एपिसोड 68 — “सच्चाई के दरवाज़े पर दस्तक”
अगली सुबह नूर की नींद हल्के-हल्के सूरज की रौशनी से खुली। आँखें खुलते ही वो मुस्कुराई—
कल रात अयान ने जो वादा किया था… उसकी गर्माहट अब भी उसके दिल में थी।
लेकिन अगले ही पल उसका दिल घबराया—
“अयान ने कहा था, कुछ खास बात करनी है… क्या वो मेरे बारे में होगा? या उसके अतीत के बारे में?”
नूर ने खुद को सँभाला।
“जो भी होगा… हम साथ संभाल लेंगे।”
उधर अयान भी सुबह-सुबह उठा, लेकिन उसकी आँखों में रात भर की बेचैनी साफ झलक रही थी।
सच्चाई सामने लाना आसान नहीं था… लेकिन नूर के बिना जीना उससे भी ज्यादा मुश्किल था।
उसने खुद को आईने में देखा और धीमे से कहा—
“आज सब साफ कर दूँगा… चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़े।”
❖ नूर की तैयारी… और दिल की धड़कनें
शाम के करीब नूर तैयार होने लगी। आज वो ज्यादा सजना नहीं चाहती थी—
बस एक साधारण सी चूड़ीदार, हल्का सा काजल और उसके होंठों पर वही मासूम मुस्कान।
उसकी सहेली सना कमरे में आई और बोली,
“आज तो कोई खास मिलने वाला है… है ना?”
नूर हल्का सा लाल हो गई।
“हाँ… अयान ने बुलाया है।”
सना ने मज़ाक किया,
“लगे हाथों आज प्रपोज़ भी करवा लेना।”
नूर ने तकिया उठाकर उसे मारने का नाटक किया।
दोनों हँस दीं।
लेकिन अंदर से नूर बेचैन थी।
दिल बार-बार कह रहा था—
“कुछ बड़ा होने वाला है…”
❖ शाम की ठंडी हवा और अयान का इंतज़ार
नूर घर के बाहर आई… और वहाँ अयान पहले से खड़ा था।
काले रंग की शर्ट, हल्की दाढ़ी, और आँखों में अजीब सी बेचैनी।
नूर ने उसे देखकर मुस्कुराया—
“तुम जल्दी आ गए?”
अयान ने धीमे से कहा,
“आज तुम्हें इंतज़ार नहीं करवाना चाहता था।”
दोनों बाइक पर बैठे।
हवा तेज थी… लेकिन दिल की धड़कनें उससे भी तेज़।
नूर पीछे बैठी थी और उसने हल्के से अयान का कंधा पकड़ा।
अयान ने उसके स्पर्श को महसूस किया, लेकिन आज उसकी पकड़ थोड़ी कमजोर थी।
कुछ मिनट बाद बाइक एक शांत, सुनसान जगह पर रुकी—
झील के किनारे।
हवा ठंडी थी और पानी पर पड़ती चाँदनी जैसे कुछ कह रही थी।
❖ सच के करीब… एक-एक कदम
अयान झील के किनारे जाकर खड़ा हुआ।
नूर थोड़ा घबराई,
“अयान… क्या हुआ? तुम इतने चुप क्यों हो?”
अयान ने गहरी सांस ली।
“नूर… जो मैं तुम्हें बताने जा रहा हूँ, वो शायद सुनना आसान नहीं होगा। लेकिन तुम मेरी जिंदगी हो… और मैं अब तुमसे कुछ नहीं छुपाना चाहता।”
नूर ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“अयान… चाहे कुछ भी हो, मैं सुनने के लिए तैयार हूँ।”
अयान की आँखें नम हो गईं।
वह बैठ गया… और पत्थरों पर अपनी उंगलियाँ फेरते हुए बोला—
“नूर… मेरा अतीत साफ नहीं है। मैं वो लड़का नहीं था जो तुम आज देख रही हो। मैं गलत लोगों के बीच था… गलत कामों में फँसा था।”
नूर का दिल धड़का,
“कौन से काम, अयान…?”
अयान ने हिचकते हुए कहा,
“मैं… चोरी, गैंग्स, पैसे की डील… इन सब में फँसा हुआ था। मेरी जिंदगी अंधेरी थी नूर… मैं उस दुनिया का हिस्सा था जिससे हर कोई दूर भागता है।”
नूर की साँसे रुक गईं।
लेकिन उसने अपना हाथ नहीं छोड़ा।
अयान बोलता गया—
“मैं किसी मजबूरी में नहीं… अपनी बेवकूफी में उस रास्ते पर गया। बस पैसे चाहिए थे… और मेरे आसपास के लोग उसी रास्ते पर थे। लेकिन फिर… मुझे समझ आया कि वो दुनिया मुझे खत्म कर देगी।”
नूर ने धीरे से पूछा,
“और तुमने वो छोड़ दिया?”
अयान ने सिर हिलाया,
“हाँ। उसके बाद मैंने एक-एक करके सबसे दूरी बना ली। लेकिन कुछ लोग… आज भी मुझे वापस खींचना चाहते हैं। और मैं… बस तुम्हें उस दुनिया से दूर रखना चाहता हूँ।”
नूर की आँखें भर आईं।
उसने अयान के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ लिया—
“अयान, तुमने गलती की… लेकिन सुधारे भी। ये ही असली हिम्मत है। मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊँगी। मैं तुम्हारे साथ हूँ। हमेशा।”
अयान की आँखों में चमक आ गई।
वह बोला,
“तुम्हें मुझसे डर नहीं लगा?”
नूर मुस्कुराई,
“डर? अयान… डर तो तब लगे जब तुम झूठ बोलते। सच ने मुझे और करीब ला दिया है।”
❖ दिल से निकले आँसू… और राहत
अयान खुद को रोक नहीं पाया।
उसने नूर को अचानक अपनी बाँहों में भर लिया।
नूर उसके सीने से लगकर बोली,
“अयान… चाहे तुम्हारा अतीत कैसा भी हो… भविष्य में मैं हूँ। और हम दोनों मिलकर हर चीज संभाल लेंगे।”
अयान ने उसके बालों में चेहरा छुपा लिया—
“मैं तुम्हें कभी खोना नहीं चाहता नूर…”
“तो फिर कभी मुझसे दूर मत जाना।”
नूर की आवाज़ काँप रही थी।
दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े रहे।
जैसे इस आलिंगन में उन्हें अपनी दुनिया मिली हो।
❖ लेकिन… दूर से कोई देख रहा था
दोनों उस पल में खोए हुए थे,
पर उन्हें ये नहीं पता था कि झाड़ियों के पीछे कोई खड़ा उन्हें देख रहा है।
काले कपड़ों में एक आदमी…
जो धीमे से बुदबुदाया—
“तो ये है अयान की कमजोरी…”
उसने अपने फोन से उनकी तस्वीरें लीं…
और किसी को भेज दीं।
“काम शुरू किया जाए?”
उधर से मैसेज आया।
आदमी ने बिना हिचक जवाब दिया—
“हाँ… अब सीधे नूर पर हमला होगा।”
**❖ एपिसोड 68 समाप्त