भाग 1
दिल्ली की ठंडी रात, चमकती रोशनी, और शाही होटल "रॉयल क्राउन" के बाहर खड़ी महंगी गाड़ियाँ इस बात का सबूत थीं कि आज यहाँ कोई बड़ी शादी हो रही है। अंदर म्यूज़िक, हँसी, और लोगों की भीड़ थी, मगर इस भीड़ में दो ऐसे लोग भी थे जिनकी ज़िंदगी अभी एक ऐसी गलती की ओर बढ़ रही थी, जिसका असर उनके पूरे जीवन पर पड़ने वाला था।
आरव मल्होत्रा
दिल्ली के सबसे बड़े बिज़नेस टायकून का बेटा। ठंडा दिमाग, सख्त स्वभाव, और अपनी दुनिया में खोया रहने वाला इंसान। प्यार, रिश्ते, और भावनाएँ उसके लिए बस कमजोरी थीं।
सिया कपूर
एक साधारण लेकिन आत्मसम्मान से भरी लड़की। अपने परिवार से बेहद प्यार करने वाली। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी ज़िंदगी किसी अजनबी आदमी से अचानक जुड़ जाएगी।
शादी सिया की बड़ी बहन की थी। पूरा परिवार खुश था। सिया भी खुश थी, मगर उसकी खुशी में एक हल्की सी बेचैनी थी क्योंकि शादी के घर में हर कोई उसे छेड़ रहा था—
"अब अगली बारी तुम्हारी है।"
वह मुस्कुराकर बात टाल देती।
उधर, आरव अपने दोस्त कबीर की शादी में सिर्फ मजबूरी में आया था। उसे शादियाँ पसंद नहीं थीं, लेकिन बिज़नेस रिलेशन की वजह से आना पड़ा।
दोनों की मुलाकात अचानक हुई।
सिया गलती से जल्दी-जल्दी चलते हुए आरव से टकरा गई। उसके हाथ में पकड़ा जूस आरव की शर्ट पर गिर गया।
“ओह गॉड! सॉरी!” सिया घबरा गई।
आरव ने गुस्से से उसकी तरफ देखा।
“देख कर नहीं चल सकती?”
सिया को बुरा लगा।
“गलती से हुआ है, जानबूझकर नहीं।”
आरव कुछ बोलता, उससे पहले ही सिया चली गई।
दोनों के मन में एक-दूसरे की गलत छवि बन चुकी थी।
रात गहरी होती गई। शादी की रस्में खत्म हो चुकी थीं। मेहमान पार्टी एरिया में थे। सिया अपनी दोस्तों के साथ मज़ाक में थोड़ा ड्रिंक कर बैठी, जो उसने पहले कभी नहीं किया था।
उधर, आरव भी बिज़नेस टेंशन की वजह से काफी पी चुका था।
किस्मत ने खेल खेला।
दोनों की फिर मुलाकात होटल के कॉरिडोर में हुई। दोनों नशे में थे, दोनों परेशान थे, और दोनों को याद भी नहीं रहा कि वे एक-दूसरे को जानते भी नहीं।
सिया अपने कमरे का दरवाज़ा ढूँढ रही थी।
आरव भी अपने कमरे की ओर जा रहा था।
नशे में गलती हुई — और दोनों एक ही कमरे में पहुँच गए।
रात धुंधली थी।
बातों-बातों में झगड़ा हुआ, फिर हँसी, फिर खामोशी… और फिर ऐसी गलती हो गई जिसने उनकी ज़िंदगी बदल दी।
सुबह की पहली किरण कमरे में आई।
सिया की आँख खुली।
उसने खुद को एक अजनबी आदमी के साथ एक ही बिस्तर पर पाया।
उसकी साँसें रुक गईं।
“ये… क्या हुआ?”
आरव भी उठ बैठा। दोनों कुछ सेकंड एक-दूसरे को देखते रहे, फिर सच समझते ही सिया का चेहरा सफेद पड़ गया।
“तुम… तुमने…!” वह चिल्लाई।
आरव ने माथा पकड़ा।
“शांत रहो। मैं भी उतना ही shocked हूँ।”
“ये कैसे हुआ?”
दोनों को पिछली रात की यादें धुंधली-सी आने लगीं।
सिया की आँखों में आँसू आ गए।
“मेरी जिंदगी खत्म हो गई…”
आरव ने ठंडे स्वर में कहा—
“Relax. ये बस एक mistake थी। भूल जाओ।”
यह सुनते ही सिया भड़क उठी।
“तुम्हारे लिए mistake होगी, मेरे लिए नहीं! अगर किसी को पता चला तो मेरा परिवार… मेरी इज्जत…”
तभी दरवाज़ा खुला।
दोनों के परिवार के लोग अंदर आ गए।
और उन्हें उस हालत में देखकर सब कुछ समझ गए।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
सिया की माँ बेहोश हो गईं।
आरव के पिता का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।
अब मामला सिर्फ गलती का नहीं था — इज़्ज़त का था।
कुछ घंटों बाद, दोनों परिवार आमने-सामने बैठे थे।
सिया रो रही थी। आरव चुप था।
आखिर फैसला लिया गया—
दोनों की तुरंत शादी होगी।
सिया ने विरोध किया।
“मैं इस आदमी से शादी नहीं कर सकती!”
आरव बोला—
“मैं भी मजबूर नहीं हूँ शादी के लिए।”
लेकिन परिवारों ने साफ कह दिया—
“या तो शादी, या बदनामी।”
दोनों के पास कोई रास्ता नहीं बचा।
उसी शाम, बिना खुशी, बिना प्यार, बिना तैयारी के—
आरव और सिया की शादी हो गई।
शादी के बाद, सिया जब मल्होत्रा हाउस पहुँची, तो उसे महसूस हुआ कि वह किसी महल में आ गई है।
लेकिन वह महल उसे जेल जैसा लग रहा था।
पहली रात।
कमरे में खामोशी थी।
आरव ने कोट उतारते हुए कहा—
“सुनो, ये शादी सिर्फ नाम की है। तुम अपनी जिंदगी जीना, मैं अपनी। बस बाहर दुनिया के सामने पति-पत्नी बनकर रहना होगा।”
सिया ने ठंडी आवाज़ में कहा—
“मुझे तुमसे कोई उम्मीद नहीं।”
दोनों ने कमरे के अलग-अलग हिस्सों में सोना चुना।
लेकिन उन्हें क्या पता था—
उनकी यह शादी सिर्फ गलती नहीं, बल्कि आने वाले तूफान की शुरुआत थी।
क्योंकि कोई और भी था जो इस शादी से खुश नहीं था…
और वह किसी भी हद तक जा सकता था।
भाग 1 समाप्त