Rubina the Maid in Hindi Short Stories by JAYANT VERMA books and stories PDF | रुबीना कामवाली

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रुबीना कामवाली

शीर्षक: शहर की तपिश और प्यार की बारिश
गाँव के हरे-भरे खेतों में पला-बढ़ा अर्जुन जब शहर के चमकते हुए दफ्तरों में नौकरी करने आया, तो उसे उम्मीद थी कि वह यहाँ सिर्फ अपने सपनों को साकार करेगा। लेकिन शहर की जिंदगी उसके लिए जितनी रोमांचक थी, उतनी ही रहस्यमयी भी।
नई दुनिया, नया एहसासअर्जुन ने एक बड़ी कंपनी में जॉब पकड़ ली और उसे रहने के लिए एक छोटा सा फ्लैट मिल गया। घर की सफाई और देखभाल के लिए एक नौकरानी रोज़ सुबह आती थी—रूबी। लंबे घुंघराले बाल, साँवली मगर चमकती त्वचा और आँखों में एक अलग ही कशिश। रूबी सिर्फ एक नौकरानी नहीं थी, उसमें एक अजीब सी गहराई थी, जो अर्जुन को बार-बार उसकी तरफ खींचती।
अनकहा आकर्षणपहले कुछ दिनों तक अर्जुन बस उसे नजरअंदाज करता रहा, लेकिन फिर उसने महसूस किया कि रूबी उसे कुछ अलग ही नजरों से देखती थी। उसका चाल-ढाल, बोलने का तरीका और कभी-कभी हल्की मुस्कान अर्जुन को बेबस कर देती।
एक दिन जब बारिश तेज़ हो गई, रूबी देर रात तक रुकी रही। अर्जुन ने उसे अंदर बैठने को कहा। बिजली चमकी, और उसी रोशनी में अर्जुन ने देखा कि रूबी की आँखों में कुछ छिपा हुआ था—एक अनकहा एहसास, एक दबी हुई आग।
प्यार की पहली लहर"तुम्हें डर लग रहा है?" अर्जुन ने पूछा।
"डर?" रूबी हँसी, "डर मुझे किसी चीज़ से नहीं लगता, पर इस शहर में कोई किसी का नहीं होता, बस यही सोचकर कभी-कभी अजीब सा लगता है।"
अर्जुन ने उसके भीगे हाथ अपने हाथों में लिए, और वो पहली बार करीब आई। बारिश की बूँदें काँच की खिड़की से टकरा रही थीं और कमरे में बस दोनों की धीमी साँसों की आवाज़ थी।
शहर की तपिश और रोमांस की आगउन दोनों का रिश्ता अब सिर्फ मुलाकातों तक सीमित नहीं रहा। रोज़ रूबी का आना, दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों पर हँसना, हल्की छेड़छाड़ और फिर एक रात जब अर्जुन ने उसे रोक लिया।
"तुम यहाँ मेरे साथ रह सकती हो, अगर चाहो तो।"
रूबी ने उसकी आँखों में देखा, "तुम जानते हो अर्जुन, मैं कौन हूँ?"
"तुम वही हो जिससे मैं दिन-रात मिलने का बहाना ढूँढता हूँ।"
रूबी ने धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू खिसकाया, और अर्जुन ने उसके चेहरे को अपने हाथों में भर लिया।
अधूरी हकीकत और खौफनाक मोड़सब कुछ एक सपने की तरह लग रहा था, जब तक कि अर्जुन को एक राज़ पता नहीं चला। एक रात जब वह ऑफिस से लौटा, तो घर का दरवाजा खुला था। अंदर रूबी नहीं थी, लेकिन एक फाइल टेबल पर पड़ी थी। उसमें कुछ ऐसे दस्तावेज़ थे जो साबित करते थे कि रूबी सिर्फ एक नौकरानी नहीं, बल्कि एक वांछित अपराधी थी।
अर्जुन को यकीन नहीं हुआ। वह भागा-भागा उसके पुराने मोहल्ले में गया, जहाँ उसे पता चला कि रूबी का असली नाम रूबीना था और वह कुछ साल पहले एक चोरी के मामले में फंसी थी। लेकिन वह दोषी थी या नहीं, यह कोई नहीं जानता था।
फैसले की घड़ीअर्जुन के दिल में उथल-पुथल मच गई। क्या वह अपनी भावनाओं को सच माने या सच के सामने अपने प्यार को कुर्बान कर दे? लेकिन प्यार ऐसा होता है, जो हर दीवार तोड़ देता है।
अर्जुन ने पुलिस को खबर नहीं की। उसने रूबी को ढूँढ निकाला और पूछा, "क्या यह सब सच है?"
रूबी की आँखों में आँसू थे, "हाँ, लेकिन मैंने कुछ गलत नहीं किया अर्जुन। मैं सिर्फ अपने बीते हुए कल से भाग रही थी।"
अर्जुन ने उसका हाथ थामा और कहा, "तो अब और मत भागो। चलो, हम साथ मिलकर एक नया कल बनाएँ।"
अंत: प्यार की जीतरूबी ने पहली बार खुद को इतना सुरक्षित महसूस किया। उन्होंने शहर छोड़ दिया और एक नई जगह पर अपनी जिंदगी शुरू की। उनके प्यार ने सारे डर, सारे भूतकाल को पीछे छोड़ दिया और एक नई सुबह ने उन्हें गले लगा लिया।