भाग 1
रात असामान्य रूप से शांत थी। शहर की जगमगाती रोशनी के बावजूद हवा में एक अजीब डर तैर रहा था। आधी रात के बाद की सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही कम हो चुकी थी। केवल कभी-कभी गुजरती किसी कार की हेडलाइट्स अंधेरे को चीरतीं और फिर सब कुछ वापस सन्नाटे में डूब जाता।
इसी सन्नाटे के बीच, एक लड़की तेज़ कदमों से सड़क पार कर रही थी—आयरा। उसके चेहरे पर थकान और हल्की बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। ऑफिस में देर तक काम करने के कारण उसे आज फिर अकेले घर लौटना पड़ रहा था, और वह इस बात से खुश नहीं थी।
उसने अपने बैग से फोन निकाला और टैक्सी बुक करने की कोशिश की, लेकिन नेटवर्क बार-बार जा रहा था।
“कमाल है…” उसने बुदबुदाते हुए कहा।
तभी पीछे से किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। उसने पलटकर देखा, लेकिन सड़क खाली थी। उसे लगा शायद उसका भ्रम हो।
वह जल्दी-जल्दी आगे बढ़ने लगी। अचानक हवा का तेज़ झोंका आया और सड़क के किनारे लगे पेड़ जोर से हिल उठे। आयरा के कदम रुक गए।
और तभी…
उसके सामने, बिल्कुल अचानक, एक आदमी खड़ा था।
लंबा, चौड़े कंधों वाला, काले कोट में लिपटा हुआ। उसकी आंखें अजीब तरह से चमक रही थीं—जैसे अंधेरे में भी सब कुछ देख सकती हों।
आयरा घबरा गई।
“आप… आप कौन हैं?” उसने पीछे हटते हुए पूछा।
वह आदमी कुछ पल उसे घूरता रहा, फिर धीमी आवाज़ में बोला—
“तुम्हें यहां नहीं होना चाहिए।”
उसकी आवाज़ में अजीब सर्दी थी, जैसे बर्फ पर चलती हवा।
“मुझे… मुझे घर जाना है,” आयरा ने कहा और दूसरी दिशा में जाने लगी।
लेकिन तभी गली के कोने से तीन आदमी निकल आए। उनकी आंखों में बुरी नीयत साफ दिखाई दे रही थी।
“इतनी रात को अकेली?” उनमें से एक ने हंसते हुए कहा।
आयरा का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
वह पीछे हटते-हटते उसी रहस्यमयी आदमी के पास आ खड़ी हुई। उसने बिना उसकी ओर देखे कहा—
“भाग जाओ।”
“क्या?” आयरा ने घबराकर पूछा।
लेकिन इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती, वह आदमी बिजली की गति से आगे बढ़ा।
अगले कुछ सेकंड में जो हुआ, आयरा ठीक से देख भी नहीं पाई। बस चीखें सुनाई दीं, परछाइयां हिलती दिखीं, और फिर…
सब कुछ शांत।
तीनों आदमी जमीन पर बेहोश पड़े थे।
आयरा का दिल डर से कांप उठा।
“ये… आपने क्या किया?” उसकी आवाज़ कांप रही थी।
वह आदमी वापस उसकी ओर मुड़ा। उसकी आंखें अब लाल चमक रही थीं।
आयरा की सांस अटक गई।
“डरने की जरूरत नहीं,” उसने शांत स्वर में कहा, “तुम सुरक्षित हो।”
लेकिन आयरा को उसके शब्दों से ज्यादा उसकी आंखों ने डरा दिया।
वह पलटी और पूरी ताकत से भागने लगी।
उस रात वह बिना पीछे देखे घर पहुंची। दरवाजा बंद करते ही वह फर्श पर बैठ गई। उसका पूरा शरीर कांप रहा था।
“वो… इंसान नहीं था…” उसने खुद से कहा।
लेकिन अगले दिन ऑफिस में बैठी आयरा बार-बार उसी चेहरे को याद करती रही।
वो अजीब ठंडा चेहरा।
वो रहस्यमयी आंखें।
और अजीब बात यह थी कि डर के साथ-साथ उसे एक अजीब खिंचाव भी महसूस हो रहा था।
उसी शाम, ऑफिस से निकलते समय, वह अचानक उससे फिर टकरा गई।
वह बिल्डिंग के बाहर खड़ा था, जैसे उसका इंतजार कर रहा हो।
आयरा का दिल जोर से धड़कने लगा।
“तुम…?” वह हकलाते हुए बोली।
वह शांत स्वर में बोला, “मेरा नाम एरियन है।”
“आप मेरा पीछा कर रहे हैं?”
“मैं तुम्हारी रक्षा कर रहा हूं।”
आयरा को गुस्सा आया।
“मुझे आपकी मदद की जरूरत नहीं!”
वह जाने लगी, लेकिन एरियन ने धीरे से कहा—
“कल रात जो लोग थे, वे तुम्हें ढूंढ रहे थे।”
आयरा रुक गई।
“क्यों?”
एरियन ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—
“क्योंकि तुम खास हो।”
उसके शब्द सुनकर आयरा के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
“मुझमें ऐसा क्या खास है?” उसने पूछा।
एरियन कुछ पल चुप रहा, फिर बोला—
“तुम्हारा खून…”
आयरा का चेहरा सफेद पड़ गया।
“क्या मतलब?”
एरियन ने गहरी सांस ली।
“मैं इंसान नहीं हूं… मैं एक वैम्पायर हूं।”
कुछ सेकंड के लिए समय जैसे थम गया।
आयरा ने सोचा वह मजाक कर रहा है। लेकिन उसकी आंखों की चमक, उसकी असामान्य ताकत—सब कुछ याद आते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
“ये मजाक है?” उसने कमजोर आवाज़ में पूछा।
“काश होता,” एरियन बोला।
आयरा डर से पीछे हट गई।
“मुझसे दूर रहो!”
वह दौड़ती हुई वहां से चली गई।
लेकिन उस रात…
जब वह अपने कमरे में सो रही थी, खिड़की अचानक अपने आप खुल गई।
ठंडी हवा का झोंका अंदर आया।
और कमरे के अंधेरे कोने में, एरियन खड़ा था।
आयरा की आंख खुली तो उसने उसे देखा—और चीखने ही वाली थी कि एरियन ने उंगली होंठों पर रख दी।
“श्श्श…”
“तुम यहां कैसे आए?” आयरा ने कांपते हुए पूछा।
एरियन की नजर खिड़की की ओर गई।
“दरवाजे वैम्पायर को नहीं रोकते।”
आयरा का दिल जोर से धड़कने लगा।
“तुम मुझे नुकसान पहुंचाने आए हो?”
एरियन ने धीरे से सिर हिलाया।
“अगर मैं चाहता… तो कल रात ही कर सकता था।”
वह उसके करीब आया, लेकिन उसकी आंखों में खून की प्यास नहीं, बल्कि अजीब दर्द था।
“मैं तुम्हें बचाने आया हूं।”
“किससे?”
एरियन की आवाज़ गंभीर हो गई।
“मेरी दुनिया से।”
आयरा का गला सूख गया।
“और… तुम्हारी दुनिया मुझे क्यों चाहती है?”
एरियन की आंखें गहरी हो गईं।
“क्योंकि तुम्हारे खून में वो ताकत है… जो वैम्पायर को अजेय बना सकती है।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
आयरा को पहली बार महसूस हुआ कि वह किसी खतरनाक खेल में फंस चुकी है।
लेकिन उसे नहीं पता था…
सबसे बड़ा खतरा बाहर नहीं…
उसके सामने खड़ा वही रहस्यमयी वैम्पायर बनने वाला था।
और उनकी कहानी अभी बस शुरू हुई थी…
जारी रहेगा… (भाग 2 में)