भाग 1: अभिशप्त कब्रिस्तान
छोटे शहर के बाहर एक पुराना कब्रिस्तान था। लोग कहते थे कि वहाँ एक चुड़ैल रहती है जो हर रात निकलती है और जिंदा लोगों का खून पीती है। कई लोग गायब हो चुके थे जो गलती से रात में उस कब्रिस्तान के पास से गुज़रे थे।
25 साल का राहुल एक डॉक्टर था। वह इन बातों को अंधविश्वास मानता था। एक रात, जब वह एक मरीज को देखकर लौट रहा था, तो उसे कब्रिस्तान के पास से गुज़रना पड़ा। शॉर्टकट था।
जैसे ही वह कब्रिस्तान के पास पहुँचा, उसकी कार खराब हो गई। "शिट!" राहुल ने कहा और कार से बाहर निकला।
उसने इंजन चेक किया लेकिन कुछ समझ नहीं आया। तभी उसने एक अजीब सी आवाज़ सुनी - किसी के रोने की आवाज़।
"कौन है वहाँ?" राहुल ने पुकारा।
कोई जवाब नहीं आया। लेकिन रोने की आवाज़ जारी रही। राहुल ने अपना फोन निकाला और टॉर्च जलाई। वह आवाज़ की तरफ बढ़ा।
कब्रिस्तान के अंदर, एक टूटी हुई कब्र के पास एक लड़की बैठी रो रही थी। उसके बाल लंबे और काले थे, कपड़े फटे हुए थे।
"तुम ठीक हो?" राहुल ने पूछा।
लड़की ने ऊपर देखा। उसका चेहरा बेहद खूबसूरत था लेकिन पीला। उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी।
"तुम... तुम यहाँ क्यों आए?" लड़की ने पूछा।
"मेरी कार खराब हो गई। लेकिन तुम यहाँ क्या कर रही हो? इतनी रात को?" राहुल ने पूछा।
"मैं... मैं यहीं रहती हूँ," लड़की ने कहा।
"यहाँ? कब्रिस्तान में?" राहुल हैरान था।
"हाँ। क्योंकि मैं मर चुकी हूँ," लड़की ने कहा।
राहुल को लगा कि लड़की पागल है। "देखो, मैं एक डॉक्टर हूँ। मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ। चलो मेरे साथ।"
"नहीं। मैं नहीं जा सकती। मैं एक आत्मा हूँ। एक चुड़ैल," लड़की ने कहा।
राहुल हँसा। "यह मज़ाक अच्छा नहीं है।"
लेकिन तभी लड़की हवा में उठने लगी। राहुल की हँसी थम गई। उसकी आँखें फटी रह गईं।
"अब विश्वास हुआ?" लड़की ने पूछा।
भाग 2: चुड़ैल की कहानी
राहुल के पैर काँप रहे थे। "तुम... तुम सच में चुड़ैल हो?"
"हाँ। मेरा नाम निशा है। 50 साल पहले मैं मारी गई थी। मेरे ही प्रेमी ने मुझे धोखा देकर मार डाला। उसने मुझे इस कब्रिस्तान में दफना दिया और किसी को नहीं बताया," निशा ने कहा।
"यह तो बहुत दुखद है। लेकिन लोग कहते हैं कि तुम लोगों को मारती हो," राहुल ने कहा।
निशा ने सिर हिलाया। "नहीं। मैं किसी को नहीं मारती। लेकिन मेरी आत्मा को शांति नहीं मिली। इसलिए मैं यहाँ भटकती रहती हूँ। और जो लोग गायब हुए, वो किसी और चुड़ैल की वजह से हुए। वो बहुत खतरनाक है। वो असली हत्यारिन है।"
"कौन?" राहुल ने पूछा।
"चंडिका। वो भी एक आत्मा है लेकिन बहुत बुरी। वो जिंदा लोगों का खून पीती है। वो इसी कब्रिस्तान में रहती है," निशा ने कहा।
"तो मुझे यहाँ से भागना चाहिए," राहुल ने कहा।
"देर हो चुकी है। वो आ रही है," निशा ने चेतावनी दी।
अचानक, एक भयानक चीख सुनाई दी। राहुल ने देखा - एक भयानक सी औरत आसमान में उड़ती हुई आ रही थी। उसके बाल उलझे हुए थे, दाँत नुकीले थे, और आँखें लाल थीं।
"तुम कौन हो?" चंडिका ने गरजते हुए पूछा।
"मैं... मैं रास्ता भटक गया हूँ," राहुल ने घबराते हुए कहा।
"तुम्हारी किस्मत खराब है। अब तुम मेरा शिकार हो," चंडिका ने कहा और राहुल की तरफ झपटी।
लेकिन निशा ने राहुल को बचाया। उसने चंडिका को रोका।
"तुम बीच में क्यों आ रही हो निशा?" चंडिका ने गुस्से से कहा।
"यह इंसान निर्दोष है। इसे जाने दो," निशा ने कहा।
"नहीं! मुझे खून चाहिए!" चंडिका चिल्लाई।
दोनों चुड़ैलों में लड़ाई शुरू हो गई। राहुल यह सब देखकर दंग रह गया।
भाग 3: राहुल का फैसला
निशा और चंडिका की लड़ाई बहुत भयानक थी। जादुई शक्तियों का इस्तेमाल हो रहा था। लेकिन चंडिका ज्यादा ताकतवर थी।
आखिरकार, चंडिका ने निशा को हरा दिया। निशा ज़मीन पर गिर गई, कमज़ोर हो गई।
"अब तुम्हारी बारी," चंडिका ने राहुल की तरफ देखा।
राहुल के पास कोई रास्ता नहीं था। लेकिन तभी उसे याद आया - उसने पढ़ा था कि चुड़ैलों को लोहे से डर लगता है।
उसने जल्दी से अपनी कार से एक लोहे की रॉड निकाली और चंडिका पर वार किया।
चंडिका चीखी और पीछे हट गई। "तुमने कैसे जाना?"
"मैं एक डॉक्टर हूँ लेकिन मैं पढ़ता भी हूँ," राहुल ने कहा।
चंडिका गुस्से में फिर से हमला करने वाली थी लेकिन राहुल ने फिर से लोहे से वार किया। इस बार चंडिका को गहरी चोट लगी।
"मैं तुम्हें माफ नहीं करूँगी!" कहकर चंडिका गायब हो गई।
राहुल ने राहत की साँस ली। वह निशा के पास गया।
"तुम ठीक हो?" राहुल ने पूछा।
"हाँ। तुमने मुझे बचाया। शुक्रिया," निशा ने कहा।
"तुमने पहले मुझे बचाया। हम बराबर हैं," राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा।
निशा ने उसकी आँखों में देखा। "तुम अच्छे इंसान हो। इतने सालों में पहली बार किसी ने मेरी मदद की।"
"क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ? तुम्हें शांति दिलाने में?" राहुल ने पूछा।
निशा ने सोचा। "शायद। अगर तुम मेरे हत्यारे को ढूंढ सको और उसे सज़ा दिला सको, तो शायद मुझे शांति मिल जाए।"
"कौन था तुम्हारा हत्यारा?" राहुल ने पूछा।
"उसका नाम विक्रम था। वो अब भी जिंदा है। शहर में रहता है। एक बड़ा बिज़नेसमैन बन गया है," निशा ने कहा।
राहुल ने वादा किया - वह निशा के हत्यारे को सज़ा दिलाएगा।
भाग 4: सच्चाई की खोज
अगले कुछ दिनों में, राहुल ने विक्रम के बारे में जानकारी इकट्ठी की। विक्रम एक 75 साल का अमीर बिज़नेसमैन था। उसकी बहुत इज़्ज़त थी शहर में।
लेकिन राहुल ने गहराई से खोजबीन की। उसे पुराने अख़बारों में कुछ सुराग मिले। 50 साल पहले, एक लड़की गायब हो गई थी - निशा। उस समय विक्रम उसका प्रेमी था।
राहुल ने पुलिस से संपर्क किया लेकिन उन्होंने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया। "50 साल पुराना केस? और कोई सबूत नहीं है?"
राहुल को समझ आ गया कि उसे खुद ही सबूत ढूंढने होंगे।
एक रात, राहुल फिर से कब्रिस्तान गया। निशा वहाँ थी।
"मुझे सबूत चाहिए। क्या तुम मुझे बता सकती हो कि विक्रम ने तुम्हें कहाँ मारा था?" राहुल ने पूछा।
"हाँ। उसके पुराने घर में। लेकिन अब वो घर खाली है," निशा ने कहा।
राहुल उस घर में गया। घर पुराना और टूटा हुआ था। उसने पूरे घर की तलाशी ली। आखिरकार, उसे तहखाने में कुछ मिला - खून के धब्बे, और एक पुरानी चिट्ठी।
चिट्ठी निशा ने लिखी थी - "अगर कोई यह पढ़े, तो जान ले कि विक्रम ने मुझे धोखा दिया। उसने मुझसे सिर्फ पैसों के लिए प्यार का नाटक किया। जब मैंने सच जान लिया, तो उसने मुझे मार डाला।"
यह एक बड़ा सबूत था।
राहुल ने चिट्ठी पुलिस को दी। साथ ही, उसने DNA टेस्ट के लिए खून के धब्बे भी दिए।
कुछ दिनों बाद, रिपोर्ट आई - DNA निशा का था। और तहखाने में मिले और सबूतों से साबित हो गया कि विक्रम ही हत्यारा था।
पुलिस ने विक्रम को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में केस चला और विक्रम को आजीवन कारावास की सज़ा हो गई।
भाग 5: शांति और प्रेम
जिस दिन विक्रम को सज़ा हुई, राहुल कब्रिस्तान गया। निशा वहाँ थी, लेकिन इस बार उसके चेहरे पर शांति थी।
"तुमने मेरे लिए बहुत कुछ किया। अब मुझे शांति मिल गई," निशा ने कहा।
"मुझे खुशी है," राहुल ने कहा। लेकिन उसके दिल में दुख था। वह निशा से प्यार करने लगा था।
निशा ने उसकी आँखों में देखा। "तुम उदास हो?"
"नहीं... मैं बस... मुझे तुम्हारी याद आएगी," राहुल ने कहा।
निशा मुस्कुराई। "मुझे भी तुम्हारी याद आएगी। तुम पहले इंसान हो जिसने मुझ पर विश्वास किया। जिसने मेरी मदद की।"
"क्या हम फिर कभी मिल सकेंगे?" राहुल ने पूछा।
"शायद। अगले जन्म में," निशा ने कहा।
और फिर, एक सफेद रोशनी में, निशा गायब हो गई। राहुल वहाँ अकेला खड़ा रह गया।
लेकिन उसे शांति थी कि उसने एक आत्मा को मुक्ति दिलाई।
कुछ साल बाद, राहुल ने इस पूरी कहानी को एक किताब में लिखा। किताब बहुत मशहूर हुई। लोगों ने उस कब्रिस्तान पर एक मंदिर बनवाया, निशा की याद में।
और राहुल... उसने निशा को कभी नहीं भूला।
अंत