षेत्र में शिक्षा का प्रतिशत 85 है। ’’ नेता जी की इस बात पर तालियों की गड़गड़ाहट पुरजोर हुई।
महीला पत्रकार ने फिर एक प्रश्न किया ’’ तो महिलाओं की शिक्षा का प्रतिशत कम क्यों है, आपके क्षेत्र में। ’’ अपनी बौखलाहट के कड़वे घुंट को गटकते हुए नेताजी ने कहा ’’ महिला शिक्षा का प्रतिशत कहाँ कम है। आप भी तो शिक्षीत हैं, आप भी तो इसी क्षेत्र से ही आती हैं। ’’ बोलकर नेता जी जनता को प्रणाम किया। जनता ताली बजा-बजा कर पुरी तरह से जोश में आ गई थी और नेता जी होश खोने को तैयार नहीं थे। उनको होश इस बात का था कि यहाँ से खिसकू कैसे वरणा ये तो मेरा कचड़ा करने को तैयार बैठी है। नेताजी को यह मालूम था कि अचानक से भागना भी नहीं है और रूकना भी नुकसानदेह है।
महिला पत्रकार ने नेता जी से कहा ’’ पसीना और आँसू आना अच्छी बात है मगर जनता के लिए जवाब, जनता के बीच में ही हो तो बहूत अच्छी बात है। नेता जी उधेड़बून में थे कि इस मौका को दुर्भाग्य समझूं या फिर सौभाग्य। अमीर जनता से तो नेता जी कई बार रूबरू हुए थे मगर तीन साल में पहली बार हुआ था कि गरीब जनता से रूबरू हुए हों।
जोगनिया गाँव, जहाँ से नेता जी गुजरना भी पसंद नहीं करते थे। यहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है, रास्तों का खास्ताहाल था है, लेकिन आज तो जोगनिया गाँव में बुरे फंसे थे।
महिला पत्रकार ने पुराना अखबार दिखाते हुए नेता जी से कहा ’’ नेताजी, एक बार के भाषण में आपने जोगनिया गाँव की सफायी व्यवस्था, सड़क की मरहम्मत पुरी हो जाने की बात कही थी, इस प्रकार की कागजी कार्यवायी का ब्यौरा जनता के समक्ष तो पेश कीजिए।’’ महीला पत्रकार की इस बात से नेताजी भौचक्के रह गए और पानी को सिर से उपर तक चढ़ता देखकर शांत शालीन हो गए। मौनव्रत धारण करने से पहले नेताजी ने कहा ’’ माफ किजीएगा, यह मेरा मौनव्रत का समय है। ’’
पसीने से लथपथ नेता जी मन ही मन उस महिला पत्रकार की आँसू निकालने की योजना बनाने लगे। तेढ़ी खीर और तेढ़ी अँगुली का हुनर तो नेताजी को पहले से ही पता था मगर सही समय की फिराक में वो तन-मन-धन से लग गए..................

समाप्त