गोलियों की आवाज़ अब और करीब आ चुकी थी।
मैं डर से कांप रही थी… और अर्जुन के हाथ में बंदूक थी।
“मेरे पीछे रहो,” उसने सख्त आवाज़ में कहा।
मैंने पहली बार उसकी आँखों में सिर्फ गुस्सा नहीं… बल्कि डर भी देखा।
जैसे वह किसी अपने को खोना नहीं चाहता।
“ये लोग कौन हैं?” मेरी आवाज़ काँप रही थी।
“दुश्मन,” उसने छोटा सा जवाब दिया।
घर के बाहर काले कपड़ों में कुछ लोग दीवार कूदकर अंदर घुस आए थे।
नौकर-चाकर चीख रहे थे।
अर्जुन ने मुझे सीढ़ियों के पीछे छुपा दिया।
“जब तक मैं ना कहूँ, बाहर मत आना,” उसने आदेश दिया।
लेकिन मैं वहीं खड़ी नहीं रह सकी।
दिल कह रहा था — वह चाहे जैसा भी हो… अब वह मेरा पति है।
बाहर से जोरदार धमाका हुआ।
अर्जुन ने एक हमलावर को पकड़कर जमीन पर गिरा दिया।
उसकी हर हरकत में प्रोफेशनल ट्रेनिंग दिख रही थी।
यह कोई साधारण बिज़नेसमैन नहीं था।
कुछ ही मिनटों में पुलिस की सायरन सुनाई दी।
हमलावर भाग गए।
घर में सन्नाटा छा गया।
अर्जुन की बाजू से खून बह रहा था।
मैं दौड़कर उसके पास पहुँची।
“आपको चोट लगी है!”
उसने मेरी तरफ देखा — पहली बार बिना गुस्से के।
“कुछ नहीं है,” वह बोला, मगर उसकी साँसें तेज़ थीं।
मैं उसे उसके कमरे में ले गई।
फर्स्ट-एड बॉक्स उठाया और उसकी शर्ट का बटन खोलने लगी।
वह कुछ पल मुझे देखता रहा।
“डर नहीं लग रहा?” उसने धीमे से पूछा।
मैंने उसकी चोट साफ करते हुए कहा,
“डर तो बहुत लग रहा है… लेकिन आपसे नहीं।”
उसकी आँखों में हल्की-सी हैरानी झलकी।
“तुम पागल हो,” वह बुदबुदाया।
“हो सकती हूँ,” मैंने पहली बार मुस्कुराने की कोशिश की,
“क्योंकि मैंने नफ़रत करने वाले आदमी से शादी की है।”
वह कुछ सेकंड तक चुप रहा।
फिर अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
उसकी पकड़ मजबूत थी… मगर दर्द भरी।
“मीरा, अगर तुम्हें अपनी ज़िंदगी प्यारी है तो मुझसे दूरी बनाकर रखो,” उसने सख्ती से कहा।
“मैं जिस दुनिया में हूँ… वहाँ भरोसा और प्यार दोनों कमजोरी हैं।”
मैंने उसकी आँखों में झाँककर पूछा—
“तो क्या मैं आपकी कमजोरी बन रही हूँ?”
वह तुरंत चुप हो गया।
मेरे सवाल का जवाब उसके पास नहीं था।
उसी समय उसका फोन बजा।
“हाँ…” उसने कॉल उठाई।
कुछ सेकंड सुनने के बाद उसका चेहरा सख्त हो गया।
“उसे पकड़कर रखो। मैं आ रहा हूँ।”
मैं घबरा गई।
“कौन है?”
उसने मेरी तरफ देखा।
इस बार उसकी आवाज़ में नरमी थी—
“अगर मैं ना लौटूँ… तो इस घर से चली जाना।”
मेरे दिल की धड़कन रुक-सी गई।
“आप कहीं नहीं जाएंगे!” मैंने अचानक कह दिया।
वह ठहर गया।
“आपको लगता है मैं डरकर भाग जाऊँगी?
शादी सिर्फ आपके लिए सौदा हो सकती है…
लेकिन मेरे लिए यह रिश्ता है।”
उसने पहली बार मेरा नाम बहुत धीरे से लिया—
“मीरा…”
उस आवाज़ में कुछ था… जो पहले कभी नहीं था।
मगर अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया।
“यह ज़िद मत करो,” उसने कहा और कमरे से बाहर निकल गया।
रात के 1 बजे…
वह अब तक वापस नहीं आया था।
मेरे हाथ काँप रहे थे।
दिल घबरा रहा था।
अचानक दरवाज़ा खुला।
अर्जुन अंदर आया… मगर इस बार उसके चेहरे पर चोट के निशान थे।
मैं दौड़कर उसके पास पहुँची।
“क्या हुआ?”
वह कुछ नहीं बोला।
बस सीधे मेरे सामने आकर खड़ा हो गया।
“आज अगर तुम मेरी ज़िंदगी में नहीं होती… तो शायद मैं हार जाता,” उसने धीमे से कहा।
मैं हैरान रह गई।
“मतलब?”
उसने मेरी तरफ देखा—
“उन्होंने तुम्हारा नाम लिया था।
कहा था कि अगर मैं पीछे नहीं हटूँगा… तो तुम्हें नुकसान पहुँचाएँगे।”
मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।
“मुझे?”
“हाँ,” उसकी आवाज़ भारी थी।
“और यही वजह है कि मैं तुमसे दूरी बनाकर रखता हूँ।”
मेरी आँखों में आँसू आ गए।
“तो आप मुझसे नफ़रत नहीं करते?”
वह हल्का-सा मुस्कुराया… बहुत हल्का।
“नफ़रत करना आसान होता है, मीरा।
मुश्किल है… किसी को अपने करीब आने देना।”
कमरे में खामोशी छा गई।
मैंने धीरे से कहा—
“तो मुझे दूर मत कीजिए।
मैं आपकी कमजोरी नहीं… ताकत बनना चाहती हूँ।”
उसने एक पल के लिए मेरी ओर हाथ बढ़ाया…
फिर रोक लिया।
“तुम नहीं जानती, मैं कौन हूँ।”
मैंने हिम्मत करके कहा—
“तो बता दीजिए।”
वह मेरी आँखों में देखते हुए बोला—
“मैं सिर्फ बिज़नेसमैन नहीं हूँ…
मैं उस नेटवर्क का हिस्सा हूँ जिसे इस शहर में ‘शैडो ग्रुप’ कहा जाता है।”
मेरी साँसें अटक गईं।
“और अब… तुम्हारा नाम भी उस लिस्ट में आ चुका है।”
“कौन-सी लिस्ट?” मैंने घबराकर पूछा।
वह जवाब देता, उससे पहले ही उसके फोन पर एक मैसेज आया।
उसने स्क्रीन देखी… और उसका चेहरा सख्त हो गया।
मैंने काँपते हुए पूछा—
“क्या हुआ?”
उसने फोन मेरी तरफ बढ़ाया।
स्क्रीन पर मेरी तस्वीर थी…
और नीचे लिखा था—
“Next Target.”
मेरे हाथ से फोन गिर गया।
अर्जुन ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया।
पहली बार… उसने मुझे बाहों में लिया।
“अब चाहे कुछ भी हो,” उसने दाँत भींचते हुए कहा,
“जो भी तुम्हारी तरफ बढ़ेगा… उसे मुझसे होकर गुजरना पड़ेगा।”
मेरे दिल की धड़कनें तेज़ थीं…
डर भी था…
लेकिन उस डर के बीच एक अजीब-सी सुरक्षा का एहसास भी।
शायद यही प्यार की शुरुआत थी।
लेकिन बाहर अंधेरा और गहरा हो रहा था…
और इस बार लड़ाई सिर्फ अर्जुन की नहीं थी—
अब मैं भी इस जंग का हिस्सा थी।
(जारी रहेगा…)