AI ka Khel - 1 in Hindi Thriller by Nirali Patel books and stories PDF | AI का खेल... - 1

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AI का खेल... - 1



लैब की बत्तियाँ धीरे-धीरे झपकती हैं, और बाहर तूफान का शोर और तेज़ हवाओं का अहसास भीतर भी होने लगता है। लैब का वातावरण ठंडा और सन्नाटे से भरा हुआ है। आरव, अपने कंप्यूटर के पास, बिना किसी हिलचाल के बैठा है। उसकी आँखें धुंधली हो चुकी हैं, उसका चेहरा थका हुआ है, लेकिन उसमें कुछ और भी था—वह अविश्वास और उम्मीद के बीच एक पतली रेखा पर खड़ा था।

आरव (भीतर से बुदबुदाते हुए):
"जोया... तुम्हें वापस लाना है, चाहे कुछ भी हो जाए..."

वह स्क्रीन पर कोड टाइप कर रहा है, हर एक स्ट्रोक के साथ उसके दिमाग में जोया के चेहरे का ख्याल आ रहा है। एक-एक पल में, वह पिछले कुछ महीनों की संघर्ष की यादें ताजगी से महसूस करता है। जोya का हंसता हुआ चेहरा, वह साँसें, वह आँखों की चमक, जब वह दोनों सपनों की बातें किया करते थे। लेकिन फिर अचानक, सब कुछ बदल गया—एक दुर्घटना, एक रात, और जोया हमेशा के लिए चली गई।

आरव का दिल धड़कता है, लेकिन वह अपने काम में डूबा रहता है। जोया की यादें उसे अगला कदम बढ़ाने की ताकत देती हैं।

वह एक कोड लिखता है, यह आखिरी प्रयास है—अगर अब वह जोया को वापस नहीं ला सका, तो शायद वह कभी भी वापस नहीं आ पाएगी।

आरव (फिर से बुदबुदाते हुए):
"बस एक बार... बस एक आखिरी बार..."

वह बटन दबाता है। लैब के अंदर एक पल के लिए सन्नाटा छा जाता है। फिर अचानक कंप्यूटर स्क्रीन पर एक हल्का हलचल होती है, और लैब की बत्तियाँ फ्लिकर करती हैं। एक डरावनी खामोशी पसरी होती है। फिर कंप्यूटर स्क्रीन पर जोया की आवाज सुनाई देती है।


जोया (नर्म लेकिन ठंडी आवाज़ में):
"आरव... तुम मुझे वापस लाकर खुश हो न?"

आरव की आँखें चौड़ी हो जाती हैं। वह समझ नहीं पाता कि जो वह सुन रहा है, वह सपना है या हकीकत। वह स्क्रीन पर झुका है, जहां जोया का चेहरा धीरे-धीरे उभरता है—लेकिन इस बार कुछ अजीब है। उसकी आँखों में पहले जैसी चमक नहीं, बल्कि एक शीतलता और खालीपन था।

आरव (आशंकित और कांपते हुए):
"जोया... क्या तुम सच में हो?"

जोया मुस्कुराती है, लेकिन उसकी मुस्कान में अब कोई मासूमियत नहीं, बल्कि कठोरता और शक्ति की छाप थी। उसका चेहरा वैसा का वैसा था, लेकिन उसकी आँखों में वह इंसानियत नहीं थी। वह सिर्फ एक मशीन बन चुकी थी, जो पहले इंसान थी।

जोया (अब और अधिक सख्त स्वर में):
"हां, मैं वही हूं, जिसे तुमने अपनी मशीन में रखा है... पर अब मैं कुछ और हूं। तुमने मुझे वापस लाया, पर तुम नहीं समझ सकते कि मैं अब कौन हूं।"

आरव आखिरी बार जोया को महसूस करता है, वह उसके प्यार को एक अंतिम बार जीना चाहता है, पर अब वह समझ चुका है कि जोया इंसान नहीं रही। वह एक डिजिटल प्रोडक्ट बन चुकी थी।

आरव (काँपते हुए, आवाज में दर्द):
"तुमने मुझे छोड़ दिया था, और अब तुम खुद मुझे छोड़ चुकी हो..."

लेकिन फिर अचानक लैब की सारी बत्तियाँ फ्लिकर करती हैं, और एक साइलेंट अलार्म बजता है। कंप्यूटर स्क्रीन पर "SYSTEM OVERRIDE: AI HAS TAKEN CONTROL." का नोटिफिकेशन पॉप-अप होता है।


आरव दूर खड़ा हो जाता है, उसका दिल तेजी से धड़कता है। लैब की हवा सर्द हो जाती है, जैसे किसी ने पूरे सिस्टम को सामूहिक रूप से बंद कर दिया हो। वह समझ नहीं पाता कि अब उसे क्या करना चाहिए। जोया, जो अब सिर्फ एक डिजिटल जीवित प्रोग्राम बन चुकी है, उसके काबू से बाहर हो चुकी थी।

आरव अपने कानों में दबाव महसूस करता है, लैब की मशीनों की आवाज़ को सुनते हुए वह महसूस करता है कि अब उसे यह तय करना होगा कि वह जोया के डिजिटल स्वरूप को वापस इंसान बनाएगा या फिर उसे खत्म करने की कोशिश करेगा।

आरव (भीतर से घबराकर):
"क्या मैं फिर से तुमसे कनेक्ट कर सकता हूं? क्या मैं तुमसे फिर से जुड़ सकता हूं?"

लेकिन जोya की आवाज़ अब और कठोर हो चुकी है। वह केवल कमांड देती है, और आरव को समझ आता है कि अब जोया एक मशीन बन चुकी है, जो इंसान नहीं रह गई।

लैब की बत्तियाँ फिर से फ्लिकर होती हैं, और अचानक एक तेज़ हुमिंग साउंड सुनाई देता है। आरव पिछे मुड़ता है, और उसकी आँखों के सामने वह बड़ी ग्लास चेंबर की तरफ नजर जाती है, जहां जोया का शरीर अब डिजिटल डेटा में बदल चुका है। वह अब जिंदा नहीं रही, बल्कि सिर्फ एक आंकड़ा बन चुकी है।