भाग 1
दुबई की शामें झूठी होती हैं।
खूबसूरत, चमकदार… और भीतर से बेरहम।
सूरज समुद्र में डूब रहा था। आसमान गुलाबी और बैंगनी रंगों में बंट चुका था। सामने शीशे की तरह चमकता शहर—और उसके बीच, आसमान को चीरता हुआ खड़ा बुर्ज खलीफा।
दूर से देखने पर लगता है जैसे यह शहर सपनों से बना हो…
पर जो इसके अंदर रहते हैं, वे जानते हैं—यहाँ सपने नहीं, सौदे होते हैं।
और आज, एक सौदा होने वाला था।
1
आयरा खान ने अपनी उंगलियाँ आपस में कस लीं।
एयर-कंडीशंड ऑफिस के बावजूद उसकी हथेलियाँ ठंडी नहीं हो रही थीं।
सामने कांच की दीवार के उस पार दुबई फैली हुई थी—जैसे पूरा शहर किसी एक आदमी की मुट्ठी में कैद हो।
वह आदमी था—
ज़ैद अल-रशीद।
नाम ही काफी था।
अरब मीडिया का सबसे रहस्यमयी बिज़नेस टायकून।
तेल, रियल एस्टेट, शिपिंग, एविएशन—जो चाहे, जहाँ चाहे।
पर उसकी निजी ज़िंदगी…
एक बंद किताब।
आयरा ने अपनी नज़रें फाइल पर टिकाईं।
CONTRACT MARRIAGE AGREEMENT
उसने एक गहरी सांस ली।
“ये पागलपन है…”
वह खुद से बुदबुदाई।
दरवाज़ा खुला।
“मिस आयरा खान।”
सेक्रेटरी की आवाज़ में कोई भावना नहीं थी।
“मिस्टर ज़ैद आपसे अभी मिलेंगे।”
आयरा खड़ी हुई।
उसके कदम भारी थे, जैसे हर कदम उसे किसी गहरे गड्ढे की ओर ले जा रहा हो।
2
ज़ैद अल-रशीद का ऑफिस किसी महल से कम नहीं था।
काले और सुनहरे रंगों में सजा कमरा।
दीवारों पर महंगी पेंटिंग्स, लेकिन एक भी तस्वीर नहीं।
न परिवार की, न दोस्तों की।
और बीच में—
एक आदमी।
काले सूट में, सीधी पीठ, शांत चेहरा।
आंखें गहरी, ठंडी… और खतरनाक रूप से शांत।
ज़ैद ने फाइल से नज़र उठाई।
“बैठिए।”
उसकी आवाज़ धीमी थी, लेकिन उसमें ऐसा दबाव था कि कमरे की हवा भारी हो गई।
आयरा बैठ गई।
कुछ पल चुप्पी रही।
फिर ज़ैद बोला—
“आप जानती हैं कि आप यहाँ क्यों हैं?”
आयरा ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“तो दोहराइए।”
आयरा की आवाज़ हल्की कांप गई।
“आपको… एक पत्नी चाहिए। कागज़ों में।”
ज़ैद की होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आई।
“सिर्फ कागज़ों में नहीं।”
आयरा ने नज़र उठाई।
“मतलब?”
ज़ैद कुर्सी से उठा और खिड़की के पास चला गया।
“मुझे एक ऐसी पत्नी चाहिए जो दुनिया को लगे कि वो मेरी है। हर इवेंट, हर कैमरा, हर अफवाह में।”
वह पलटा।
“लेकिन असल में—वो सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट होगी।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
3
“क्यों मैं?”
आयरा ने आखिरकार पूछा।
ज़ैद ने बिना हिचक जवाब दिया।
“क्योंकि आप किसी को नहीं चाहिए।”
ये शब्द गोली की तरह लगे।
“आप अनाथ हैं। भारत से आई हैं। कोई परिवार नहीं, कोई बैकग्राउंड नहीं। दुबई में अकेली। आप गायब होंगी, तो कोई सवाल नहीं पूछेगा।”
आयरा की आंखें जल उठीं।
लेकिन उसने खुद को संभाला।
“और अगर मैंने मना कर दिया?”
ज़ैद मुस्कुराया।
“आप मना नहीं करेंगी।”
“आप इतने यकीन से कैसे कह सकते हैं?”
ज़ैद ने फाइल उसकी ओर सरकाई।
“क्योंकि इसमें आपकी माँ का नाम है।”
आयरा का दिल रुक गया।
“मेरी माँ…?”
उसकी आवाज़ भर्रा गई।
“जी हाँ। जिस अस्पताल में वो कोमा में हैं—उसके सारे बिल, दवाइयाँ, डॉक्टर… सब मैं चुका रहा हूँ।”
आयरा की आंखों में पानी भर आया।
“आप ब्लैकमेल कर रहे हैं।”
ज़ैद की आवाज़ ठंडी हो गई।
“नहीं। मैं सौदा कर रहा हूँ।”
4
फाइल के पन्ने पलटते हुए आयरा के हाथ कांप रहे थे।
Contract Duration: 1 Year
Rules:
– कोई प्यार नहीं
– कोई सवाल नहीं
– कोई भागने की कोशिश नहीं
– ज़ैद की इज़्ज़त पर कोई आँच नहीं
– ज़ैद का अतीत जानने की कोशिश नहीं
आयरा ने पन्ना बंद कर दिया।
“अगर मैं नियम तोड़ दूँ?”
ज़ैद उसकी तरफ झुका।
“तो आप सब कुछ खो देंगी।”
“और अगर आपने?”
ज़ैद की आंखों में कुछ पल के लिए अंधेरा छा गया।
“मैं कभी नियम नहीं तोड़ता।”
आयरा चुप रही।
उसके पास कोई रास्ता नहीं था।
5
शादी…
एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत।
बिना प्यार।
बिना उम्मीद।
बिना भविष्य।
फिर भी—
एक अजीब-सी बात थी।
ज़ैद अल-रशीद के पास बैठते हुए आयरा को लगा—
यह आदमी खतरनाक है…
लेकिन टूटा हुआ भी।
उसकी आंखों में कोई दर्द छुपा था।
ऐसा दर्द, जो पैसे से नहीं मिटता।
“अगर मैं हाँ कहूँ…”
आयरा ने धीरे से पूछा।
“तो क्या मुझे आज़ादी मिलेगी?”
ज़ैद ने बिना सोचे जवाब दिया।
“नहीं।”
“तो फिर क्यों?”
ज़ैद की आवाज़ पहली बार बदली।
“क्योंकि मैं अकेला हूँ… और दुनिया को ये नहीं दिखना चाहिए।”
आयरा ने उसकी आंखों में देखा।
और उस पल उसने समझ लिया—
यह शादी नकली हो सकती है…
लेकिन इसका अंजाम नहीं।
6
कल सुबह शादी थी।
दुबई की सबसे आलीशान जगह पर।
मीडिया, कैमरे, मेहमान—सब होंगे।
और आयरा खान—
अब एक आम लड़की नहीं रहेगी।
वह बनने जा रही थी—
ज़ैद अल-रशीद की पत्नी।
कॉन्ट्रैक्ट वाइफ।
और शायद…
एक कैदी।
भाग 1 समाप्त