is ghar me pyar mana hai - 6 in Hindi Women Focused by Sonam Brijwasi books and stories PDF | इस घर में प्यार मना है - 6

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इस घर में प्यार मना है - 6

आधी रात हो चुकी थी। पूरा घर गहरी नींद में था।
सन्नाटा इतना गहरा कि कार्तिक के कदमों की आहट उसे खुद ही चुभ रही थी। उसके हाथ में एक पुरानी लोहे की रॉड थी। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। वो उसी घर के पीछे की तरफ बढ़ा… जहाँ वो अंधेरा कमरा था।

कार्तिक ने चारों ओर देखा। सब सो रहे थे।
उसने ताले पर रॉड मारी—
कड़क!
एक बार। फिर दूसरी बार।
क्लिक!
ताला टूट गया। दरवाज़ा खुलते ही सीलन और बदबू का झोंका आया। कार्तिक का दिल और बैठ गया।

कमरे के कोने में संस्कृति सिकुड़ी हुई पड़ी थी।
चेहरा पसीने से भीगा, होंठ नीले पड़ते हुए, साँसें तेज़।
वो दर्द से तड़प रही थी।

कार्तिक (घबराकर, धीमी आवाज़ में) बोला - 
संस्कृति…!

वो तुरंत उसके पास जाकर बैठ गया।
संस्कृति ने किसी तरह आँखें खोलीं।
आवाज़ बहुत कमज़ोर थी।

संस्कृति (काँपती हुई) बोली - 
बहुत… दर्द हो रहा है…।
ये जगह…मेरे लिए बहुत… अनकंफर्टेबल है…।

बस इतना ही। उसके बाद उसका सिर फिर दीवार से टिक गया।
कार्तिक की आँखें लाल हो गईं।
माँ।
नियम।
समाज।
सब पर एक साथ गुस्सा आया। उसकी मुट्ठियाँ काँप रही थीं।

कार्तिक (मन में) बोला - 
अगर मैं इसे बाहर ले गया…तो माँ तमाशा खड़ा कर देंगी।

वो जानता था—
अभी बाहर ले जाना और ज़्यादा ज़हर फैलाएगा।

कार्तिक ने धीरे से संस्कृति को उठाया।
वो बहुत हल्की लग रही थी। उसने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और सीने से लगा लिया। संस्कृति ने अनजाने में उसकी शर्ट पकड़ ली। जैसे डूबते इंसान ने तिनके को पकड़ लिया हो।
कार्तिक ने धीरे-धीरे उसके बालों पर हाथ फेरा। पीठ थपथपाई।

कार्तिक (बहुत धीमे, जैसे खुद से) बोला - 
शांत…मैं यहीं हूँ।

उसे खुद यकीन नहीं हो रहा था कि ये शब्द उसके मुँह से निकले।
उसके सीने में अजीब-सी जलन थी। डर। गुस्सा। बेचैनी। सब एक साथ। उसने कभी किसी के लिए ऐसा महसूस नहीं किया था।

कार्तिक (मन में) बोला - 
ये नियम…ये घर…अगर इसकी वजह से इसे कुछ हो गया…

उसने सोच पूरी नहीं की। संस्कृति की साँसें थोड़ी सामान्य हुईं।
उसका सिर कार्तिक के कंधे पर था। वो अब भी दर्द में थी, लेकिन अकेली नहीं थी।
अंधेरे कमरे में दो लोग बैठे थे—
एक जो टूट चुका था और अब डर रहा था।
और दूसरी जो दर्द में थी लेकिन पहली बार सुरक्षित महसूस कर रही थी।
उस रात कोई नियम नहीं बोला गया। कोई “प्यार मना है” नहीं कहा गया।
बस खामोशी थी… और पहली बार कार्तिक की धड़कन किसी और के लिए बेचैन थी।

अंधेरे कमरे में हल्की-सी रोशनी छनकर आ रही थी। शायद सुबह होने वाली थी। संस्कृति की पलकें धीरे-धीरे हिलीं।
जब उसने आँखें खोलीं…तो सबसे पहले जो महसूस हुआ—
गर्मी। सुरक्षा।
उसका सिर किसी के कंधे पर टिका था।
उसने घबराकर ऊपर देखा—
कार्तिक।
उसकी आँखें बंद थीं। चेहरा थका हुआ, लेकिन बेचैन।
संस्कृति की साँस अचानक तेज़ हो गई। वो उसकी गोद में थी।
उसका सिर उसके सीने से लगा हुआ। संस्कृति  एक पल को सब भूल गई, दर्द, डर, अंधेरा। पर अगले ही पल हकीकत याद आ गई।
संस्कृति ने धीरे से खुद कोbअलग करने की कोशिश की।
कार्तिक की आँख फौरन खुल गई।

कार्तिक (घबराकर) बोला - 
तुम ठीक हो?

संस्कृति ने आस-पास देखा। दरवाज़ा। टूटा हुआ ताला। बाहर का सन्नाटा। उसका चेहरा पीला पड़ गया।

संस्कृति (हड़बड़ाकर, धीमे स्वर में) बोली - 
आप…आप यहाँ क्यों बैठे हैं?

कार्तिक कुछ कहने ही वाला था—

संस्कृति (और तेज़, डर से) बोली- 
नहीं…अभी नहीं…आप जल्दी से अपने कमरे में जाइए।

कार्तिक चौंका।

कार्तिक बोला - 
लेकिन तुम—

संस्कृति (बीच में काटते हुए) बोली - 
अगर किसी ने देख लिया…तो आप पकड़े जाओगे।
माँ…बहुत बड़ा बवाल कर देंगी।

उसकी आवाज़ डर से काँप रही थी। कार्तिक ने उसकी आँखों में देखा। दर्द अब भी था, पर सोच पहले आ रही थी।
वो खुद के लिए नहीं—
उसे बचाने के लिए डर रही थी।

कार्तिक (धीमी आवाज़ में) बोला - 
मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ सकता।

संस्कृति ने धीरे से उसकी कलाई पकड़ ली।

संस्कृति बोली - 
बस थोड़ी देर… मैं संभाल लूँगी।
आप चले जाइए…प्लीज़।

उसके शब्दों में आदेश नहीं था—
बस विनती थी।

कार्तिक ने भारी मन से उसे ज़मीन पर सावधानी से बिठाया।
वो उठते हुए एक पल को रुका।

कार्तिक बोला - 
अगर ज़्यादा दर्द हो…तो दरवाज़ा खटखटाना।

संस्कृति ने हल्की-सी मुस्कान दी—
बहुत कमजोर, लेकिन सच्ची।
कार्तिक ने एक आख़िरी नज़र उस पर डाली।
फिर धीरे से कमरे से बाहर निकल गया। दरवाज़ा बंद हुआ।
संस्कृति ने पीठ दीवार से टिकाई। दर्द था। डर था।
लेकिन दिल के किसी कोने में एक अजीब-सी गर्माहट थी।

संस्कृति (मन में) बोली - 
इस घर में सब पत्थर नहीं हैं…।

कार्तिक अपने कमरे में चुपचाप बैठ गया। नींद गायब थी।
उसकी गोद में अब भी संस्कृति का एहसास था।
वो जानता था—
जो कुछ भी आज रात हुआ, उसे वो कभी भूल नहीं पाएगा।