लेकिन
मैं भरतपुर ज्वाइन नहीं कर सका।मेरा पुलिस सत्यापन का फॉर्म नहीं भरा गया था। इसलिए मुझे वापस बांदीकुई आना पड़ा। और करीब तीन महीने लग गए जब मेरे पुलिस सत्यापन के कागज आए। मेरे ताऊजी कन्हैया लाल जो बांदीकुई से मेल ड्राइवर से रिटायर हुए थे। पुलिस थाने जाकर पता करते रहते और फिर अक्टूबर में जब पुलिस सत्यापन हो गया तब कोटा से मेरे पास पत्र आया। उस समय मेरे बहनोई जय भगवान गॉड बांदीकुई में ही टिकट कलेक्टर थे। और बांदीकुई के एस एस ऑफिस से मुझे कोटा के लिए पास मिला। उन दिनों सीधा रास्ता नहीं था। मैं पहले jaipur गया। फिर सवाईमाधोपुर और तब कोटा। और इस बार मुझे पोस्टिंग आगरा फोर्ट पर मिली। वैसे मेरा आगरा जाने का यह पहला अवसर नहीं था। मेरे पिताजी सन १९५८ व १९५९ में अछनेरा में पोस्टेड थे। तब वह तो ड्यूटी के सिलसिले में आगरा जाते रहते थे। हमें भी ताजमहल दिखाने वी एक बार हम राम बारात देखने भी गए थे। आगरा की राम बारात पूरे उतर भारतमे प्रसिद्ध है।आज भी। लोग ट्रेनों से दूर दूर से इसे देखने आते हे। उस समय मेरी उम्र नौ साल थी। मेरी पांचवीं क्लास की शिक्षा भी अछनेरा के रेलवे स्कूल से हुई थी।
लेकिन वो एक दशक से पुरानी बात थी जब में बच्चा था। अब बालिग हो चुका था। जब में ट्रेन से आगरा फोर्ट जा रहा तब मुझे निरौतितलाल चौबे का ख्याल आया और मैं ट्रेन से आगरा फोर्ट पहुंच कर पार्सल ऑफिस गया। मुझे मालूम था। वह वहीं पर काम करते थे। उस समय वह ड्यूटी पर नहीं थे। ट्रेन सुबह छ बजे ही फोर्ट स्टेशन पर पहुंच जाती थी। ड्यूटी पर मारकर में राम करण था उनका नाम लेते ही उसने मुझे आदर से बैठाया और चाय पिलाई। चौबेजी की ड्यूटी 8बजे से थी पर वह आते देर से। आने पर मुझे देखते ही बहुत खुश हुए। मैं उनके लिए बेटे के समान था। मेरी उम्र के उनके बेटे थे।
पार्सल ऑफिस के ऊपर रिटायरिंग रुम था। जो आज भी है, वहीं पर मे रुका और नहाने धोने के बाद ऑफिस में उन्होंने ही मेरा पोस्टिंग लेटर दिया। उस समय रेल में मुख्य रूप से मजदूर संघ व एम्पलाइज यूनियन दो यूनियन काफी प्रभावशाली व ताकतवर थी। जिनका रेलवे में दबदबा था।चौबेजी एम्पलाइज यूनियन के आगरा फोर्ट ब्रांच के चेयर मेन थे और उनकी बात मायने रखती थी। इसी यूनियन के जे सी जैन स्टेशन अधीक्षक दफ्तर में चीफ क्लर्क थे। उनसे कहकर मेरा पोस्टिंग छोटी लाइन पार्सल में करा दिया उस समय आगरा फोर्ट स्टेशन पर छोटी व बड़ी लाइन के पार्सल,बुकिंग, क्लॉक रूम,इलेक्ट्रिक, कैरीज आदि सभी विभाग अलग अलग थे। छोटी लाइन के बुकिंग,पार्सल, क्लॉक रूम और रिजर्वेशन ऑफिस प्लेटफार्म नंबर चार पर थे।
छोटी लाइन के पार्सल ऑफिस के इंचार्ज जगदीश स्वरूप सक्सेना थे। लंबे कद, सावले रंग के हंसमुख व्यक्ति। चौबेजी ने उनसे बोल दिया,"यह आपके पास ही काम करेंगे।"
तीन दिन का काम सीखने का समय था। उसमें चौबेजी ने मुझे बांदीकुई भेज दिया। मैं कोटा से सीधा आया था।केवल। एक अटैची । बांदीकुई जाकर में बेडिंग वार अन्य। सामान लाया था