The Book of the Secrets of Enoch.... - 7 in Hindi Classic Stories by Tanu Kadri books and stories PDF | The Book of the Secrets of Enoch.... - 7

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The Book of the Secrets of Enoch.... - 7

अध्याय 32, XXXII
1 मैंने उस से कहा, तू तो पृय्वी है, और जिस पृय्वी में मैंने तुझे पहुंचाया उसी में तू जाएगा; और मैं तुझे नाश न करूंगा, परन्तु जहां से मैंने तुझे निकाला वहीं भेज दूंगा।

2 तब मैं अपनी दूसरी उपस्थिति में फिर तुम्हें ग्रहण कर सकूंगा।

3 और मैंने अपने सब प्राणियों को जो दृश्य (भौतिक) और अदृश्य (आध्यात्मिक) आशीर्वाद दिया । और आदम साढ़े पांच घंटे स्वर्ग में था ।

4 और मैंने सातवें दिन को अर्थात विश्रामदिन को आशीष दी, जिस दिन उस ने अपने सब कामों से विश्राम किया।

अध्याय 33, XXXIII
1 और मैंने आठवां दिन भी ठहराया, कि आठवां दिन मेरे काम के बाद का पहला दिन होना चाहिए, और वह (पहले सात) सातवें हजार के रूप में घूमें, और आठवें हजार के आरम्भ में हो एक ऐसा समय हो जिसकी कोई गिनती न हो, अंतहीन, जिसमें न तो वर्ष, न महीने, न सप्ताह, न दिन और न ही घंटे हों।

2 और अब, हनोक , जो कुछ मैंने तुझ से कहा है, जो कुछ तू ने समझा है, जो कुछ तूने स्वर्गीय वस्तुओंके विषय में देखा है, और जो कुछ तूने पृय्वी पर देखा है, और जो कुछ मैंने अपनी बड़ी बुद्धि से पुस्तकोंमें लिखा है, वह सब इन चीज़ों को मैंने ऊपरी नींव से लेकर निचली और अंत तक तैयार और निर्मित किया है, और मेरी रचनाओं का कोई सलाहकार या उत्तराधिकारी नहीं है।

3 मैं स्वयं शाश्वत हूं, हाथों से नहीं बना हूं और परिवर्तन रहित हूं।

4 मेरा विचार ही मेरा परामर्शदाता है, मेरी बुद्धि और मेरा वचन रचा गया है, और मेरी आंखें सब वस्तुओं को देखती हैं, कि वे यहां कैसे खड़े और भय से कांपते हैं।

5 यदि मैं अपना मुंह फेर लूं, तो सब वस्तुएं नाश हो जाएं।

6 और हे हनोक, अपना दिमाग लगा, और जो तुझ से बातें करता है, उसे जान, और जो पुस्तकें तूने आप ही लिखी हैं, उन्हें ले ले।

7 और मैं तुम्हें सैमुअल (Samuil) और रागुइल (Raguil), जो तुम्हें ले आए, और पुस्तकें सौंपता हूं, और तुम पृय्वी पर जाकर जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, और जो कुछ तुम ने देखा है, नीचे से स्वर्ग से लेकर मेरे सिंहासन तक, और सभी सैनिक, सब तुम्हारे पुत्रों को बताओ।

8 क्योंकि मैंने सब शक्तियां उत्पन्न की हैं, और कोई मेरा विरोध नहीं करता या मेरे वश में न हो। क्योंकि सब लोग मेरे राजतन्त्र के आधीन रहते हैं, और मेरे एकमेव शासन के लिये परिश्रम करते हैं।

9 उन्हें लिखावट की पुस्तकें दो, और वे उन्हें पढ़ेंगे, और मुझे सब वस्तुओं का रचयिता जान लेंगे, और समझ लेंगे कि मुझे छोड़ और कोई परमेश्वर नहीं।

10 और वे तेरी लिखावट की पुस्तकें बच्चों से बच्चे, पीढ़ी-दर-पीढ़ी, राष्ट्रों से राष्ट्रों तक में बांटते रहें।

11 और हे हनोक, हे मेरे मध्यस्थ, राजधिपति मीकाएल, मैं तुझे तेरे पितरों आदम, शेत, एनोस, केनान, महललील, और तेरे पिता येरेद की लिखावट के बदले में दे दूंगा।

अध्याय 34, XXXIV
1 उन्होंने मेरी आज्ञाओं और मेरे जूए को तुच्छ जाना है, निकम्मे वंश निकल आए हैं, वे परमेश्वर से नहीं डरते, और उन्होंने मेरे सामने झुकना नहीं चाहा, परन्तु निकम्मे देवताओं के सामने झुकना शुरू कर दिया है, और मेरी एकता को अस्वीकार कर दिया है, और सारी पृय्वी पर बोझ बन गए हैं झूठ, अपराधों, घृणित व्यभिचार, अर्थात् एक दूसरे के साथ, और अन्य सभी प्रकार की अशुद्ध दुष्टता के साथ, जिनका संबंध बताना घृणित है।

2 और इस कारण मैं पृय्वी पर जलप्रलय डालूंगा, और सब मनुष्योंको नाश करूंगा, और सारी पृय्वी बड़े अन्धकार में ढह जाएगी।

अध्याय 35, XXXV
1 देखो, उनके वंश से बहुत बाद में एक और पीढ़ी उत्पन्न होगी, परन्तु उनमें से बहुत से बहुत अतृप्त होंगे ।

2 जो उस पीढ़ी का पालन-पोषण करेगा, वह उन पर तेरी लिखावट की, तेरे पुरखाओं की पुस्तकें प्रगट करेगा, (उन्हें) वह उनको दुनिया के सरंक्षक के बारे में बताएगा, खासकर उनको जो विश्वासयोग्य पुरूष हैं, और वह कार्यकर्ता, जो मेरी पसंद के हैं, जो मेरा नाम व्यर्थ में नहीं लेते। 

3 और वे दूसरी पीढ़ी को सुनाएंगे, और जो पढ़ेंगे वे पहिले से भी अधिक महिमा पाएंगे।

अध्याय 36, XXXVI
1 अब हे हनोक, मैं तुम्हें अपने घर में रहने के लिये तीस दिन की मोहलत देता हूं, और अपने पुत्रों और अपने सारे घराने को बताओ, कि जो कुछ तू उन से कहता है, सब मेरे मुंह से सुनें, और पढ़कर समझें, कि किस प्रकार मेरे अलावा कोई दूसरा भगवान नहीं है

2 और वे मेरी आज्ञाओं को सर्वदा मानते रहें, और तेरी लिखावट की पुस्तकें पढ़ने और ग्रहण करने लगें।

3 और तीस दिन के बाद मैं अपके दूत को तुम्हारे पास भेजूंगा, और वह तुम को पृय्वी पर से और तुम्हारे बेटोंके पास से मेरे पास ले आएगा।

अध्याय 37, XXXVII
1 और प्रभु ने पुराने स्वर्गदूतों में से एक को बुलाया, जो भयानक और खतरनाक था, और उसे मेरे पास रखा, बर्फ की तरह सफेद, और उसके हाथ बर्फ की तरह थे, जो महान ठंढ की तरह दिखते थे, और उसने मेरे चेहरे को ठंडा कर दिया, क्योंकि जिस प्रकार चूल्हे की आग, सूर्य की गर्मी, और वायु की शीत को सहना असम्भव है, उसी प्रकार मैं भगवान का भय सह नहीं सकता।

2 और भगवान ने मुझ से कहा, हे हनोक, यदि तेरा मुंह यहां न जमे (ठंडा), तो कोई तेरा मुंह न देख सकेगा।

अध्याय 38, XXXVIII
1 और भगवान ने उन मनुष्योंसे जो पहिले मुझे ले आए थे कहा, हनोक तुम्हारे संग पृय्वी पर चले, और नियत दिन तक उसकी बाट जोहते रहो।

2 और उन्होंने मुझे रात को मेरे बिछौने पर लिटा दिया।

3 और मतूसलह (Methuselah) जो मेरे आने की बाट जोहता, और रात दिन मेरे बिछौने पर जागता, मेरा आना सुनकर विस्मय से भर गया, और मैं ने उस से कहा, मेरे सारे घराने को इकट्ठे होने दे, कि मैं उनको सब बातें बता दूं।

अध्याय 39, XXXIX
1 हे मेरे बच्चों, हे मेरे प्रियो, जितना प्रभु की इच्छा के अनुसार हो, अपने पिता की चितौनी सुनो।

2 आज मुझे तुम्हारे पास आने की आज्ञा दी गई है, कि मैं अपने मुंह से नहीं, पर प्रभु के मुंह से तुम्हे सब कुछ बताऊं, जो कुछ है, और जो कुछ था, और जो कुछ अब है, और जो कुछ न्याय के दिन (judgement day) तक रहेगा।

3 क्योंकि भगवान ने मुझे तुम्हारे पास आने दिया है, इसलिये तुम मेरे होठों की बातें सुनते हो, जो तुम्हारे लिये बड़ा किया गया है, परन्तु मैं वह हूं जिस ने भगवान का मुख देखा है, लोहे के समान जो आग से चमकता है। चिंगारी निकलती है और जलती है।

4 अब तुम मेरी आंखों को देखो, एक आदमी की आँखें जो तुम्हारे लिए अर्थ से भरी हुई बड़ी हैं, परन्तु मैं ने प्रभु की आंखों को देखा है, जो सूर्य की किरणों के समान चमकती और मनुष्य की आंखों को विस्मय से भर देती हैं।

5 हे मेरे बालको, तुम अब उस मनुष्य का दहिना हाथ देखते हो जो तुम्हारी सहायता करता है, परन्तु मैंने भगवान का दाहिना हाथ स्वर्ग भरते हुए देखा है, जिस ने मेरी सहायता की।

6 तुम मेरे काम की दिशा (compass) को अपनी दृष्टि में देखते हो, परन्तु मैं ने प्रभु की असीम और सिद्ध दिशा को देखा है, जिसका अन्त नहीं।

7 तुम मेरे होठों के वचन सुनते हो, जैसे मैंने प्रभु के वचन सुने, बादलों के गरजने के साथ लगातार तेज गड़गड़ाहट हो।

8 और अब हे मेरे बालकों, पृय्वी के पिता की बातें सुनो, पृय्वी के हाकिम के साम्हने आना कितना डरावना और भयानक है; स्वर्ग का शासक के साम्हने आना और भी डरावना और भयानक है, जो जीवित और मृत लोगों का और स्वर्गीय सैनिकों का नियंत्रक (न्यायाधीश) है। उस अंतहीन दर्द को कौन सह सकता है?