Naya Rasta in Hindi Motivational Stories by Rajeev kumar books and stories PDF | नया रास्ता

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नया रास्ता

 

कहीं कोई रास्ता न दिखे फिर भी रास्ता तो निकालना ही पड़ता है। सारे लोग एक दुसरे का मुंह ताकने लगते हैं मगर उसी में से एक आदमी आगे बढ़ता है और वो भी अकेला। शारिरिक और मानसिक सहायता तो बहुत दुर की बात है, उत्साहवर्द्धन करने में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाता है।
सहयोग वर्मा के साथ भी ऐसा ही हुआ है। शारिरिक और आर्थिक मदद के बदले उसको मजाक का पात्र बनना पड़ा। बड़बड़ाया तो उसने अपने आप में ही था ’’ बेटा सहयोग, कोई नहीं करेगा तुम्हारा सहयोग, बल्कि होगा असहयोग। ’’
धीरे से खुद में ही कही बात मजाक उड़ाने वलों के लिए हंसी का पीटारा बन गया। ऐसा नहीं था कि उस नए रास्ते का फायदा सिर्फ सहयोग को होता, बल्कि फायदा तो सबको ही होता।
’’ चल कल्लू भइया, थोड़ी मदद कर दो। तुम सामने खड़े रहोगे तो हिम्मत बना रहेगा। ’’ यह बोलते हूए सहयोग हाथ जोड़ कर प्रणाम करने वाली मुद्रा में खड़ा हो गया।
सहयोग के हाथ को अपने हाथ में लेकर कल्लू ने कहा ’’ इ में हाथ जोड़ने वाली का बात है सहयोग भइया। ’’ और तो और कल्लू गले मिलते हुए बोला ’’ मेरा पुरा-पुरा सहयोग रहेगा। आगे चलो मैं पीछे से आता हूं। ’’
सहयोग को आगे चलता कर कल्लू एक-दो हाथ आदमी को जमा कर इतना जोर से हंसा कि जैसे कोई मसखरी वाली बात कर गया हो वो।
खजूरपूरा गाँव और दुर्गगढ़ा गाँव की दुरी बहुत ज्यादा तो नहीं थी, लेकिन बीच में सुरतीया नदी बहती थी। पानी तो बहुत कम ही रहता था, लेकिन बरसात के मौसम में जलस्तर काफी बढ़ जाता। सरकारी पुल जो बनाया गया था, उस पूल तक पहूंचने में एक घंटा का समय लगता था। सहयोग उसी कमी को पाटने की कोशिश कर रहा था। एक दिन काम करने के बाद सहयोग थका-हारा घर पहूंचा तो दरवाजे पर अपने पिताजी को खड़ा पाया। पिताजी एक टक निहार रहे थे। खैर पिताजी ने अन्दर आने का रास्ता दिया। चारपायी पर सहयोग के बगल में बैठकर पिता ने कहा ’’क्या जिद् थामे बैठे हो, सुरतीया नदी हमेशा सुखा ही रहता है, बरसात में ही तो पानी रहता है, हमेशा से काम निकलता रहा है, आगे भी निकलता रहेगा। सारा खेत परती पड़ा हुआ है। रोपाई-बुनाई करो तो कुछ फायदा हो। ’’
पिता जी की बात सुनकर सहयोग ने न तो हामी भरी और न इन्कार ही किया। पिता जी समझ गए कि अपनी जिद् पूरी करके ही मानेगा।
सहयोग ने बांस का पुल बनाने में ढेरो बांस का उपयोग किया। मगर आदमी की जगह सांड़ों का झुण्ड चढ़ गया तो, एक सांड़ का टांग फंसने के कारण और भगदड़ मचने के कारण बांस के पूल का एक बड़ा हिस्सा टुट गया। सहयोग की परेशानी और मजाक उड़ाने वाले और बढ़ गए।
सहयोग के हार मानने के पहले ही यह खबर सामाजिक संगठन तक पहूंची और अनुरोध के कारण सरकारी पुल का निमार्ण हुआ। खुशी की लहर को काई भी चेहरा छुपा नहीं पाया। खजूरपूरा गाँव और दुर्गगढ़ा गाँव के बीच सुरतीया नदी का अवरोध अब खत्म हो गया। समय की बचत होने से काम भी जल्दी-जल्दी होने लगा।
अपनी जयकार सुनकर सहयोग ने कहा ’’ बंद करो, जयकार का हकदार मैं नहीं बल्कि सरकार है। ’’
सभी ने एक स्वर में कहा ’’ अगर आप ने होते तो सरकार का ध्यान भी नहीं जाता।’’
लोगो ने सहयोग को गोद में उठा लिया।

समाप्त