Mere Ishq me Shamil Ruhaniyat he - 70 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 70

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मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 70


⭐ एपिसोड 70 — “अंत जिसके बाद भी मोहब्बत बाकी रहे”




रात के 12 बज रहे थे।

शहर का पुराना इंडस्ट्रियल एरिया हमेशा की तरह सुनसान था,

लेकिन आज वहाँ हवा में एक अजीब-सी बेचैनी तैर रही थी—

जैसे कोई अदृश्य ताकत छुपकर हर चीज़ को देख रही हो।


अयान ने अपनी बाइक अचानक रोक दी।

उसकी सांसें तेज थीं।

दिल धड़क रहा था, लेकिन कदम थमे नहीं।

क्योंकि इस बार वह अकेला नहीं था—

इस बार उसके पास उसकी मोहब्बत का वजूद दाँव पर था।


नूर को उस काले चेहरे वाले आदमी ने उठाया था—

वही आदमी, जो पिछले कुछ एपिसोड से

उनकी जिंदगी में जहर बनकर घुस आया था।

उसकी आंखों में नफरत भरी रहती और आवाज़ में चीखें…

जैसे वह किसी अँधेरे अतीत का बदला लेने आया हो।


फैक्ट्री के टूटे हुए लोहे के दरवाजे को धक्का देते हुए अयान भीतर घुसा।

अँधेरा उस पर टूट पड़ा,

लेकिन उसके कदमों में एक अजीब-सी दृढ़ता थी।


“नूर!”

उसने आवाज़ लगाई।


फैक्ट्री की दीवारें थरथरा उठीं।

ऊपर टूटी खिड़कियों से हवा की सनसनाहट

जैसे इस लड़ाई की गवाह बनना चाहती थी।


अचानक अँधेरे में कदमों की आवाज़ आई।

और फिर—


वही काला चेहरा…

वही डरावनी स्याही जैसी आँखें।


“आ गए… अयान?”

उसने कर्कश आवाज़ में कहा,

“मुझसे अपनी मोहब्बत को बचाने?”


अयान ने दांत भींचे।

“नूर कहाँ है?”


आदमी ने मुस्कुराहट उछाली—

“जहाँ एक डरावनी रूह को होना चाहिए—

कैद, अँधेरे में, और तुम्हारी कमजोरी बनकर।”


अयान ने एक कदम आगे बढ़ाया।

“उसे छोड़ दो।

जो भी चाहिए, मुझसे ले लो।”


उस आदमी की आँखों में पागलपन चमका।

“तुमसे?

अगर तुमसे कुछ लेने लायक होता,

तो तुम अपनी किस्मत नहीं बदल पाते!

तुम बस एक इंसान हो…

और मैं तुम जैसे इंसानों की कहानियों को खत्म कर देता हूँ।”


अयान उसके सामने खड़ा रहा।

“पर एक चीज़ तुम कभी नहीं खत्म कर पाओगे—

मोहब्बत।”


आदमी हँसा।

“मोहब्बत…?

मोहब्बत ही तो इंसानों की सबसे बड़ी कमजोरी है।

और मैं…

मैं कमज़ोरियों को कुचलने के लिए पैदा हुआ हूँ।”


जैसे ही आदमी आगे बढ़ा—

पीछे अचानक एक चीख गूँजी—


“अयान!!”


उसके सीने में जान लौट आई।

वो मुड़ा—

और देखा…

नूर!


उसकी कलाई बंद थी,

चेहरा डरा हुआ,

लेकिन उसकी आँखें—

उम्मीद से भरी थीं।


“नूर!”

अयान उसकी ओर बढ़ा।


लेकिन एक ही पल में आदमी ने नूर के सामने हाथ फैलाया—

“पास आया… तो इसे खत्म कर दूँगा।”


नूर काँपते हुए बोली—

“अयान… रुक जाओ!”


अयान का दिल सिकुड़ गया।

उसने अपनी मुट्ठियाँ कसीं।


“नूर को छोड़ दे,”

वह फुसफुसाया,

“तू मुझसे लड़… उससे नहीं।”


आदमी गुर्राया—

“लड़?

तुमसे?

तुम तो सिर्फ़ अपने प्यार की वजह से खड़े हो।

अगर मैं उस प्यार को मिटा दूँ…

तो तुम भी मिट जाओगे।”


नूर ने चिल्लाकर कहा—

“तुम गलत हो!

प्यार मिटता नहीं है…

आत्मा से पैदा होने वाली चीज़ें कभी खत्म नहीं होती!”


उस आदमी की आँखें एक पल के लिए कांपीं।

उसने सिर घुमाकर नूर को घूरा—


“तुमने क्या कहा…?

आत्मा?”


नूर बोली—

“हाँ।

तुमने प्यार को कमजोरी समझा…

लेकिन तुम्हें पता नहीं

कि वही प्यार इंसान को अजेय बना देता है।”


अयान ने धीमे से कहा—

“और अब… हम दोनों साथ हैं।”


वह आदमी चिल्लाया—

“चुप!!!”


उसकी चीख हवा में गूँजकर फैक्ट्री की दीवारों से टकराई।

सारा माहौल स्याह होने लगा।

जैसे हवा में काले धुएँ का जहरीला तूफान उठ रहा हो।


अयान जानता था कि यह पल निर्णायक है।

अगर अभी कदम नहीं उठाए

तो नूर उसके सामने ही खत्म हो जाएगी।


उसने अचानक दौड़ लगाई—

नूर की तरफ।


आदमी चीखा—

“रुक जा!!!!”


लेकिन इस बार अयान रुका नहीं।

उसकी दौड़…

उसकी जान…

उसकी पूरी रूह—

सब नूर की तरफ थी।


उस आदमी ने हाथ फैलाया,

अँधेरा उसके हाथों से निकलकर अयान पर टूट पड़ा…

लेकिन उसी पल

नूर ने खुद को आज़ाद कर लिया

और अयान के आगे आकर खड़ी हो गई।


“अयान को छू भी नहीं सकता तुम!!”


अँधेरा नूर से टकराया

लेकिन जैसे ही उसके शरीर से स्पर्श हुआ—

वह रोशनी बन गया।


आदमी हैरान रह गया।


“ये… ये कैसे?”


नूर ने जवाब दिया—

“क्योंकि मेरे इश्क़ में डर नहीं…

रूहानियत है।”


रोशनी उस आदमी के चारों ओर फैल गई।

उसका चेहरा पिघलने लगा।

वह पीछे हटने लगा।


अयान ने नूर का हाथ पकड़ा—

और दोनों एक साथ बोले—


“मोहब्बत जीतती है…

अँधेरा हारता है।”


उस आदमी का शरीर धुएँ की तरह गायब होने लगा।


“नहीं!!!

तुम मेरी कहानी खत्म नहीं कर सकते—”


अयान ने कठोर स्वर में कहा—

“तुमने हमारी कहानी को छूने की कोशिश की…

यही तुम्हारी सबसे बड़ी गलती थी।”


और अगले ही पल

वह आदमी पूरी तरह गायब हो गया।

बस एक बदबूदार हवा का झोंका बचा।



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फैक्ट्री में खामोशी छा गई।

अयान ने नूर को अपने सीने से लगा लिया।

उसकी सांसें तेज थीं,

लेकिन उसका दिल अब शांत था।


“तुम ठीक हो?”

अयान ने घबराए स्वर में पूछा।


नूर उसकी बाँहों में ढह गई।

“हाँ…

क्योंकि तुम मेरे साथ हो।”


अयान ने उसके सिर पर हाथ फेरा।

“आज अगर तुम न होती…

तो मैं खत्म हो जाता।”


नूर मुस्कुराई—

“अयान…

प्यार सिर्फ़ जिया नहीं जाता,

लड़ा भी जाता है।

और तुमने मेरे लिए लड़कर

साबित कर दिया कि तुम मेरे इश्क़ की रूह हो।”


अयान उसकी आँखों में देखता रहा।

“और तुम…

मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत वजह।”


दोनों फैक्ट्री से बाहर निकले।

रात ठंडी थी

लेकिन उनके कदम गर्म।


दूर आसमान में तारे चमक रहे थे—

जैसे आज की जीत का जश्न मना रहे हों।


नूर ने धीरे से अयान का हाथ थामा।

“अब हमारी कहानी खत्म?”


अयान ने सिर हिलाया—

“कहानी…

कभी खत्म नहीं होती।

बस एक मोड़ पर आकर ठहरती है—

ताकि अगला सफर शुरू हो सके।”


नूर मुस्कुराई—

“तो चलो…

हमारी नई

शुरुआत की तरफ।”


अयान ने उसके माथे पर हल्का सा किस किया।

“हमेशा…

हम दोनों साथ।”


दोनों दूर निकल गए—

अँधेरे से बाहर,

प्यार की रोशनी की ओर।


और वहीं…

उनकी कहानी

“मेरे इश्क़ में शामिल रूहानियत है"

अपना खूबसूरत, संपूर्ण और यादगार अंत पा गई।



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