My Cruel Love in Hindi Drama by ziya books and stories PDF | My Cruel Love

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My Cruel Love

भाग 1


शादी के मंडप में बैठी आलिया का दिल अजीब डर से भरा हुआ था। चारों तरफ रोशनी, मेहमानों की भीड़, संगीत और खुशियों की आवाज़ें थीं, लेकिन उसके अंदर सब कुछ शांत और भारी था—जैसे तूफ़ान आने से पहले की खामोशी।
उसकी नज़र सामने बैठे दूल्हे पर गई—आरव मल्होत्रा।
शहर का सबसे ताकतवर बिज़नेसमैन, जिसकी एक मुस्कान शेयर मार्केट बदल सकती थी और एक गुस्सा कई लोगों की ज़िंदगी खत्म कर सकता था।
लेकिन आज वह उसका पति बनने जा रहा था।
आलिया ने कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी ज़िंदगी इस मोड़ पर आ जाएगी। यह शादी प्यार से नहीं, मजबूरी से हो रही थी।
तीन महीने पहले…
आलिया के पिता की कंपनी अचानक भारी कर्ज़ में डूब गई थी। बैंक ने नोटिस भेज दिया था। घर बिकने वाला था। उसी वक्त आरव मल्होत्रा ने मदद का हाथ बढ़ाया।
मदद की कीमत थी—आलिया से शादी।
पिता की जान बचाने के लिए आलिया ने खुद को सौदे में झोंक दिया।
मंडप में मंत्रों की आवाज़ गूँजी।
“अब दूल्हा दुल्हन की मांग में सिंदूर भरे।”
आरव ने बिना किसी भावना के सिंदूर उठाया और आलिया की मांग भर दी।
उस पल आलिया को लगा जैसे उसकी आज़ादी की आखिरी सांस भी खत्म हो गई।
शादी खत्म हुई। सब खुश थे—सिवाय दूल्हा-दुल्हन के।
सुहागरात
कमरा फूलों से सजा था। आलिया पलंग पर बैठी थी, हाथ कांप रहे थे।
दरवाज़ा खुला।
आरव अंदर आया, कोट उतारते हुए बोला—
“डरने की ज़रूरत नहीं। मैं जबरदस्ती करने वालों में से नहीं हूँ।”
आलिया ने राहत की सांस ली, लेकिन अगली बात ने उसे सख्त कर दिया।
“यह शादी सिर्फ नाम की है। तुम अपनी जिंदगी जी सकती हो… बस मेरी इज्जत पर दाग नहीं लगना चाहिए।”
आलिया ने पहली बार उसे ध्यान से देखा।
उसकी आँखों में ठंडापन था। जैसे वह किसी पर भरोसा करना ही भूल चुका हो।
“और आप?” आलिया ने धीमे से पूछा।
आरव हल्का सा मुस्कुराया।
“मेरे पास पहले से ही बहुत दुश्मन हैं। मुझे और किसी की जरूरत नहीं।”
वह सोफे पर जाकर लेट गया।
उस रात दोनों के बीच सिर्फ दूरी थी।
अगली सुबह
मल्होत्रा मेंशन किसी महल से कम नहीं था। नौकर, सुरक्षा, कैमरे—हर जगह नियंत्रण।
आरव की माँ, मीरा मल्होत्रा, ने आलिया का स्वागत ठंडे अंदाज़ में किया।
“हमारे घर की बहू को नियम सीखने पड़ेंगे।”
आलिया समझ गई—यह घर आसान नहीं होगा।
नाश्ते की मेज पर सब चुप थे।
अचानक टीवी पर खबर चली—
“मल्होत्रा ग्रुप ने प्रतिद्वंद्वी कंपनी को खरीद लिया।”
आलिया ने देखा—आरव के चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी। बस ठंडा संतोष।
जैसे जीतना उसकी आदत हो।
कुछ दिन बाद
आलिया धीरे-धीरे घर में ढलने लगी।
लेकिन एक बात उसे परेशान करती थी।
आरव अक्सर रात देर से लौटता। कभी-कभी घायल, कभी गुस्से में।
एक रात…
दरवाज़ा ज़ोर से खुला।
आरव का माथा घायल था।
आलिया दौड़कर आई।
“ये क्या हुआ?”
“तुम्हें फर्क नहीं पड़ना चाहिए,” वह बोला।
लेकिन वह चुप नहीं रही।
उसने फर्स्ट एड बॉक्स उठाया और उसका घाव साफ करने लगी।
आरव पहली बार चुपचाप उसे देखने लगा।
“तुम क्यों कर रही हो ये?”
आलिया ने बिना ऊपर देखे कहा—
“क्योंकि… आप मेरे पति हैं।”
कमरे में कुछ पल खामोशी छा गई।
शायद पहली बार किसी ने बिना डर या स्वार्थ के उसकी परवाह की थी।
लेकिन खतरा पास था।
आरव के बिज़नेस दुश्मन शांत नहीं थे।
एक शाम, जब आलिया अकेली शॉपिंग से लौट रही थी, अचानक एक वैन उसके सामने आकर रुकी।
दो आदमी बाहर निकले।
“मैडम, बॉस आपसे मिलना चाहते हैं।”
आलिया कुछ समझ पाती उससे पहले उसे जबरदस्ती गाड़ी में बैठा लिया गया।
उसका फोन गिर गया।
मल्होत्रा मेंशन
रात हो चुकी थी।
आरव घर लौटा।
“आलिया कहाँ है?”
नौकर घबरा गए।
“मैडम अभी तक नहीं लौटी…”
आरव की आँखें खतरनाक हो गईं।
उसने सिक्योरिटी कैमरा चेक किया।
फोन उठाया।
“पूरे शहर को छान मारो। मेरी पत्नी को कुछ हुआ… तो कोई ज़िंदा नहीं बचेगा।”
पहली बार उसके चेहरे पर असली डर था।
किसी अंधेरे गोदाम में
आलिया की आँखें खुलीं।
हाथ बंधे हुए थे।
सामने एक आदमी बैठा था।
“मल्होत्रा की बीवी… अच्छी कीमत मिलेगी।”
आलिया का दिल जोर से धड़कने लगा।
उसे लगा—शायद अब वह आरव को कभी नहीं देख पाएगी।
तभी…
गोदाम के बाहर गोलियों की आवाज़ गूंजी।
दरवाज़ा तोड़ा गया।
धुएं के बीच एक परछाईं अंदर आई।
आरव।
उसकी आँखों में खून उतर आया था।
कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया।
वह आलिया के सामने आया, रस्सियाँ खोलीं।
“तुम ठीक हो?”
पहली बार उसकी आवाज़ में घबराहट थी।
आलिया ने कांपते हुए उसे पकड़ लिया।
और अनजाने में उसके सीने से लगकर रो पड़ी।
आरव के हाथ खुद-ब-खुद उसके कंधों पर आ गए।
उस पल कुछ बदल गया था।
लेकिन यह कहानी प्यार की नहीं…
एक खतरनाक खेल की शुरुआत थी।
क्योंकि अब दुश्मनों ने समझ लिया था—
आरव मल्होत्रा की सबसे बड़ी कमजोरी मिल चुकी है।
जारी रहेगा… (भाग 2 में असली खेल शुरू होगा)