Me and my feelings - 123 in Hindi Poems by Darshita Babubhai Shah books and stories PDF | में और मेरे अहसास - 123

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में और मेरे अहसास - 123

जीवन एक खिलौना हैं l

पल में हसना रोना हैं ll

 

सदाक़त की राह पर चल l

अच्छे कर्मो को बोना हैं ll

 

सोचा मत कर भाग्य में l

जो लिखा है वो होना हैं ll

 

सुख दुःख का बिछौना l

ढाई किलो को ढोना हैं ll

 

एक दिन आएगा की l

सदा के लिए सोना हैं ll

१६-३-२०२५ 

 

जिंदगी की अनकही दास्तान अनकही रहने दो l

दर्द एकतरफ़ा मोहोब्बत का अकेले ही सहने दो ll

 

रोज रोज बार बार एक ही सवाल ना पूछा करो l

ना बुलाओ कोई यू खामोशी का चौला पहने दो ll

 

कोई उम्रभर साथ नहीं चलता है सुनो तुम भी l

वक़्त की रफ़्तार के साथ साथ यूही बहने दो ll

 

भरे बाजार में भीड़ के साथ बहुत चल लिया है l

अब अकेलेपन और सूनेपन को चुपचाप चहने दो ll

 

जिस वजह से तूफान आ जाए जीवन में वह l

छिपी अनकही दास्ताँ अब तैखाने में तहने दो ll

१७-३-२०२५ 

 

खुद को खुद के रूबरू नजर आएँ कैसे? 

मोहब्बत को जग की निगाहों से छुपाएँ कैसे? 

 

बेशुमार दर्द और तन्हाई देनेवाले प्यार के l

ज़ख्मो को मिलने से खुद को बचाएँ कैसे?  

 

पलाश के रंग से जुदा करना कोई खेल नहीं l

सरेआम महफ़िल से उठकर जाएँ कैसे? 

 

नशीली निगाहों से पिलाने वाले हो वहां l

जाम के सजदे में सर को झुकाएँ कैसे? 

 

दिल फेंक से भरी पडी हैं क़ायनात आज l

बिना इश्क़ के महफिल को सजाएँ कैसे? 

 

सामने होते हुए भी नज़र अंदाज करते हैं l

वादों को याद दिलाएँ तो दिलाएँ कैसे? 

 

हौसलों के धागों से ज़ख्म सिलता नहीं तो l

उदास औ ग़मगीन चहरे को हसाएँ कैसे?  

१८-३-२०२५ 

 

आज मैं और मेरी तन्हाई एकदूसरे से बातें करने हैं l

एक-दूजे का हमसाया ओ दोस्ती का दम भरते हैं ll

 

बातों बातों में वक्त कहा निकले पता नहीं चलता हैं l

कुछ अपनी कहके कुछ उसकी सुनके नींद में सरते हैं ll

 

खामोशियों को तोड़कर जी हल्का करने के लिए l

साथी बनकर अपनी अपनी दुख दर्द पीड़ा हरते हैं ll

 

जिंदगी हर रोज नए रूप में सामने आती है और l

सुबह शाम रातदिन संग वक़्त की रफ्तार बहते हैं ll

 

हर लम्हा तन्हाई का तड़पता जाम पीते जा रहे हैं l

लम्बी तन्हाई में निगाहों से इंतजार के आँसूं  झरते हैं ll

१९-३-२०२५ 

 

अगर तुम साथ हो दुनिया जीत कर बताएंगे l

ख्वाबों और अरमानों पूरा करके दिखाएंगे ll

 

मेरी मंज़िल के सारे रास्ते में तुम साथ देना l

क़सम से जिंदगीभर मुकम्मल साथ निभाएंगे ll

 

एक दूसरे का दुःख दर्द अपना कर हसते हुए l

साथ कैसे दिया जाए जहाँवालों को सिखाएँगे ll

 

चाँद सितारों के रूबरू खुद से वादा किया है l

जीवन में तुम्हें जिताकर खुद को भी जिताएंगे ll  

 

नया सफर नई राहगुज़र पर बनके हमसाया l

एक एक साँस हरएक लम्हा साथ बिताएंगे ll

२०-३-२०२५ 

 

अगर तुम जो साथ हो l

हर रात चाँद रात हो ll

 

जीत का जश्न मनाने को l

हाथों में तेरा हाथ हो ll

 

दुनिया जब मिसाल दे l

लब पर हमारी बात हो ll

 

ख़ुदा से बस यही दुआ है l

हर जन्म में मुलाकात हो ll

 

फिझा से खुशियाँ छलके l

जन्नत सी क़ायनात हो ll

२०-३-२०२५ 

 

हर पल हर लम्हा रंग बदले जिन्दगी l

सुबह शाम बस यूहीं सरके जिन्दगी ll

 

कभी गम की धूप कभी खुशी की छांव l

कभी पतझड़ सी कभी पनपे जिन्दगी ll

 

धीरे धीरे माथे को प्यार से सहलाती l

महकती साँसों को तरसे जिन्दगी ll

 

भीड़भाड़ भरी दुनिया में किसीसे l

दो घड़ी बात करने तड़पे जिन्दगी ll

 

कभी रोती तो कभी खिलखिलाती l

माँ बाप की पनाह में सभले जिन्दगी ll

२१-३-२०२५ 

 

महफिलों में प्याले का सच ना जानो तो ही अच्छा हैं l

निगाहों से पीने वालों की बात मानो तो ही अच्छा हैं ll

 

लम्बे समय तक खामोशी और दूरी जरा भी नहीं बच्ची l

आज रूठे हुए को प्यार से मनालो तो ही अच्छा हैं ll

 

खुद की मुश्किलों का ढोल पीटने से कुछ ना मिलेगा l

दुख दर्द को सीने में ही समालो तो ही अच्छा हैं ll

२२-३-२०२५ 

 

मोहब्बत की है तो क्या मलाल थोड़ी हैं l

हाथों की महेंदी अभी लाल थोड़ी हैं ll

 

पर्दे के पीछे हुस्न वालों की बात कर l

निगाहों में हया का कमाल थोड़ी हैं ll

 

आज बेपर्दा निकला है हुस्न सरेआम l

इश्क़ की गलियों में धमाल थोड़ी हैं ll

 

नशीले जाम को छोड़कर महफिल में l

सौंदर्य का पान करना हलाल थोड़ी हैं ll

 

जमीं पर बिखरी पडी है खूबसूरती तो l

आसमाँ में इन्द्रधनुष जमाल थोड़ी हैं ll

२३-३-२०२५ 

 

जिंदगी की यात्रा का आनंद लेते रहना चाहिए l

दुःख को भी हसते मुस्कराते हुए पहना चाहिए ll

 

चाहते कुछ और है तों मिलता कुछ और ही है l

समय की रफ़्तार के साथ साथ बहना चाहिए ll

 

सदियाँ नहीं गुजारनी क़ायनात मे सफ़र करना है l

तो दिल में जो है वो सब खुदा से कहना चाहिए ll

 

जल्दी ही जाग जा नीद से ओ अपनेआप को l

मुसाफ़िर समझकर खामोशी से सहना चाहिए ll

 

अरमान, ख्वाबों और ख्वाइशों को कम करके l

जज्बातों के पंखों को समेट कर तहना चाहिए ll

२४-३-२०२५ 

 

जीवन यात्रा में हर रोज़ एक क़दम विकास की ओर होना चाहिए l

मंजिल की तलाश है तो तनतोड़ सख्त मेहनत को बोना चाहिए ll

 

सब मिलकर सहास करके विश्वास और मनोबल के साथ l

परिवर्तन और नये विचारो को प्रगति के लिए पिरोना चाहिए ll

 

जो चाहिए वो हासिल करके रहेगे और इसी अरमान से l

कामयाब होने की उम्मीदों को मजबूती से संजोना चाहिए ll

 

अँधेरे ठहराव से उजालों और प्रकाश की तरफ़ बढ़कर l

दिल में जज़्बातों का उमड़ता समंदर सा होना चाहिए ll

 

उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगे ही आगे बढ़े l

घना छायादार पेड़ बनाकर ठंडा शीतल सा कोना चाहिए ll

२५-३-२०२५ 

 

आज सपनें में चाँद की सैर कर आया l

अज़ीब सी क़ायनात को निहर आया ll

 

बड़े मिट्टी के टीले उबड़ खाबड़ रस्ते l

अनदेखा अजूबा देखकर सरक आया ll

 

न हवा, न नदियाँ, न झरने कोई भी वहां l

बिना पानी के समन्दर को तरस आया ll

 

कहने को ना साथ कोई साथी अकेला ही l

सुनसान ख़ामोश राहों पर गरज आया ll

 

न पंछी न जानवर न पढ़ाई की स्कुल l

घर के बाहर अकेलेपन से उबर आया ll

२६-३-२०२५ 

 

 

बीते लम्हों के बारे में सोचा तो बहुत रोया l

हुस्न के लिखित खत खोया तो बहुत रोया ll

 

एक झलक देख लेने की तमन्ना में उसके l

घर के आगे से जब गुज़रा तो बहुत रोया ll

 

एक अरसा हुए बक्से में रखी क़िताब में l

पुरानी तस्वीरों को देखा तो बहुत रोया ll

 

चाँदनी रात मे सितारों की रोशनी के संग l

छत पर अकेले ही सोया तो बहुत रोया ll

 

मिलना और ना मिलना नसीब का खेल l

तन्हाई में दिल ए दरिया तो बहुत रोया ll

२६-३-२०२५ 

 

 

 

जिंदगी में सुख और दुख का ट्रैफ़िक सिग्नल नहीं लगा होता l

कभी कभी इन्सान जीवन की बाज़ी हारकर सुधबुध है खोता ll

 

इन्सां को कर्म करने में सावधानी रखनी चाहिए हमेशा ही l

वैसा ही फल पाता है जैसा बीज वो है ताउम्र बोता ll

 

जो भी दिया है ख़ुदा ने सोच समझ कर दिया है बिना समझ l

सब कुछ होकर भी कमी के एहसास में उम्रभर सदा रोता ll

 

जानता है साँसों की छुकछुक कभी भी बंध पड़ सकती है l

जिन्दगीभर कुछ ना कुछ पाने की अनगिनत ख्वाइशों को संजोता ll

 

सालों के डिब्बे में विभाजित की है ये जीवन की गाड़ी तो l

बिना सिग्नल के सफ़र में क्यूँ उम्मीद ओ तमन्नाओं को पिरोता ll

२७-३-२०२५ 

 

जिंदगी की रेलगाड़ी बिना का सिग्नल के चलती हैं l

परिस्थितियों के आगे घुटने टेक आगे ही सरती हैं ll

 

दर्दों गम से भरी क़ायनात में सफ़र करते हुए l

जहां कभी खुशियाँ मिले थोड़ा सा ईंजन भरती हैं ll

 

कोई उम्रभर साथ नहीं चलता नाहीं ठहरता है l

आने-जाने वाले मुसाफ़िर के बदौलत पलती हैं ll

 

इन्तजार के पल बहुत ही मुश्किल भरे होते हैं तो l

मंज़िल तक पहुचा कर दूरियों को हरती हैं ll

 

ग़ज़ल मन की भावना को अंजाम देती हैं l

छंद, लय, ताल और शब्दों की खेती हैं ll

 

कभी प्यार को बढ़ाती है तो कभी कमी l

ह्दय में कई सारी तमन्नाएं समेटी हैं ll

 

निगाहों से बात, जुबान खामोश हो तब l

संवेदना ओ भाव से मुकम्मल हेती हैं ll

२८-३-२०२५ 

 

भावनाओं पर काबु रखना चाहिए l

इक़रार निगाहों से कहना चाहिए ll

 

 

 

 

 

 

हुस्न को दूर जाता देख जान निकल जाती हैं l

खामोशी से दिल की भावनाएँ मचल जाती हैं ll

 

प्यारी नजर को तरसते और तड़पता देखकर l

नजर में रहम-ओ-करम देख पिघल जाती हैं ll

 

दिन रात सुबह शाम यूहीं बीत जाते दर्द में l

जरा हंस दे तो भी किस्मत बदल जाती हैं ll

 

हालत पे रहम खाकर ख़ताएँ माफ़ करके l

रिमझिम बारिस की तरह बरस जाती हैं ll

 

रेज़ा रेज़ा ख़त्म हो रहा हैं साँसों का सफ़र l

इंतजार करते हुए उम्र यूहीं ढल जाती हैं ll

 

दर गूजर कर रहा है ख़ुदा सारी अदाएं कि l

मुफलिसी में ही जिन्दगी संभल जाती हैं ll

 

रफ़्ता रफ़्ता जहाँ से अलायदा हो रहे है ओ l

नये आयाम नये पिंजरे को तड़प जाती हैं ll

२९-३-२०२५ 

 

सोने के पिजरें के शोख में आसमान से भी गया l

आख़िर लगाव बढ़ा मुकम्मल उड़ान से भी गया ll

 

उम्रभर तमन्ना की फिझाओ में टहलने की और l

मुश्किल से हाथ में आया हुआ कमान से भी गया ll

 

दर्द मोहब्बत का बहुत ही हसीन होता है यारो l

किसी ओर को बचाने की ज़िद में जान से भी गया ll

३०-३-२०२५ 

 

नव वर्ष नया सवेरा नया आयाम लेकर आया हैं l

साथ अपने ताज़गी और ऊर्जा का स्त्रोत लाया हैं ll

 

ख्वाइशों पूरा करने के लिए वक्त मिलने पर ही l

दिल ने अजीब सा सुख का अनुभव पाया हैं ll

 

महा जागरण के युग में जाग्रत जीवन पाने को l

प्राणों में नव अरमान लिये सवर्ण साया हैं ll

 

पुलकित हो उठा है रोम रोम कलियों का ओ l

नव वर्ष के स्वागत का ढ़ंग दिल को भाया हैं ll

 

सपनें पूरे करने को एक नई भोर मिलने से l

हर्षो उल्लास में सभी ने हर्ष गान गाया हैं ll

३१-३-२०२५