Chaar Din ka Pyar - 4 in Hindi Thriller by Jaidev chawariya books and stories PDF | चार दिन का प्यार - भाग 4

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चार दिन का प्यार - भाग 4

देव जैसे ही छत पर आया तो अपने पापा को देखने लगा। लेकिन देव को उसके पापा कई दिखाई नहीं दिए। 

देव ने देखा, दीपक मल्होत्रा अंकल वाईन पी रहे थे देव उनकी ओर बढ़ गया।

"नमस्ते मल्होत्रा अंकल, आप कैसे हैं ?अभी पांच मिनट पहले ही पापा यहां आपके साथ थे लेकिन अब कई दिख नहीं रहे, आपको कुछ बताकर गए हैं ?"

मल्होत्रा अंकल वाइन का आधा गिलास एक सास में पूरा गटक गए। उसके बाद टेबल पर रखी प्लेट में से एक कबाब उठाकर मुंह में रखने के बाद कहा, बेटा अभी एक थोड़ी देर पहले तो यही थे । फिर पता नहीं कहा चले गए। 

देव की समझ में आ गया की उसके पापा उसे देखने के लिए नीचे चले गए। 

जब ही देव का बेस्ट फ्रेंड अमित वर्मा उसके पास आया। 

"क्या बात हैं मेरे भाई यूं बार – बार हमें छोड़कर कहां चले जाते हो।" साली मैडम तो हमारी भी हैं पर हम तेरी तरह ना थे।  

"भाई कुछ समझ में नहीं आया।"

"अच्छा बेटा जान के अनजान ना बने।" हम सारे दोस्त यहां कब से तेरा इंतजार कर रहे ओर तो मैडम के आगे – पीछे घूम लगा रहा। 

देव मुस्कुराता हुआ बोला— "अमित यार तू भी पागल वाली बात कर रहा हैं।" वो तो में पापा का फोन लेने नीचे गया था ना की नेहा के चक्कर में ।

"भाई ठीक हैं, तू कौन – सा हार मानने वाला हैं चल वहां हम सभी तेरा इंतजार कर रहे हैं।" 

देव के सभी दोस्त केन वाली कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे। पर सिर्फ देखने वालो को लग रहा था की बाकी सभी केन में बीयर मौजूद थी। सिर्फ देव को छोड़कर क्योंकि वह वहां अकेला व्यक्ति था जो सिर्फ कोल्ड ड्रिंक पी रहा था। खाने के लिए वहां स्नेक्स और कबाब रखे हुए थे ।

अमित वर्मा ने केन में एक गुट मारने के बाद कहा— "देव साले चार दिन में तुझे नेहा से कैसे प्यार हो गया ?" हमें चार साल में आज तक किसी से भी एक बार भी प्यार नहीं हुआ, ऐसा क्या देख लिया साले तूने नेहा के अंदर।

देव के होठों पर एक प्यारी सी मुस्कान रेंग गई। मुझे पता था सालों तुम सब के दिमागो में यही सवाल चल रहा होगा।

"अच्छा बेटे हम कोई गलत बोल रह हैं।"

"बात आज से चार दिन पहले की हैं।" काफी दिनों से मेरे पेट में दर्द हो रहा था। काफी दवाईयों के बाद भी जब पेट में दर्द कम नहीं हुआ तो डॉक्टर ने कहा कि एक बार अल्ट्रासाउंड व ब्लड टेस्ट करवा लो। उस में सब कुछ क्लियर हो जायेगा की दरअसल पेट में दर्द क्यों हो रहा हैं। अल्ट्रासाउंड में करवा चूका था 
बस ब्लड टेस्ट करवाना। लैब में जाते ही एक सिस्टर जैसे ही मेरे ब्लड निकालने वाली थी की जब ही लैब में एक लड़की भागी – भागी आई और सिस्टर से कहने लगी ।

"प्लीज सिस्टर एक बार मेरे साथ चल दीजिए।" बाहर एक व्यक्ति का एक्सीडेंट हो गया हैं। आप एक बार उस व्यक्ति की पट्टी बांध दीजिए, उस व्यक्ति का बहुत खून निकल रहा हैं। मैंने अस्पताल वालों को बोला लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया, की यह एक एक्सीडेंट केस हैं। पहले आप पुलिस में रिपोर्ट करें, उसके बाद हम कुछ पर कर पाएंगे। 

सिस्टर बोली, "देखिए मैम आपका कहना बिलकुल सही हैं।" पर में यहां एक वर्कर हूं, में यहां अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकती। 

"मैम! मैं आपकी बात से सहमत हूं।" पर एक आदमी की जिंदगी से बढ़कर दूसरे आदमी की जिंदगी में कुछ भी नहीं हो सकता।

"मैं बीच बोल पड़ा, क्योंकि वह लड़की किसी अनजान की जान के लिए इतनी संघर्ष कर रही हैं ।" और में बैठा – बैठा उन दोनो की बाते सुन रहा था। मैम प्लीज एक बार उस आदमी को देख लीजिए।  अगर उस आदमी की जान बच गई तो उसके परिवार वाले सारी जिंदगी आपका अहसान मानेंगे। आप किसी बच्चे को अनाथ होने से और एक औरत को विधवा होने से बचा सकती हैं। अगर आप आज नहीं गई तो सारी जिंदगी आपको इस बात का अफसोस रहेगा की, में चाहती तो उस आदमी को बचा सकती हैं पर अपने स्टाफ के डर से ना बचा सकी, की उन्हें पता चल गया तो वह तुम्हें अस्पताल से निकाल देगे। 

सिस्टर उलझन में थी की वह क्या करें?एक तरफ उसकी ड्यूटी और दूसरी तरफ एक मौसम व्यक्ति की जिंदगी, वह किसे चुने ?

" अंत वह बोली ठीक हैं! में उस व्यक्ति की मदद करूंगी।"

उसके बाद वह सिस्टर, नेहा के साथ चली गई। उसके बाद में सोचने लगा की आज के समय में कोई किसी के लिए इतना कुछ कर सकता हैं। जीतना यह लड़की कर रही हैं नेहा की यही अच्छाई मुझे अच्छी लगी। उसी दिन से, मैं नेहा के साथ मिलकर, जरूतमंदो की मदद करने लगा। फिर मैने नेहा से अपने दिल की बात कह दी। 

"वहा मेरे भाई क्या लव स्टोरी हैं अमित ताली बजाकर बोला।"

जब ही देव का फोन की रिंग बज उठी,  देव ने फोन उठाया तो देखा फोन किसी अनजान नंबर से आ रहा था। 

देव ने अपने दोस्तों से दूर होकर फोन रिसीव किया, हेलो कौन ?

"दूसरी तरफ से एक व्यक्ति की आवाज आई, तुम्हारी गर्ल फ्रेंड नेहा से जब तुम बात कर रहे थे।"

देव बीच में बोला— "तुम कौन हो ओर नेहा को कैसे जानते हो?" मुझे और नेहा को तुमने कब बात करते हुऐ देख लिया ?

व्यक्ति दूसरी तरफ से बोला — "बात यह जरूरी नहीं हैं जो तुम पूछ रहे हो, में कौन हूं ? बात यह जरूरी जो में बताने जा रहा हूं, वो सुनो।

देव की भी दिलचस्पी अब बढ़ गई थी की फोन वाला व्यक्ति आखिर मुझे क्या बताना चाहता हैं ? देव बोला ठीक हैं ।

तुम्हारी गर्ल फ्रेंड नेहा से जब तुम बात कर रहे थे तो तुम दोनो के सिवा उस कमरे में एक व्यक्ति ओर मौजूद था। जानते हो वह व्यक्ति कौन था ?

अगला भाग जल्दी आयेगा।

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