The Author prem chand hembram Follow Current Read चूहों की मौज - बिल्ली मामू की मौत By prem chand hembram Hindi Children Stories Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 16 — स्कूल बस सुबह। अनाथालय का गेट खुला था। पीली स्कूल बस अंदर खड़ी थी। इं... अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 10 सुबह के 10 बज गए थे।अयान ने अपनी धड़कनों को काबू में करते हुए... दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 48 नई सुबहपटना के "विश्वास विश्वविद्यालय" से उठी रोशनी अब सीमाओ... मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 4 महीने का आखिरी हफ्ता आर्यन के लिए सबसे भारी होता था। जैसे-जै... पति परमेश्वर ऐप। आजकल विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। उसने चाँद पर बसने के र... Categories Short Stories Spiritual Stories Fiction Stories Motivational Stories Classic Stories Children Stories Comedy stories Magazine Poems Travel stories Women Focused Drama Love Stories Detective stories Moral Stories Adventure Stories Human Science Philosophy Health Biography Cooking Recipe Letter Horror Stories Film Reviews Mythological Stories Book Reviews Thriller Science-Fiction Business Sports Animals Astrology Science Anything Crime Stories Share चूहों की मौज - बिल्ली मामू की मौत (127) 651 5.9k शहर के किनारे एक विशाल अनाज का गोदाम था।दिन में वहाँ सन्नाटा पसरा रहता, पर रात होते ही वहाँ एक अलग ही दुनिया जाग उठती । गोदाम में गेहूँ, चावल, गुड़, सूखा दूध और मक्का के बड़े-बड़े ढेर लगे रहते थे।रात होते ही चूहे अपने-अपने बिलों से निकल आते।कोई बोरे में सुराख करता,कोई दाने खींचकर अपने बिल में ले जाता,तो कोई अपने बच्चों के साथ खेलता-कूदता। पूरा गोदाम मानो चूहों का एक छोटा-सा नगर था।लेकिन उस नगर पर हमेशा एक भयानक छाया मंडराती रहती थी।वहाँ एक बड़ी काली बिल्ली रहती थी—जिसे सब डरते-डरते “बिल्ली मामू” कहते थे।बिल्ली मामू बड़ी धूर्त थी।वह अंधेरे में चुपचाप बैठी रहती और जैसे ही कोई चूहा लापरवाह होता—झट से उसे दबोच लेती।इस कारण चूहों की खुशी हमेशा डर में बदल जाती ।धीरे धीरे चूहों की संख्या कम होने लगी ,आए दिन किसी न किसी के बच्चे शिकार होने लगे ,चिंटू को यह देख बड़ा ही दुःख होता उसके कई भाई बहनों को बिल्ली मामू ने चट कर लिया था ।कई बार मीटिंग हुई पर बात बन न सकी ,बिल्ली मामू का आतंक इस कदर भयावह था ,कल्पना करते ही चूहों की सांसे फूलने लगती ।मजाल है कोई उसके सामने भी आ जाय।बच्चे बूढ़े सब अपने आप को मरने के लिए भगवान के भरोसे छोड़ चुके थे ।चिंटू ने कई दिनों तक मंथन किया उसे लगा समाधान समस्या में ही समाहित है ।चूहों में एक छोटा लेकिन बहुत समझदार चूहा था— चिंटू।वह अक्सर सबको समझाता—“डरने से कुछ नहीं होगा।अगर हम बुद्धि से काम लें तो बिल्ली से भी बच सकते हैं।”लेकिन कई चूहे हँसते हुए कहते—“अरे चिंटू ! बिल्ली से अभी तक कौन जीत पाया है?”चिंटू चुप हो जाता,पर उसके मन में हमेशा कोई न कोई उपाय चलता रहता।एक दिन चिंटू ने गोदाम के कोने में एक पुराना मिट्टी का घड़ा देखा।उसे देखते ही उसके मन में एक योजना कौंधी।उसने सभी चूहों को बुलाकर कहा—“बिल्ली मामू को ताकत से नहीं हराया जा सकता,लेकिन लालच से हराया जा सकता है।”सब चूहे आश्चर्य से उसकी ओर देखने लगे।चिंटू ने अपनी योजना बताई।उस रात चूहों ने मिलकर घड़े के पास गुड़ और सूखे दूध के पैकेट रख दिए।कुछ गुड़ के टुकड़े घड़े के अंदर भी डाल दिए।थोड़ी ही देर में गुड़ की मीठी खुशबू पूरे गोदाम में फैल गई।फिर सब चूहे छिपकर बैठ गए।रात के सन्नाटे में बिल्ली मामू की नाक फड़क उठी।उसे गुड़ की खुशबू आई।वह धीरे-धीरे दबे पाँव घड़े के पास आई।अंदर झाँककर देखा—घड़े में गुड़ के टुकड़े पड़े थे।लालच में उसने तुरंत अपना सिर घड़े के अंदर डाल दिया।लेकिन घड़ा बहुत तंग था।सिर तो अंदर चला गया,पर बाहर नहीं निकल पाया।अब बिल्ली घड़े के साथ इधर-उधर भागने लगी।उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।कभी बोरे से टकराती तो ,कभी दीवार से।वह घबराकर घड़े को निकालने की बहुत कोशिश करती रही।लेकिन घड़ा और कसता चला गया।आखिरकार थककर वह वहीं गिर पड़ी।कुछ देर में उसकी सारी ताकत खत्म हो गई।अब बिल्ली मामू बिल्कुल शांत पड़ी थी।जैसे ही मामू परलोक को गमन किए चूहों में आनंद और हर्ष की लहर दौड़ गई ।कुछ देर बाद चिंटू ने धीरे से आवाज लगाई—“अब बाहर आ जाओ!”एक-एक करके चूहे अपने बिलों से बाहर निकलने लगे।उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि एक छोटे से चूहे ने अपनी बुद्धि सेबिल्ली मामू को बिना लड़े ही हरा दिया।सरदार चूहा मुस्कुराकर बोला—“देखा भाइयों!जहाँ बुद्धि होती है, वहाँ भय टिक नहीं सकता।”इसलिए कहा गया है " अक्ल बड़ी या भैंस" फिर उसने कहा—“सच ही कहा गया है—लालच मनुष्य को विनाश के द्वार तक ले जाता है।इसलिए संतोष ही सबसे बड़ा सुख है — ‘संतोषं परमं सुखम्।’”अब चूहों की खुशी का ठिकाना नहीं था।वे खुशी से नाचने लगे और चिल्लाने लगे—“अब हमारी मौज है…और बिल्ली मामू की मौत!”उस दिन के बाद गोदाम में पहली बार सच्ची शांति छा गई।📜 संदेश " बुद्धि सबसे बड़ी शक्ति है।लालच अक्सर विनाश का कारण बनता है" । डर से नहीं, समझदारी से समस्या का समाधान होता है।जयगुरु 🙏🙏🙏 Download Our App