Mere Ishq me Shamil Ruhaniyat he - 60 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 60

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मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 60

 “मेरे इश्क़ में शामिल रुमानियत है”

🌙 एपिसोड 60





रात की खामोशी अब हवेली में सिर्फ एक अहसास नहीं थी—

वह किसी तूफ़ान से पहले का ठहराव लग रही थी।

अयान, रूहानी और शायरी तीनों जल्दी-जल्दी नीचे वाले हॉल की ओर बढ़े।


सीढ़ियों से उतरते ही एक अजीब सी बू हवा में तैर रही थी—

खून और धुएँ की मिली-जुली गंध।


हॉल के बीचोंबीच एक शरीर पड़ा था।

सभी की साँसें रुक गईं—


वो नौकर रमेश था…

जिसने कुछ दिन पहले ज़ारा के कमरे के दरवाज़े पर कुछ देखा था।


उसका शरीर टेढ़ा पड़ा था,

आँखें पूरी तरह खुली हुई…

और सबसे डरावनी बात—


उसकी गर्दन पर नाखूनों जैसे लम्बे, गहरे निशान।


रूहानी ने अयान का हाथ कसकर पकड़ लिया।

“अयान… यह सब… सच हो रहा है…”


अयान नीचे घुटनों के बल बैठा और शरीर को ध्यान से देखा।

उसके चेहरे पर तनाव छा गया।


“ये इंसानी हमला नहीं है,”

उसने फुसफुसाते हुए कहा।


शायरी काँप रही थी—

“क्या वो… ज़ारा ने…?”


अचानक हॉल की सभी मोमबत्तियाँ एक साथ बुझ गईं।

चारों तरफ काला अँधेरा छा गया।


रूहानी डर से अयान के और करीब आ गई।

धीरे से बोली—

“अयान… वो यहीं है…”


और सचमुच—

कमरे के बिल्कुल बीच में लाल धुआँ जमा होने लगा।


ज़मीन पर पड़ा रमेश का शरीर…

धीरे-धीरे हवा में उठने लगा

जैसे किसी अदृश्य हाथ ने उसे पकड़ रखा हो।


शायरी चीख पड़ी—

“भगवान!”


अयान आगे बढ़ा—

“ज़ारा! उसे छोड़ दो!”


अचानक धुआँ फट गया

और ज़ारा का साया सामने आया—

इस बार पहले से भी ज़्यादा स्पष्ट,

ज़्यादा भयानक,

और उसकी आँखें खून की तरह लाल।


वह धीमे से मुस्कुराई।


“तुमने कहा था…

मोहब्बत मुझे रोक लेगी, अयान।

देखो… क्या रोका?”


वह चुटकी बजाती है—

और रमेश का शरीर ज़मीन पर जोर से गिरता है।


रूहानी का दिल धक् से रुक जाता है।


अयान दाँत भींचकर आगे बढ़ता है—

“तुम जिसे चाहो मारती रहो…

लेकिन रूहानी को दूर रखो।”


ज़ारा का चेहरा अचानक गुस्से से विकृत हो गया—

“तुम्हें लगता है…

उसका इस कहानी से कोई लेना-देना नहीं?”


वह धीरे-धीरे रूहानी के सामने आ गई।

उसका साया रूहानी के भीतर उतरने लगा—

जैसे वो उसे पढ़ रही हो…

या उसके अंदर कोई दरवाज़ा खोज रही हो।


“अह्ह…”

रूहानी ने सिर पकड़ लिया।

“मेरे… सिर के अंदर कोई… बात कर रहा है…”


अयान झट से उसे पकड़े।

“बोलो रूहानी! क्या हो रहा है?”


रूहानी की आँखें पल भर को काली हो गईं।

उसकी साँसें तेज़।


“वह कह रही है…”

रूहानी का गला सूख गया—

“…कि मैंने…

पिछले जन्म में…

उसकी जान ली थी…”


कमरा एक पल के लिए बिल्कुल खामोश हो गया।


अयान का चेहरा अविश्वास से सख्त हो गया।


“नहीं! यह झूठ है! रूहानी किसी की जान नहीं ले सकती!”


लेकिन ज़ारा ने हँसते हुए कहा—

“आह, अयान…

तुम अब भी उसे नहीं समझ पाए।

तुम्हारी रूहानी…

मेरी मौत का कारण थी।”


शायरी घबराकर बोली—

“यह कैसे हो सकता है?”


ज़ारा ने हाथ उठाया—

और हवा में लाल रोशनी चमकी।

पूरा हॉल बदलने लगा—

फर्श, दीवारें, सब धुंध में बदल गए…


और अचानक वे एक पुराने समय में खड़े थे—

एक टूटे-फूटे कमरे में,

जहाँ ज़ारा खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थी…

और उसके सामने एक लड़की खड़ी थी—


उसी चेहरे जैसी…

उसी आँखों वाली…

पर वह रूहानी नहीं थी…


वह पिछले जन्म की रूहानी थी।


उसने ज़ारा की तरफ बिना किसी भाव के कहा—

“तुम्हारी मोहब्बत…

मेरे रास्ते में थी।”


इतना कहकर उसने चाकू सीने में और गहरा उतार दिया।


रूहानी डर के मारे घुटनों पर गिर पड़ी—

“ये मैं नहीं हूँ!!

ये मैं नहीं हो सकती!!”


दृश्य गायब हो गया।

वे फिर हॉल में थे।

ज़ारा का साया उनके बीच हवा में तैर रहा था।


“सच… कितना कड़वा होता है ना?”

ज़ारा फुसफुसाई।


अयान रूहानी के सामने ढाल बनकर खड़ा हो गया—

“मैं नहीं मानता! रूहानी ने किसी की जान नहीं ली!”


ज़ारा चीखी—

“जन्म बदलते हैं…

रूहें नहीं।”


रूहानी का पूरा शरीर काँप रहा था।

उसकी हथेलियाँ ठंडी पड़ चुकी थीं।


अयान ने उसका चेहरा पकड़ा—

“रूहानी! मेरी तरफ देखो!

मैं तुम्हें किसी जन्म के पाप में डूबने नहीं दूँगा!”


ज़ारा ने अचानक उंगली उठाई,

और एक तेज़ झोंका रूहानी की तरफ बढ़ा।


अयान चिल्ला उठा—

“रूहानी!!”


पर उसी क्षण—

रूहानी अचानक खड़ी हो गई।


उसकी आँखें अब पूरी तरह काली थीं।

जैसे उसके भीतर कोई और ही मौजूद हो।


ज़ारा ने धीरे से कहा—

“देखा… दरवाज़ा खुल चुका है।”


रूहानी ने अयान की ओर देखा—

लेकिन उस नज़र में कोई पहचान, कोई प्यार…

कुछ नहीं था।


उसने ज़ारा जैसी ही आवाज़ में कहा—

“अब खेल… मेरे हाथ में है।”


अयान की दुनिया जैसे रुक गई।



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