Childhood Friends - Episode 1 in Hindi Anything by Yuvraj Chouhan books and stories PDF | Childhood Friends - Episode 1

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Childhood Friends - Episode 1

शुरुआत जो किस्मत बन गई
भोपाल की सुबहों में एक अलग सुकून होता है। हल्की ठंडी हवा, दूर मंदिर की घंटियों की आवाज़, और गलियों में खेलते बच्चे। नीलबड़ की एक साधारण सी कॉलोनी में दो घर आमने-सामने थे। उन घरों के बीच की छोटी सी दीवार ने दो परिवारों को अलग किया था, लेकिन दो बच्चों को जोड़ दिया था।
उनका नाम था — शिवाय और विवान।
दोनों की दोस्ती तब शुरू हुई थी जब वे केवल तीन साल के थे। उनके माता-पिता शाम को बाहर कुर्सियाँ डालकर बैठते, और दोनों बच्चे मिट्टी में प्लास्टिक की गाड़ियों से खेलते हुए “फैक्ट्री-फैक्ट्री” खेलते।
“ये मेरी कंपनी है,” छोटा सा शिवाय कहता।
विवान तुरंत जवाब देता, “मैं इसका पार्टनर हूँ।”
उन्हें क्या पता था कि यह खेल एक दिन उनकी असली जिंदगी बन जाएगा।
स्कूल के दिन
नर्सरी से लेकर बारहवीं तक दोनों साथ पढ़े।
शिवाय शांत स्वभाव का था। वह ज्यादा बोलता नहीं था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे।
विवान बिल्कुल उल्टा था — आत्मविश्वासी, मिलनसार और हमेशा आगे रहने वाला।
कक्षा 6 में जब नया सत्र शुरू हुआ, उसी दिन शिवाय की जिंदगी बदल गई।
क्लास में एक नई लड़की आई — अनन्या।
सफेद रिबन से बंधे बाल, बड़ी गहरी आँखें और एक ऐसी मुस्कान जो सीधे दिल में उतर जाए। उस दिन पहली बार शिवाय ने महसूस किया कि दिल की धड़कनें भी बदल सकती हैं।
विवान ने हल्की सी कोहनी मारते हुए कहा,
“भाई… तू गया।”
शिवाय ने कुछ नहीं कहा, लेकिन वह सच में जा चुका था।

आठ साल की खामोशी 

समय तेज़ी से बीता।
कक्षा 8… 9… 10…
हर साल शिवाय सोचता — “इस बार बोल दूँगा।”
लेकिन हर बार हिम्मत साथ छोड़ देती।
अनन्या उसकी अच्छी दोस्त बन गई। ग्रुप स्टडी, स्कूल फंक्शन, फेयरवेल — हर जगह तीन लोग साथ दिखते थे — शिवाय, विवान और अनन्या।
इसी बीच कक्षा 9 में विवान की जिंदगी में रिया आई।
रिया समझदार थी, लेकिन थोड़ा अधिकार जताने वाली। उसे विवान से बहुत लगाव था। धीरे-धीरे दोनों रिलेशनशिप में आ गए।
एक दिन रिया ने सीधा सवाल किया,
“वो शिवाय और अनन्या के बीच कुछ है क्या?”
विवान हँस दिया, “नहीं, शिवाय तो बहुत शर्मीला है।”
रिया ने धीरे से कहा,
“शर्मीले लोग सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। वे सब छुपा लेते हैं।”
उसे क्या पता था कि वही बात आगे चलकर सच साबित होगी।

बारहवीं के बाद कॉलेज शुरू हुआ। सब अलग कॉलेज में गए, लेकिन भोपाल छोटा शहर है, मिलना-जुलना जारी रहा।
अब तक शिवाय को अनन्या को पसंद करते हुए आठ साल हो चुके थे।
एक शाम उसने खुद को आईने में देखा। साधारण शरीर, सामान्य व्यक्तित्व… और ढेर सारी अधूरी बातें।
उसी दिन उसने फैसला किया।
“मैं खुद को बदलूँगा। सिर्फ उसके लिए नहीं… अपने लिए।”
अगले दिन से सुबह 5 बजे उठना शुरू।
जिम जॉइन किया।
घर का खाना डबल कर दिया।
यूट्यूब से बिज़नेस वीडियो देखना शुरू किया।
नोट्स बनाना, प्लान बनाना।
विवान हर कदम पर उसके साथ था।
“अगर करना है तो बड़ा करेंगे,” विवान ने कहा।
दोनों ने मिलकर डिजिटल मार्केटिंग का छोटा सा काम शुरू किया। भोपाल के छोटे कैफे और कोचिंग इंस्टिट्यूट्स के सोशल मीडिया अकाउंट संभालने लगे।
शुरुआत में लोग हँसे।
“तुम दोनों बच्चे हो।”
लेकिन धीरे-धीरे काम चल पड़ा।

एक रात विवान के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया —
“शिवाय को अनन्या से दूर रखो। वरना सब खत्म हो जाएगा।”
पहले तो उसने मजाक समझा।
लेकिन अगले ही दिन अनन्या ने शिवाय से दूरी बनानी शुरू कर दी।
मैसेज का जवाब देर से।
कॉल उठाना बंद।
मुलाकात टालना।
शिवाय परेशान था।
“मैंने क्या गलत किया?” उसने विवान से पूछा।
विवान के पास जवाब नहीं था।
उसी रात एक और मैसेज आया।
इस बार फोटो थी — शिवाय जिम के बाहर खड़ा था, और कोई दूर से उसकी तस्वीर ले रहा था।
अब यह मजाक नहीं था।
कोई उन्हें देख रहा था।
कोई खेल खेल रहा था।

शिवाय ने हिम्मत करके अनन्या से पूछा,
“तुम मुझसे दूर क्यों जा रही हो?”
अनन्या ने नजरें चुराईं।
“शायद थोड़ा फासला बेहतर होगा।”
“किसके लिए बेहतर?” उसकी आवाज भारी हो गई।
अनन्या चुप रही।
वह चली गई।
उस रात जिम में शिवाय ने खुद को सीमा से आगे धकेल दिया। जब तक हाथ काँपने न लगे, वह रुका नहीं।
उसके अंदर दर्द था। गुस्सा था। उलझन थी।
और कहानी अभी बस शुरू हुई थी।