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मुरीद दात पिस्ते हुए "अपनी जुबां पे अटल रहना क्योंकि अगली बार जुबां ही नही रहेगी" और झिड़कते हुए छोड़ दिया। अब आगे,,,
जंगली कन्फ्युज होकर सबको टक टकी लगाए
देखते हुए चमड़ी के पास खिसक कर धीरे से
फुसफुसाया "वैसे एक बात पूछूं?"
चमड़ी उसे डपट कर "तू चुप रह बे "
जंगली मुंह बनाते हुए "अरे पूछने तो दो"
चमड़ी दात पिस्ते हुए "जल्दी बक साले"
जंगली एक मिनट सोच कर "मैं क्या पूछ रहा था ?" वो जो पूछने वाला था भुल भी गया।
चमड़ी का मन किया उसका सिर फोड़ दे कम से कम इसी बहाने डॉक्टर उसके दिमाग का सिस्टम सही कर देगा। जब देखो तब हर मिनट में कुछ न कुछ भूल जाता हैं।
"अब क्या कर सकता हु आख़िर उस्ताद से जोश में आकर जिराफ की तरह ऊंची गर्दन उठाए बोला था "मैं इसको याद दिला दूंगा don't vary" अब झेल रहा तो समझ में आ रहा मैने अपने पैर में कुल्हाड़ी मारी है"
वो मन में खुद को कोसने लगा ।
और आगे मन में बोला " मति मारी गई थी जो इसे अपने सर पे बिठा लिया पता नहीं ऐसे कैसे इतने बड़े गैंग में शामिल हो गया ये भुलक्कड़ की औलाद"
उसे कहीं और खोए देख जंगली उसके कान में फुक मारकर "अरे बताओ ना?"
चमड़ी चिहूंक कर होश में आया और
जंगली को खा जाने वाली नजरों से घूरने लगा तो जंगली दात दिखाते हुए फिर वही बोला "यार बताओ ना प्लीज"
चमड़ी खीजते हुए "छुपन छुपाई खेल रहे साले अब मुंह बंद कर चुप बैठ,, सूना ना सर ने क्या कहा उस्ताद से,,बोलने के लिए मुंह ही नही रहेगा"
ये सुन जंगली मुंह बनाते हुए चुप रह गया।
मुरीद बहुत परेशान था की अब करे तो क्या करें यहां से बाहर निकलना भी आसान न था। काला भंडार का काला सच की अफवाह फैलने से पहले उन्हे गन फैक्ट्री पहुंचना था पर अफवाह बुलेट ट्रेन की तरह फैला की अपनी मंजिल के एक कदम दूर रह गए आगे चेकिंग पोस्ट जो खुल गया था।
अब घना जंगल वाला रास्ता बिच सड़क पर माल से भरे ट्रक खड़ी करते तो इक्के दुक्के गाड़ी सवार देखते तो पकड़े जा सकते थे इसलिए जंगल में अंदर घुस ट्रक पेड़ो और झाड़ियों की हेल्प से छुपा दिया और आगे बढ़ कर कॉटेज नज़र आया तो वहा के मालिक जो लोगो को जंगल कैंप करने में सही मार्गदर्शक करता था ताकि वो जंगली जानवरो से सुरक्षित रहे वो वहा अकेले रहता था। लेकिन उन्हें क्या पता था की एक दिन इंसानी जानवरो के हाथों अपनी जान गंवा बैठेंगे इन दरिंदो ने उनकी खोपड़ी अपने गन से उड़ा दी थी और उनके ही घर में छिपे बैठे हैं।
लिवा अपार्टमेंट
TV हॉल
"पर आखिर कब तक छुपे रहेंगे अंधेर जंगल और खुखार्र जंगली जानवर,,, हूं बाहर तो आना ही पड़ेगा उन्हे" TV हॉल में बैठी आशना शातिर स्माइल कर बोली।
उसे ऐसे देख कृषभ हसी उड़ाते हुए बोला "तुम तो ऐसे बोल रही जैसे उनपर नज़र गड़ाए बैठी हो"
आशना उसे घुर कर देखी और बोली "बंदर क्या जानें अदरक का स्वाद,,वही समझ लो" कृषभ को उसका तर्क समझ में नहीं आया वो खीजते हुए बोला "तुम मुझे बंदर कह रही हो?"
आशना बेपरवाही से "नही तुम खुद को बंदर कह रहे हों अब चुप रहो जबरदस्ती का बहस स्टार्ट मत करो वरना,,," गुस्से मे फटने वाली थी की तभी
"लीडर,, लीडर,,," कृभीन दनदनाते हुए वहा आया उसके चेहरे पर गुस्से के भाव थे आशना उसे कन्फ्युज होकर देखी तो वो बोला "उनका पता चल गया वो लोग घनेरी जंगल में छुपे हैं और,,,"
घनेरी जंगल मुंबई के सबसे बड़े घने जंगलों में से एक था। जंगल का आधा हिस्सा सेफ था तो आधा जानवरों से भरा दिन में भी वहा जाने की मनाही थी। वही सेफ वाले हिस्से में वो कॉटेज था और वहा का मालिक कैंप ट्रिप चलाता था साथ ही रास्ता भटके लोगो की मदत करता था। पर,,पर अब इस दुनिया से अलविदा कह चुका था यही बात अब आशना को पता चलने वाली थी।
आशना भौहें उठाए उसे देखी जैसे कह रही हो "रुका क्यों,,,? आगे ट्रैफिक है क्या?"
उसका इशारा समझते ही कृभिन गुस्से भरे भावहीन
स्वर में बोला "कॉटेज के मालिक श्री चौहान को मार दिया उन दरिंदों ने,,,"
ये सुन गुस्से में आशना ने मुठ्ठी भींच ली तो वही कृषभ हैरान कन्फ्यूज खड़ा था।
गुस्से में उबलते हुए भी आशना नॉर्मल रही और बोली "हर एक मासूम की जान की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी उन्हे,,जो जो इस घटिया खेल में शामिल हैं उन सबको और,,, और रही बात इस खेल के मास्टर माइंड की तो उसकी जिंदगी तो मेरे हाथो से ही खत्म होनी लिखी है"
"Hmm,,," कृभिन बस इतना ही बोला ।
"तुम जाओ और,,," आशना अपनी बात पूरी कर पाती की
अपने आप को इग्नोर महसूस कर कृषभ उनके बीच में हाथ उपर किए बोला "वन सेकेंड वन सेकेंड लीडर no 2 भी यही है,,तुम दोनो मुझे इग्नोर कर रहे हो सीरियसली,,,आशना मुझे एक बात समझ नहीं आई जब तुम्हे पता है वो इंस्पेक्टर अपने साथियों के साथ कहा छुपा है यहां शान सी बैठी कैसे रह सकती हो"
आशना और कृभिन एक दूसरे को देखे फिर दोनो साथ में बोले "हम अपना काम ही तो कर रहे हैं"
उनकी बात सुन कृषभ गुस्से में "ओह सीरियसली,,, कॉटेज का मालिक मर गया है तुम्हें पता था वो मुरीद वहा छुपा है तुम श्री चौहान को बचा सकती थीं लेकिन तुमने ऐसा नहीं किया क्यू,,,?"
"तुम गलत समझ रहें हो मैं,,, " आशना उसे समझाने को हुई की
कृषभ फिर सख्ती से बोला "मैं क्या गलत समझ रहा हूं जरा समझाना तो?"
"प्लीज आप शांत रहिए मुझे जस्ट अभी ही पता चला है उनका ठिकाना और रही बात श्री चौहान की तो उन्हे कॉटेज में कब्जा कर घुसते ही मार दिया गया,,ये सब बहुत जल्दी में हुआ हम वहा होते तो भी कुछ नहीं कर पाते क्युकी उनके पास लाखो में गन और हथियार है और भूलिए मत हम आर्मी नही जासूस है" कृभिन ने उसे समझाते हुए अपनी बात खत्म की।
उसकी बात सुन कृषभ को रिलाइज हुआ की वो आधी अधूरी बात सुन कुछ ज्यादा ही उल्टा दिमाग चला रहा था। वो लीडर है उसे ऐसा नहीं करना चाहिए।
कृषभ अपनी गलती मान बोला "सॉरी आशना मुझे पुरी बात समझ लेनी चाहिए थी"
आशना तंज भरी स्माइल कर बोली "Hmm,, हम जासूसों में धीरज नाम की भी चीज होती हैं लगता हैं तुम वो खो चुके हो लेकिन कोई बात नहीं मैं हू ना it's ok"
"मुझे पता है तुम मुझे ताना दे रही हो i no मै समझता हु तो आगे क्या करना है मुरीद के कदम बढ़ाने का इंतजार करोगी या,,," कृषभ अपनी बात पुरी करता की
कृभिन बोला "Hmm,,, इंतजार करने का सवाल ही पैदा नहीं होता उसे अब तक अपने चमचों से भनक लग गई होगी की पुलिस कभी भी उस तक पहुंच सकती है"
"वो फिर वहा से नौ दो ग्यारह होने के फिराक में होगा लेकिन इससे पहले ही हम अपना तीर छोड़ देंगे जो निशाने पर ही लगेगा,," इतना बोल आशना कृभिन की ओर रुख कर सख्ती से बोली "कृभिन इस्पेक्टर मुरीश सेखवंत को उनके प्यारे भाई की डायरेक्ट लोकेशन सिक्रेट तरह से send कर दो" आशना सख़्त ऑर्डर दी।
"Ok लीडर" ये बोल कृभिन तेजी से वहा से निकल गया अपना काम करने।
"आशना इस मूरिश सेखवंत से रिलीटीड सारी इन्फॉर्मेशन निकलवाई ना तुमने? आई थिंग ये कैसा आदमी है ? कही ये भी अपने भाई की तरह,,," कृषभ इससे आगे बोलता की
आशना उसे ऐसे घुरी जैसे कह रही हो "बेवकूफो जैसे सवाल क्यों कर रहे हों लीडर?"
आशना को ऐसे देख कृषभ समझ गया और बोला "मैं जरुर तुम्हे बेवकूफ लग रहा हु ना,,,"
💜💜💜क्या जवाब देगी आशना? क्या इस बार पकड़ा जाएगा मुरीद या फिर हो जाएगा मिस्टर इंडिया?
जानने के लिए बने रहे स्टोरी के साथ मिलते हैं जल्द ही next ep में 💜💜💜