दोपहर ढल चुकी थी... आसमान में बादल घिर आए थे , त्रिशा और तुलसी रॉयल्स एनफील्ड थंडरबर्ड पर बैठे थे , गाड़ी रफ्तार से दौड़ रही थी ,कि अचानक तेज़ बारिश शुरू हो गई..
टप-टप गिरती बूँदें उन दोनों के ऊपर टकराईं, और तुलसी ने अपने चेहरा आसमान की ओर कर दिया ,ठंडी बारिश की बूँदें उसके चेहरे को छूने लगीं , उसने आँखें बंद कर लीं ,जैसे सारी थकान, सारा डर उन बूँदों के साथ बह रहा हो...
सड़क सुनसान होती जा रही थी , बस इक्का-दुक्का गाड़ियां ही गुजर रही थीं, ये नज़ारा देखते ही मिशा की आँखों में शरारती चमक आ गई, उसने अचानक ब्रेक लगाकर गाड़ी बीच सड़क पर रोक दी..
तुलसी हैरानी से उसे देखने लगी ,
“अरे… क्या हुआ..??
त्रिशा ने भौंहें नचाईं, मुस्कान चौड़ी हो गई -
“चलो ना..आज तुम्हारा इंटरव्यू अच्छा गया है , इसी खुशी में… वही हमारा स्वैग वाला फेवरेट गाने पर डांस करते हैं..
तुलसी आंखें फ़ाड़ कर बोली ," यहां .. बीच सड़क पर ..
"हां .. यहां नहीं तो और कहां..वो तुलसी के हाथ पकड़कर खींच लिया...
बारिश के बीच, सुनसान सड़क पर, दोनों गाड़ी से उतर आईं.. बूँदें तेज़ हो चुकी थीं, बाल भीग रहे थे, कपड़े गीले हो रहे थे ,मगर चेहरे पर बेफ़िक्र हंसी थी...
त्रिशा ने फोन पर गाना चलाया और दोनों बिना किसी डर, बिना किसी सोच के, बारिश में थिरकने लगीं।
रामा रामा …….हो
है रामा रामा हो
है मोरे रामा
दिल मैं मचा है क्यों
कोई हंगामा
आएगा कोई
बाहों में लेके
चूमेगा मेरे
यह लकी लिप्स
आए है हा हहह हह..
उसी समय एक काले रंग की मर्सिडीज वहां से गुजरी सड़क पर पानी इकट्ठा हो गया था और दोनों लड़कियां डांस में मग्न थी , मर्सिडीज गाड़ी ने दोनों पर किचड़ उछालते बढ़ गई...
त्रिशा और तुलसी डांस करते हुए होश में आई तो देखे वो दोनों के ऊपर किचड़ पड़ गई है ..
तुलसी और त्रिशा को गुस्सा आया और दोनों किनारे पड़े पत्थर को उठाया और गाड़ी स्टार्ट कर उस गाड़ी के पीछे गयी , बारिश हल्का हो गया था..
ट्रैफिक पर वो मर्सिडीज गाड़ी खड़ी दिखाई दिया और त्रिशा अपने बुलेट उस गाड़ी के पास ले आई फिर तुलसी हाथ में रखे पत्थर को जोर से विंडो के शीशे पर दे मारा ..
पत्थर शीशे से टकराया ..छन…की तेज आवाज आई ...
आवाज़ बारिश से भी ज़्यादा तेज़ थी, ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी काली मर्सिडीज़ में जैसे सन्नाटा भर गया , अगले ही पल गाड़ी का दरवाज़ा ज़ोर से खुला...
पीछे की सीट से एक लंबा-चौड़ा नौजवान बाहर उतरा...कंधों तक हल्के कर्ल बाल, सलीके से रखा बियर्ड लुक, आँखों पर काला शेड्स, ब्लैक थ्री-पीस सूट बारिश की हल्की नमी में भी रौबदार लग रहा था ,चमचमाते काले जूतों ने जैसे सड़क पर हुकूमत जमा ली हो..
उसने बिना चश्मा नीचे सरकाया दोनों लड़कियों को ऊपर से नीचे तक देखा और गुर्राते हुए कहा,“आर यू आउट ऑफ योर माइंड..?? उसकी आवाज़ में गुस्सा था..!!
त्रिशा ने तुरंत हाथ कमर पर टिकाए, बिना डरे आगे बढ़ी ,“आउट ऑफ माइंड आप हैं मिस्टर अंधे होकर गाड़ी चलाते हो क्या..?? दिखाई नहीं दिया कि सड़क पर लोग हैं..
तुलसी और त्रिशा भीगी हुई थी, कपड़ों और चेहरे पर किचड़ सना था , गुस्सा उसकी आँखों में साफ़ दिख रहा था, मगर आवाज़ संयमित नहीं रही ..“माफी मांगनी चाहिए थी आपको , इंसान हैं हम, रोड के गड्ढे नहीं ...
लड़के की भौंह तन गई....“ये रोड है, डांस फ्लोर नहीं , बारिश में सड़क पर नाचोगी तो यही होगा "
त्रिशा ने व्यंग्य में ताली बजाई...
“वाह..वाह मतलब गलती आपकी, और अकड़ भी आपकी ,पैसे की गाड़ी है तो इंसानियत भी EMI पर ली है क्या..??
तुलसी ने मिशा का हाथ हल्के से थामा, फिर सीधे उसकी आँखों में देखते हुए बोली
“ लुक मिस्टर ,हम नाच रहे थे, कोई अपराध नहीं कर रहे थे , लेकिन जानबूझकर किचड़ उछालना ,ये बदतमीज़ी है"
वो एक पल को चुप हो गया, शायद पहली बार किसी लड़की ने बिना डर, बिना झुके उससे इस तरह बात की थी..“जानबूझकर नहीं था,” उसने ठंडी आवाज़ में कहा,
“और ये शीशा… इसकी कीमत जानती हो..??
मिशा हँस पड़ी...“हाँ, बिल्कुल और हमारी इज़्ज़त की कीमत जानते हो..??
तुलसी बीच में बोली ,"शीशा टूटेगा तो बदल जाएगा, पर घमंड… वो अंदर से ही टूटता है"
उसने त्योरियां चढ़ा दिया उसकी आँखें तेज़ थीं, पर अब उनमें गुस्सा कम और जिज्ञासा ज़्यादा थी ,“नाम क्या है तुम्हारा..?? उसने तुलसी की तरफ़ उंगली दिखाते हुए पूछा..
तुलसी ने बिना झिझक जवाब दिया,
“नाम जानना ज़रूरी नहीं , आइंदा अगली बार गाड़ी चलाते वक्त इंसान भी देख लेना”
सिग्नल हरा हो चुका था , पीछे गाड़ियाँ हॉर्न देने लगीं....वो पल भर रुका, फिर गाड़ी के दरवाजे की तरफ़ मुड़ कर बोला,आज जल्दी है वरना तुम लोगों की अकड़ निकाल देता ,वो दरवाजा बंद किया और आगे बढ़ने के लिए कहा ड्राइवर से ..
त्रिशा ने आँखें सिकोड़कर देखते बोली
“ सूट वाले साहब तुम हमारी क्या अकड़ निकालोगे ,हम तुम्हारे अकड़ ठिकाने जरुर लगा देते...
सब गाड़ियां चल पड़ी थी, तुलसी मिशा को बोली उस मर्सिडीज गाड़ी को देखकर ,चल वो अकड़ू चला गया फिर उसने मिशा के चेहरे देखी तो वो ज़ोर से हंसने लगी," हाहाहाहाहा , अपने आप को देख मिशा ..
त्रिशा तुलसी को देखकर हंसते हुए बोली," हाहाहाहाहा ,तू भी देख अपनी शक्ल को .. दोनों पीली मिट्टी से सनी हुई थी ...
बारिश अब थम चुकी थी और एक नई कहानी शुरू हुई ...
अगले दिन सुबह मैं (तुलसी )अपने वन बीएचके फ्लैट पर थी रात त्रिशा के कारण देर रात तक पार्टी किया था ,हम सुबह आठ बजे तक सो रही , त्रिशा हॉल के सोफे पर सोई थी ,तुलसी का नींद उसके फोन कॉल के रिंग से जागी , उसकी आंखें बंद थी उसने ऐसे ही फोन टटोली और उसने फोन उठाया और उबासी लेते हुए बोली," कौन बोल रहा है रात में..??
फोन पर जो शख्स था उसकी लंबी मुस्कान आई उसने अपने एक उंगली से माथे पर रब करते हुए कहा, "हेलो मिस तुलसी ,सुबह के नौ बज चुके हैं और मैं मेहरा इंडस्ट्री से बोल रहा हूं , तुमने कल इंटरव्यू दिया था , आप सलेक्ट हो गयी है , आज एक बजे कंपनी आकर ज्वाइन कीजिए HR हेड के पास ..
तुलसी एक पल को पूरी तरह चुप हो गई।
नींद और हकीकत के बीच झूलती हुई, उसे लगा जैसे किसी ने सपना तोड़ दिया हो। फोन कान से लगा था, मगर दिमाग अभी भी बिस्तर पर पड़ा था।
“स… सलेक्ट?” उसकी आवाज़ में अविश्वास था।
दूसरी तरफ़ से हल्की-सी हँसी सुनाई दी,
“जी हाँ, मिस तुलसी , मेहरा इंडस्ट्रीज़, कल आपका इंटरव्यू पैनल को काफ़ी पसंद आया, डिग्री से ज़्यादा आपका कॉन्फ़िडेंस और सोच हमारे काम की है।”
तुलसी अचानक बिस्तर पर उठकर बैठ गई। बाल बिखरे हुए थे, आँखों में नींद के साथ चमक भी उतर आई थी।
“थैंक यू… थैंक यू सो मच सर,” उसने जल्दी-जल्दी कहा, जैसे डर हो कि अगर एक सेकंड भी रुकी तो ये सपना टूट जाएगा।
“आज एक बजे तक जॉइनिंग फ़ॉर्मैलिटी के लिए आ जाइए HR हेड आपका इंतज़ार करेंगे।”
कॉल कट हो गया।
कुछ सेकंड तक तुलसी फोन को देखती रही। फिर अचानक उसने एक चीख़ मारी..
“त्रिशाआआआआ…!”
बगल के कमरे से तकिया उड़ता हुआ आया।
“सुबह-सुबह भूत देख लिया क्या?” त्रिशा ने आँखें मलते हुए दरवाज़ा खोला।
तुलसी ने बिना कुछ कहे फोन उसकी ओर बढ़ा दिया,“मैं… मैं सलेक्ट हो गई हूँ "
त्रिशा की नींद पल भर में गायब हो गई।
“क्या? सच में? मेहरा इंडस्ट्री?”
अगले ही पल वो उछलकर तुलसी से लिपट गई।
“तुलसी! मैंने कहा था ना! तेरे अंदर कुछ है!”
तुलसी की आँखें भर आईं। वही लड़की, जो कल तक अपने रिज़्यूमे के हर खाली कोने से डरती थी, आज किसी बड़ी कंपनी की कर्मचारी बनने जा रही थी।
“मुझे डर लग रहा है, मिशा,” उसने धीमे से कहा, “पहला दिन है… पहली नौकरी।”
त्रिशा ने उसके कंधे थामे ," इतना क्यों डर लग रहा है , जल्दी उठ, तैयार हो और गणेश मंदिर चलते हैं फिर मेरे घर चलते हैं वहां खाना खाकर एक बजे तुझे मेहरा कंपनी छोड़ दूंगी मैं ,अब तू इंटरव्यू देने नहीं अपनी पहचान बनाने जा रही है ..उसी समय मिशा का फोन बजा वो फोन के स्क्रीन देखी तो आंखें फट गई उसने फोन उठाया और जोरदार डांटने की आवाज आई ," कहां है तू , तुझे सिर्फ आवारा गर्दी के लिए पैदा की हुं ,जब देखो लड़के की तरह गाड़ी उठाए घुमती है तू ,अब ये हाल है की रात रात भर भी गायब हो रही है क्या समझ रखा है मेरे घर को सराए जहां जब मर्जी आया मुंह उठाकर चली आए ,तू आ तो फिर तेरी टांगें मैं तोड़ूंगी...
त्रिशा आंखें बंद कर सब सुन रही थी और मुस्कुरा रही थी फिर जब चुप हुआ तो वो बोली ," मॉम .. मॉम प्लीज़ इतनी हाइपर मत होइए , मैं इस देहरादून शहर में ही हुं, और तुलसी के फ्लैट पर हुं ,आ रही हुं तुलसी को लेकर..!!
त्रिशा की मां फिर बोली," तुलसी को देख जिसके साथ तू दिनभर घुमती है वो कितनी सादगी से सर्वगुण संपन्न है और तुझे देख लड़की वाली एक भी गुण नहीं मिलती ... आज तू आ फिर बताती हुं , उसने फोन कट किया..!!
त्रिशा बोली तुलसी को देखकर," लगता है मॉम ज्यादा ही नाराज़ हैं , मैं डैड से बात करती हुं ,तू जा फ्रेश हो जा...
तुलसी शेल्फ से कपड़े निकाले और तैयार होने वाशरूम गई..
घड़ी की सुई तेज़ चलने लगी।
तुलसी शीशे के सामने खड़ी हुई, आज वही नीली फॉर्मल शर्ट उसने फिर पहनी, मगर आज उसमें घबराहट नहीं, एक ठहराव था। उसने खुद से नज़र मिलाई और मन ही मन कहा—
तू यहाँ तक आई है, अब पीछे नहीं देखेगी।
दूर शहर के बीचों-बीच, काँच की वही ऊँची बिल्डिंग धूप में चमक रही थी।
और कहीं उसके भीतर, एक नई कहानी अपने पहले दिन का इंतज़ार कर रही थी।
कहानी जारी है..