मेरे अपने मेरे होने की निशानी मांगे l
मुझ में मेरी ही तस्वीर पुरानी मांगे ll
फ़िर से वो बाँकपन के दिन जीने को l
डायरी में बचपन की कहानी मांगे ll
नटखट,मजेदार औ मासूम से सभी l
बचपन के संगी साथी जवानी मांगे ll
कहां बिताएँ शाम कहां गुजाएँ रात l
जवानी के दिन रात कमाली मांगे ll
चार लम्हे खुशी से जीया हुआ देख l
मेरे दिनों का हिसाब समाजी मांगे ll
१-३-२०२५
प्रीत के बंधन की परछाइयाँ ताउम्र साथ चलती हैं l
रूठने मनाने की हरजाईयाँ ताउम्र साथ चलती हैं ll
ना जाने कैसे जुड़ जाते है दिलों के रिश्ते प्यार में l
इश्क़ की जुदाई में तन्हाइयाँ ताउम्र साथ चलती हैं ll
प्रीत की रीत है निराली के किसीने भी ना जानी l
मोहोब्बत की सच्चाइयाँ ताउम्र साथ चलती हैं ll
क्यों किसी अनजाने से बेपनाह इश्क़ हो जाता है तो l
वादे निभाने की अच्छाईयाँ ताउम्र साथ चलती हैं ll
मुलाकात का मज़ा ना बिगड़े इस लिए देरी होने की l
सच्ची बात पर सफाइयाँ ताउम्र साथ चलती हैं ll
२-२-२०२५
सूना आसमान रंगीन पंखीओ की राह देख रहा हैं l
बादलों की वज़ह से लम्बे सूनेपन का दर्द सहा हैं ll
लगता है अपनी ही मस्ती में दूर जाकर बस गये l
ना जाने किस कोने पर छुप गये है जाने कहा हैं ll
अकेलापन, तन्हाई और सन्नाटा हद से बढ़ा तब l
बारिस के दिनों में बारिस संग बूंद अश्क़ बहा हैं ll
सुबह से शाम दिन रात चाँद सूरज को देखता रहे l
चैन और सुकून वहा है खुद की दुनिया जहा हैं ll
लहराता समन्दर, शांत जंगल, खामोश नज़ारे संग l
एसी ही सर्द रातों में सर्द हवा से साथ तहा हैं ll
३-३-२०२५
सूना आसमान सो गया हैं l
रंगी खयालों में खो गया हैं ll
सुनहरा पँछी पैगाम लाकर l
मिलने की आश बो गया हैं ll
खूबसूरत हसीन ख्वाब देख l
खुशी से पगला हो गया हैं ll
मुहब्बत की क़ायनात में l
जहा दिल वहा वो गया हैं ll
सपनों से बाहिर आकर l
त्तनहाई सोच रो गया हैं ll
३-३-२०२५
भीगे अल्फाजों में किया है इज़हार बलम ने l
और साथ निभाने का वादा किया सनम ने ll
साजन ने हर्फ़ बहा दिये हैं हुस्न की तारीफ में l
भेजी है प्यारी खुशियों की सौगात सजन ने ll
बिना बारिस के भीग गये भीगे अहसास से l
मोहब्बत की साजिश देख बाँध लिया क़सम ने ll
मस्ती भरी आँखों ने लूटा है दिल का करार l
खामोशी से इक़रार किया दिल की तड़प ने ll
पूरी शिद्दत ओ ईमानदारी से टूटकर चाहा कि l
उम्रभर साथ निभाया है दिलबर के वचन ने ll
४-३-२०२५
तुम्हारी निगाहें तुम्हारी चाहत बयां करती हैं ।
हररोज सुबह शाम हिज्र में आहें भरती हैं ॥
तुम्हें देखने के बाद और कोइ काम नहीं ।
तुम्हारे ही ख्वाबों ओ खयालों में सरती हैं ॥
घूमता रहेता हूं तुम्हारे घर के आसपास ।
तुम्हें मिलने की आरजू दिन रात पलती हैं ॥
आंख बंध करते है तो सामने आ जाते हो ।
रात सितारों के संग इन्तजार में ढलती हैं ॥
तुम्हारी चाहत के रंगो में रंग गये है कि ।
सप्तरंगी चाहत उदासीयों को हरती हैं ॥
५-३-२०२५
तुम्हारी चाहत के नशे में जी रहे हैं l
आहिस्ता चाहत का जाम पी रहे हैं ll
मेरे हर अफसानों में नाम तुम्हारा l
ख्वाबों और ख्यालों में भी रहे हैं ll
जग ने कसर ना छोड़ी परेशा करने की l
मोहब्बत से चाक जिगर सी रहे हैं ll
एक बार अपने अंदर झाक कर देखो l
तुम्हारे मन वचन कर्म में ही रहे हैं ll
बड़ी मुश्किल से पाई है चाहत तो l
तुम्हारी चाहत खोने से बी रहे हैं ll
५-३-२०२५
खूबसूरत सपनों का संसार बसाने चला हूँ l
कायनात में रंगबिरंगी घर बसाने चला हूँ ll
उमंग और उत्साह से फ़ूलों से सजाकर में l
संग अपनों के खुशियों को मनाने चला हूँ ll
चारो ओर हसीन मुस्कान बिखेर के आज l
बहके बहके से अंदाज़ में बताने चला हूँ ll
मन की क़ायनात में उजियारा करने को l
सूरज, चाँद सितारों से सजाने चला हूँ ll
जिंदगी को रंगीन खुशगवार बनाकर दे l
इन्द्रधनुष रंग दीवारों पे लगाने चला हूँ ll
६-३-२०२५
नशीली सुनहरी यादों के सहारे जी रहे हैं l
शाम ढले संग तन्हाइयों के जाम पी रहे हैं ll
एक दिन लौटकर आएँगे इसी आरज़ू में l
जहां छोड़ गये थे वहीं के वहीं ही रहे हैं ll
दिल पर नसतर ओ जुबीन चला देगी l
मनचाही यादों को ताजा कर बी रहे हैं ll
दिन दहाड़े जागी आँखों में सपने देखते l
ख्वाबों और ख्यालों में आज भी रहे हैं ll
वो नटखट अल्लड सी प्यारी मीठी थी l
तन्हाई को सुनहरी यादों से सी रहे हैं ll
७-३-२०२५
बीती गलियाँ छोड़ आये हैं l
हसीन रास्तें मोड़ आये हैं ll
दिल को दर्द देने वाले सभी l
रिसते नाते तोड़ आये हैं ll
पुराने नये अपने पराये संगी l
सब को हाथ जोड़ आये हैं ll
कहीं आंसू रोक ना ले वापिस l
पीछे मूडे बिना दोड़ आये हैं ll
मन वचन और कर्म से आज l
बीती गलियाँ खोड़ आये हैं ll
८-३-२०२५
जाम छलकाती बीती गलियाँ याद आ रही हैं l
याद छलकाती बीती गलियाँ याद आ रही हैं ll
हाथों में हाथ डालकर घंटों तक घूमने थे वहीं l
साथ छलकाती बीती गलियाँ याद आ रही हैं ll
नीले आसमान में सितारोंवाली शीतल नशीली l
रात छलकाती बीती गलियाँ याद आ रही हैं ll
प्यारी मीठी बाते कानों में आज तक गूँजती है l
बात छलकाती बीती गलियाँ याद आ रही हैं ll
महफिल में हुस्न के सजदे में गीत गाये तही l
राग छलकाती बीती गलियाँ याद आ रही हैं ll
९-३-२०२५
मोहब्बत के अलावा रात और दिन कोई काम किया करो l
ख़ुद के अलावा किसी दूसरे लोगों के लिए भी जिया करो ll
जो काम करने दुनिया में आया है ईमानदारी से पूरा करके l
किसी भी रंजिश के बगैर बस अश्क़ों का जाम पिया करो ll
एक दिन सुहानी सुबह लेकर आएंगीं मनचाहा सन्देशा तो l
खुशी का मुखौटा पहन मुस्कराहट से दुःखों को सिया करो ll
दर्द देने वाले से तो दुनिया भरी पडी है नादां जान ले l
गर किसीका दर्द बाँट सके तो बाँट कर दुआ लिया करो ll
रात में दिन का बड़ी बेसब्री और हसरत से इंतज़ार करके l
मुकम्मल मंज़िल का अपने आप को दिलासा दिया करो ll
१०-३-२०२५
महफिल सदाबहार हुस्न को देखकर छलकती हैं l
बिना जाम को होंठों से लगाएं हुए ही बहकती हैं ll
मोहब्बत के सजदे में रोशनी से जगमगाती हुई l
चारो तरफ सजाए हुए फूलों से आज महकती हैं ll
नयी नयी कलियां सोला सिंगार करके देखो तो l
मधुर नशीली लय से लय मिलाकर लरजती हैं ll
सदाबहार जश्न मनाया जा रहा है आओ झूमे की l
बारहा निगाहों से प्यार भरी मय बरसती हैं ll
राग और रागिनी बज रही साज ओ आवाज़ में l
धीरे धीरे चाँद सितारों से सजी रात सरकती हैं ll
११-३-२०२५
पद्मिनीयों ने जौहर ज्वाला को गले से लगा दिया l
तन मन बचन से मुकम्मल बलिदान अपना किया ll
आत्हत्या को किस्मत का विधान समझकर यूहीं l
जौहर का ज़हर का ख़ामोशी से मुस्कराकर पिया ll
खुद अगन ज्वाला में कूदकर उजाला कर दिया l
नया इक इतिहास रचाने के लिए अब तक जिया ll
पल भर भी अपने इरादों से हिले बिना ही वो l
खुद की बलि देकर राक्षसों के अहंकार को सिया ll
जय बोलो इस महान बलिदानीयों के लिए सब l
आत्म सम्मान औ स्वाभिमान को ये क़दम लिया ll
१२-३-२०२५
रंगों का त्योहार खुशियों की सौगात लेकर आया हैं l
साथ सजना के आने का सन्देशा लाया हैं लाया हैं l
नीले पीले लाल रंगों की बौछार हरकही हो रही तो l
प्रीतम प्यार के रंग से मतलब जिन्दगी का पाया हैं ll
स्नेह और उल्लास ने जीवन को प्रफुल्लित कर दिया l
छोटे बड़ी सभी के दिलों में मस्ती का शमा छाया हैं ll
फिझाओ में छलकता अबील गुलाल का ख़ुमार दिखे l
होली के त्योहार में संग मृदंग के मधुर गीत गाया हैं ll
मस्ती और उमंगों की चारो ओर बज रही है सहनाई l
भाँग और ठंडाई के जाम का नशीला नशा भाया हैं ll
१३-३-२०२५
आज होली है सब मिलकर रंगों का त्योहार मनाओ l
हर गली और हर चौराहे पर आशा के दीपक जलाओ ll
पिचकारी से फिझाओ में अबील गुलाल को छंटको l
नीले पीले गुलाबी रंगबेरंगी रंगों से तन मन सजाओ ll
भर के पिचकारी अंग अंग भीगोकर प्यार बरसाके l
इन्द्रधनुष के रंगों से चहेरा खूबसूरत रंगीन बनाओ ll
नशीली फ़िझाएँ , बहकती बांहें, रूनझुन सा साज l
पलाश से घर आँगन में महकती रंगोली रचाओ ll
हुस्न पर गुलाल लगाएँ, पिचकारी से रंग उड़ाएँ l
खेलो कूदो खुशियाँ मनाओ प्यार की सरिता बहाओ ll
चोर गिरधारी लावे पिचकारी हँस-हँसकर किलकारी।
गोप गोपियाँ और राधा रानी कान्हा को बुलाओ ll
१४-३-२०२५
खूबसूरत छाई बहार होली में l
पिचकारी लाई ख़ुमार होली में ll
हँस-हँसकर किलकारी करती l
मस्ती करे दिलदार होली में ll
गलियों में बज रहे ढोल-मृदंग l
उमड़े दिलों में प्यार होली में ll
चाँद और सूरज की गति से ज़ीवन विकसित हो रहा हैं l
समस्त कायनात के जिवो में वह जिंदगी को बो रहा हैं ll
ज़ीवन को फूलने फलने के वास्ते सदियों से बिना रूके l
अपने किरणों की बरसात से समग्र सृष्टि को भीगो रहा हैं ll
युग युगांतर से अपनी ही कक्षा में घूमता रहकर l
मानव कल्याण के कार्य को युगों से करता जो रहा हैं ll
बिना रुकावट के बिना अपेक्षा के कर्म ही करता हैं l
वह ख़ुद जागता रहता है यूहीं इन्सान जब सो रहा हैं ll
चांद और सूरज की वजह से ही पनपती है जिन्दगी l
मानव जीवन का सबसे बड़ा उत्पादक भी रहा हैं ll
१५-३-२०२५