Mere Ishq me Shamil Ruhaniyat he - 57 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 57

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मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 57


लाइट जाते ही कमरा बिल्कुल अँधेरे में डूब गया।

सिर्फ हवा में एक ठंडा, नुकीला एहसास घूम रहा था —

जैसे कोई अदृश्य साँसें उनके बिल्कुल पास से गुजर रही हों।


रूहानी ने अयान का हाथ ज़ोर से पकड़ लिया।

उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था—

पर अयान का हाथ उतना ही सख़्त, उतना ही भरोसेमंद था।


अयान धीमी आवाज़ में बोला —

“डरना मत… मैं हूँ।”


लेकिन उसकी अपनी नज़रें भी अंधेरे में भटक रही थीं।


अचानक…

शायरी के पीछे की दीवार पर लाल धुँआ उठने लगा।

देर नहीं लगी कि उस धुएँ से एक साया बनना शुरू हुआ—


लंबी कद वाली महिला…

झुका हुआ चेहरा…

हाथों में चूड़ियों का टूटने जैसा टेढ़ा-मेढ़ा आवाज़…


रूहानी की साँस अटक गई।

“अयान… वो… वही है…”


अयान आगे बढ़ा, शायरी के सामने खड़ा हो गया —

“जो भी है… हमसे दूर रहो।”


साया हँसा —

सूखे पत्तों जैसी आवाज़…


“मोहब्बत… तुमसे दूर नहीं रहती अयान।

और बदला… मैं कभी अधूरा नहीं छोड़ती।”


रूहानी काँपते हुए बोली —

“तुम ज़ारा हो?”


साया धीरे-धीरे रूहानी के बेहद पास आकर रुका —

उसकी ठंडी साँसें रूहानी के कंधे को छू रही थीं।


“हाँ… वो ज़रा…

जिसकी मोहब्बत को किसी ने छीन लिया…

और जिस मोहब्बत ने मुझे मार दिया।”


रूहानी ने फुसफुसाते हुए पूछा —

“लेकिन हमारा इससे क्या संबंध? तुम हम दोनों के पीछे क्यों हो?”


साया बेहद धीरे बोला —

पर उसकी आवाज़ सीधा दिल में उतरती चली गई—


“क्योंकि…

तुम दोनों की मोहब्बत में वही रुमानियत है…

जिसे मैंने कभी महसूस किया था।

और वही रुमानियत…

मेरी मौत की वजह बनी।”


अयान का चेहरा सख्त हो गया।

“हमारी मोहब्बत को कोई नहीं तोड़ सकता —

न तुम…

न तुम्हारा अतीत।”


साया गुस्से से कांप उठा —

“अयान!

तुम्हारी ये हिम्मत मुझे पसंद है…

पर रूहानी—

तुम्हारे दिल में वो दरार है…

जो मुझे अंदर आने देगी।”


रूहानी पीछे हट गई —

“मुझे मत छुओ… मैं डरती नहीं… पर—”


साया ने उसका वाक्य पूरा किया —

“पर तुम अतीत से बच नहीं सकती।

तुम्हारी रूह… मेरी रूह से बंधी है लड़की।”


कमरे की हवा भारी हो गई।


अयान चीखा —

“स्टॉप!! अगर तुम्हें किसी से बदला चाहिए—

तो मुझसे लो!

रूहानी को मत छुओ!”


साया उसके पास आ गया —

इतना पास कि अयान की साँस ठंडी पड़ गई।


“तुम मर्द हमेशा यही सोचते हो कि नायक हो…

लेकिन कहानी में असली शक्ति…

हम औरतों की रूहों में होती है।”


अचानक शायरी की कराह निकल पड़ी —

उसने आँखें खोलीं और चिल्लाई —

“रूहानी!! भागो!!!

वो तुम्हें अपने अंदर समा लेगी!!”


बात ख़त्म भी नहीं हुई थी कि ज़ारा का साया एक तेज़ झोंके की तरह रूहानी की तरफ बढ़ा।


रूहानी पीछे हटते-हटते गिरने वाली थी—

लेकिन अयान ने उसे पकड़ लिया और दीवार से सटा लिया।

उसकी बाँहें रूहानी को ढँक रही थीं।


अयान गरजकर बोला —

“तुम उसे छू भी नहीं पाओगी!!”


साया रुक गया।

और फिर…

अचानक गायब।


कुछ पल तक सिर्फ सन्नाटा था…

फिर हवेली के कोने में किसी के रोने की धीमी आवाज़ गूँजी।


शायरी काँपते हुए बोली —

“वो वापस आएगी…

वो कह रही थी…

‘मोहब्बत जितनी गहरी… उतना गहरा होगा मेरा बदला’”


अयान रूहानी की तरफ मुड़ा।

उसकी आँखों में साफ़ डर, दर्द और मोहब्बत थी।


“रूहानी… तुम ठीक हो?”


रूहानी ने होंठ काटे, आँखों में आँसू भर आए —

“अयान… वो कह रही थी कि मेरी रूह उससे बंधी है…

क्या ये सच है?

क्या हम किसी पुराने जन्म की वजह से ये सब झेल रहे हैं?”


अयान ने उसके गाल थामे —

“मुझे नहीं पता अतीत क्या था…

पर मैं जानता हूँ कि इस जन्म में तुम सिर्फ मेरी हो।

और मैं तुमसे… किसी रूह, बदला या अतीत के सामने कमजोर नहीं पड़ने दूँगा।”


रूहानी उसके सीने से लग गई।

उसके हाथ अयान की कमीज़ पकड़ रहे थे।


“अयान… अगर ये सब मेरी वजह से हो रहा है तो—”


अयान ने उसे बीच में रोका —

“तुम मेरी वजह हो… मेरी ताकत की।

और मैं हर जन्म में तुम्हें बचाऊँगा, रूहानी।”


अचानक—

सीढ़ियों के नीचे से किसी के तेज़ कदमों की आवाज़ आई।

जैसे कोई भागकर ऊपर आ रहा हो।


तीनों ने मुड़कर देखा…


एक नौकरानी घबराई हुई खड़ी थी, चेहरे पर खून लगा हुआ।


वो हाँफते हुए बोली —

“साहब… नीचे वाले हाल में…

कोई पड़ा है…

और लगता है…

वो… ज़िंदा नहीं है!”


तीनों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।


अयान ने तुरंत रूहानी और शायरी दोनों को पीछे किया —

“यह सिर्फ रूह का खेल नहीं रहा…

अब कोई इंसानी खून भी बहा है।”


रूहानी का दिल बैठ गया

“कौन हो सकता है…? और क्यों?”


अयान की आँखों में ठंडा सन्नाटा उतर आया —

“लगता है…

ज़ारा का बदला शुरू हो चुका है।”


और यहीं…

अगला सच उनका इंतज़ार कर रहा था।