एक तरफ माँ का दुनिया से अन्तिम विदाई । दूसरी तरफ दो मासूम बच्चो की दुनिया मे शुरुआत अभिनव का मन खुशी जाहिर नही कर सकता था ' और गम व्याह कर पा रहा था। उस का संयम तो माँ थी। कैसे उन के बिना रहेगा। सपने में भी नही सोचा था। कि ऐसा समय भी आयेगा । धीरे -धीरे समय अपनी रफ्तार पकड़ रहा था। अभिनव का मन हर पल माँ को "याद करता ।और कानो मे सुनाई देता बेटा -बेटा कह कर कही से माँ अवाज लगा रही है।
नैन्सी - अभिनव जी आखिर कब तक ऐसा चलेगा।
अपने परिवार पर ध्यान दो । जन्म -मृत्यु ईश्वर के हाथ है।
जितना दुःख आपको है । उतना मुझे भी है। मैं समझ सकती हूँ ' । माँ ने संघर्ष जो किया था। जो बीत गया सो गया। अब तुम पिता बन चुके हो। जिस के लिए आप तरसे वहीं इच्छा अपने बच्चो को प्यार दे कर पूरा करो।
यादो के सहारे जीवन नही कटता । अपने कर्तव्यों को पूरा कीजिए नम आँखो मे खुशिया लाइये । मैं आप के साथ कन्धे से कन्धा मिला कर खड़ी हूं ।
अब सो जाइये काफी रात हो गयी है। कल माँजी का शराद है। आप इतनी देर मे बच्चो को स्कूल छोड़ोंगे इतने मे खाना तैयार कर दूंगी। ब्राहमण को खाना खिलाने के बाद दोनो ऑफिस को निकल जायेंगे।
सुबह का अलार्म बजते ही अभिनव और नैन्सी की भाग दौड़ शुरू हो जाती है। पहले मम्मा मुझे तैयार करे नहीं मम्मा पहले मुझे! दोनो बच्चे आयुष - आयुषी झगड़ रहे थे। अभिनव आओ एक को मैं तैयार करता हूँ पापा कल हमारी पी. टी एम . है। मम्मा - पापा दोनो को बुलाय है । कल ॲफिस से हाफ डे ले लेना पक्का जरूर आना पक्का प्रोमिस है । बच्चे खुशी से झूम उठे छोटी - छोटी खुशी हमारे जीवन में रंग - विरंगे इन्द्रयनुष की तरह होते हैं। नम आँखो मे खुशी की लहर आ जाती है। दोनो पति पत्नी की( नौकरी) कार्यरत होने से दिन तो हवा की तरह उड़ जाता है। शाम होते ही आधी रात तक का समय ही पूरा परिवार एक साथ इन्जॉय करते हैं।
मम्मा - पापा हमारा बर्थडे आने वाला है। आयुष -आयुषी
जिद करते हैं। हमे घर मे -बर्थडे नही करना हमे बाहर सेलिब्रेट करना है। लम्बे टूर वाले पर जिस मे हमे दो चार दिन साथ रहे ।
अभिनव - नैन्सी हंसते हुए पक्का ( डन) हो हो मजा आयेगा । बच्चे खुश अभिनव -नैन्सी एक दूसरे की तरफ देखते हुए प्यार भरी नजरो से बच्चो की खुशी मे हमारी खुशी है। फिर वही भागडौड़ की जिन्दगी भागमभाग
एयर पोर्ट पहुंचने में टाइम लगेगा , दो घण्टे का रास्ता है। सारी पैकिंग कर लेना तत्तकाल का टिकट है।
सर-सर की आवाज में हवाई जहाज हवा पकड़ लेता है।
ऊँची उड़ान भरते हुए ' मन्जिल तक पहुँचाती है।
आयुष -आयुषी की खुशी समाये से समाये नही जा रही थी। बादल ही बादल जैसे चांद सितारो सब को छू लेंगे
रुई के फोए की तरह बादल यू ही हाथ मे आ जायेगे अब आयेंगे हाथ मे अब आयेंगे हाथ मे और बादल और उंचे और ऊँचे हुए जा रहे थे। भाई देख बहन देख शीशे मे से सब नजारा देख रहे थे। फिर सभी यात्री की मंजिल आ जाती है।
अभिनव का गाइड होटल पहुंचाता है। पूरा परिवार आराम करता है। फ्रेश सेट - वेट हो कर घूमने निकल जाते हैं। मम्मा देखो यहाँ के लोग हम लोगो से कितने अलग है। कितनी सादगी है। सफेद चन्दन माथे पर टीका घने घने बाल साँवले - सलोने ऐसा लगता है। सारी प्रकृति यही केरला मे समाई है।
भाई देख साउथ हीरो का पोस्टर ( झुकेगा नही साला)
आयुष -आयुषी को खुश देख कर अभिनव नैन्सी का दिल खुश हो जाते है। पेड़ ही पेड़ ऊंचे ऊंचे नारियल के पेड़ काजू मूंगफली केला चारो तरफ सड़को पर जाओ बस हरियाली ही हरियाली समूद्र के किनारे - किनारे भी प्रकृति जैसे मुट्ठी मे ही आ जायेगी। आँखो मे जैसे चमक आ जाती है। खाना खा कर चले ताज होटल मे या, ऑडर होटल मे कमरे में ही खाना है।
बच्चे हमे तो ताज में ही खाना -खाना है।
बस गाइड होटल पहुंचाता है। रूम मे आराम करते हैं। काफी रात हो जाती है। नैन्सी अभिनव से देखो न बच्चे थक कर सो गये है। आज काफी दिनो के बाद अच्छा लगा है। इन नम आँखो को नैन्सी अभिनव से पास आओ न अभिनव बडी रोमांटिक हो रही हो । काफी दिनो के बाद समय मिला है। बाहर आ कर छुट्टी पर इन्जॉय करने का ' और पास और पास करते -करते गर्म -गर्म सांसे भरने लगते है। आज तो शादी वाली रात लग रही है।
सुबह -सुबह का सुहाना दिन की शुरुआत होती है।
डोसा ' इडली ' संवर चटनी चटनी आयुष - आयुषी शोर मचा मचा कर रूम मे नाश्ता करते है।
चलो बच्चो आज वोटिंग हाउस मे रहना है।
गाइड वोटिंग हाउस पहुंचता है। अगली सुबह लेने आयेगा। वाह मम्मा -पापा वोट नही छोटा सा घर लग रहा है। सारी सुविधा है। पूरा समुद्र मे घूमा रह है। देखो न मम्मा - पापा चारो ओर हरियाली ही हरियाली समुद्र के इस पार से उस पार टाफू जहाँ टाफू पर बनी विल्डिंग का नजारा देखने आते हैं। समुद्र के उस पार होटल जहाँ अनोखे अंदाज मे खाने का जायका लेते हैं। रूम बुक होते हैं। मम्मा - पापा क्या चकाचौंध रोशनी है।
मुझे वेज विरयानी खानी है। नैन्सी अभिनव हम तो दाल रोटी खायेंगे । रूम मे थक कर सो जाते हैं। अगली सुबह वोटिंग हाउस मे सवार पहुंच जाते हैं।
वहाँ जंगलों मे बने डाबो रेस्टोरेन्ट के खाने का जायका लेते हैं। कोच्चि का बाजार घूमते है। मौल ही मौल आयुष आयुषी नौ नौ - ग्यारह ग्यारह मंजिल मौल के सभी कर्मचारियों का ड्रेस कोड मेम आइये सर आइये स्वागत है आपका आयुषी मम्मा मुझे यहां का लंहगा चाहिए। आयुषी हंसते हुए भाई तुम यहां का सफेद शर्ट लूंग्गी डास . लूंगगी डास करना । हर जगह इन की मस्ती शुरू हो जाती है। अभिनव मुस्कुराते हुए । तुम भी यहाँ के सूट -साड़ी ले लो । लिफ्ट से ऊपर नीचे नीचे ऊपर होते होते कब शाम हो जाती है। पता ही नही चलता। चलो यहाँ के कुछ फ्रूट ( फल) का स्वाद लेते हैं। बच्चे हमे नारियल पानी पीना है। अनायास के स्वाद का तो क्या कहना आम में इतनी मिठास परोसने का तो अंदाज ही अलग है। आयुष -आयुषी चटकारे ले ले कर स्वाद लेते हैं। गाइड फिर वही वापस होटल पहुंचा देता है।
कुछ किताबे टेबल पर पड़ी होती है। आयुष आयुषी पापा देखो फिजो थेरेपी बॉडी मसास प्रकृति चिकित्सलाय बॉडी को आराम दिया जाता है। रूम तो देखो सारी प्रकृति शीशे से दिखाई देती है। अब सो जाओ फिर खुशनुमा सुबह होती है। गाइड केरला की नैचर का नजारा दिखाता है। देखो बच्चो चाय का गार्डन कितनी खूबसूरती से चाय को कटिंग दे कर उगाया है।
देखने लायक है। फूल जो कही भी शायद दिखाई दे। जो खूबसूरती यहाँ है। तरह- तरह के फूल मम्मा-पापा देखो हिरन नैन्सी देखो अभिनव जी नया जोड़ा मेहंदी भी लगी है। हाथो मे हाथ डाल कर घूम रहे हैं।
अभिनव - मुस्कुराता हुआ प्यार भरी नजरो से तुम कौन सी अभी भी नयी दुल्हन से कम हो , नैन्सी तुम भी न हां हां ।चलो अब होटल पहुंच कर पेकिंग करना कल फ्लाइट पकड़नी है। अपने शहर अपने घर पहुंचना है। यहाँ की यादे कैमरे मे केद कर ली।
अभिनव - ऐसा माना जाता है। केरल की जो भूमि है। ये भगवान परशुराम की भूमि है। परशुराम भगवान विष्णु जी के अवतार है। भगवान परशुराम रुद्र स्वभाव से प्रसिद्ध है। क्षत्रियो को मिटाने के लिए भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था। और इक्कीस वार क्षत्रियो का विनाश किया। परशुराम जी ने आध्यात्मिक पग यात्रा की थी। कन्याकुमारी से लेकर उत्तर की ओर तक भगवान परशुराम का हथियार र्फशा को समुद्र ये फेंक दिया था। समुद्र नीचे जाने लगा पानी कम होने लगा उसकी से बड़ा सा भूमि का हिस्सा पुराने वर्ग मे मिलता है। जो भूमि समुद्र काटने पर मिली थी। वो भूमि उस भूमि के ऊपर चौसठ ब्रहामण परिवारो को उत्तर से बुलाया था। उस भूमि पर बसाया था। केरल को परशुराम भूमि कहते हैं। जितने भी क्षत्रियो को मारा था। उतने ही वृक्ष लगाये थे। इस लिए आज दक्षिण भारत इतना हरा भरा है।
नैन्सी - आयुष आयुषी भारत भूमि देवी देवताओ की
भूमि है।
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