अग्निहोत्री हाउस
"जहां तक हमें पता है पहली रसोई घर की बहु घर के लोगों केलिए ही बनाती है। बाकी सबका तो सही है लेकिन तुम कौन हो जो हम तुम्हारे लिए मीठा बनाएं??" तपस्या जानवी के सामने ही हाथ बांध कर खड़ी हो गई।
"मैं कौन हूं ये तो तुम्हें तुम्हारा हस्बैंड ही बेहतर बता सकता है या फिर बता चुका है और अगर फिर भी तुम ना समझ जैसे बिहेव करोगी तो ....जानवी कहते हुए उसके सामने आकर खड़ी हो गई। तपस्या ने एक जलती नजर विराट पर डाला था जो विराट ने जानते हुए भी इग्नोर किया। विराट को खामोश देख तपस्या और भी आग बबूला हो गई थी।
"सौतन सहेली बस फिल्मों में या टीवी सीरियल्स में होती है , असल जिंदगी में ऐसी कोई ख्वाब बिल्कुल भी मत पालना के हम विराट को तुम्हारे साथ शेयर करने वाले हैं सिर्फ इस लिए क्यों के तुमने कभी उनकी जान बचाई थी...वरना पहली रसोई की पकवान में जहर मिलाकर तुम्हें खिला देंगे हम... फिर तुम्हारा किस्सा ही खत्म हो जाएगा और इस घर से और विराट की जिंदगी से तुम्हारा हिस्सा भी खत्म हो जाएगा।".. तपस्या फुल एटीट्यूड के साथ स्माइल करते हुए बोली।
जानवी गुस्से से उसे घूरते हुए कुछ बोलने को हुई तभी सर्वेंट हाथों में फोन लिए तपस्या के पास आया...."नई दुल्हन आपका फोन कब से बज रहा है शायद आपकी मां का फोन है ।"....सर्वेंट फोन तपस्या की तरफ बढ़ते हुए बोला । ये सुनकर तपस्या एकदम से चहक उठी और सर्वेंट के हाथ से फोन छीन कर फोन उठा कर स्पीकर पर डाल दिया ।
"हम्ममम बोलिए मां!!!" तपस्या खुश होते हुए बोली।
"एक रात बीता नहीं और आप अपनी मां को ही भूल गई कब से फोन किए जा रहे हैं हम इतना क्या बिजी हो गई एक ही दिन में की मां का फोन तक नहीं उठा पाई??"... दूसरी तरफ से चित्रा जी नाराजगी जताते हुए बोली।
"अरे नहीं मां हम तो बस सबके साथ बात कर रहे थे और फोन कहीं और ही था वरना हम आप सबको कैसे भूल सकते हैं ??"....तपस्या जानवी को घूरते हुए ही बोली।
"हम विराट से तो मिल ही लिए थे लेकिन आपके ससुराल में किसी और से मुलाकात ही नहीं हो पाई है अगर आपकी सांस है वहां पर तो उन्हें फोन दीजिए हम उनसे बात कर लेते हैं और पग फेरे के रस्म के लिए आपको घर घर लाने की इजाजत भी चाहिए.... आप के दादू ने कहा है अगर उनकी इजाजत हो तो अभय आपको लेने जाएंगे।"
चित्रा जी की बात सुनकर तपस्या खुश होते हुए उम्मीद भरी नजरों से अनुपमा जी को देखने लगी तो अनुपम जी जो स्पीकर पर चित्रा जी की सारी बातें सुन चुकी थी अपनी पलकें झटका कर मुस्कुरा दी और अपनी सहमति देने ही वाली थी कि विराट आगे बढ़कर फोन तपस्या के हाथ से छीन लिया था।
"नमस्ते mrs रायचंद आपकी बेटी की आवाज आप ने सुन ली है तो तसल्ली भी हो गई होगी कि वो खुश है यहां पर एंड डोंट वरी वो खुश ही रहेगी और आई एम सॉरी के वो आज पग फेरे की रस्म के लिए आपके घर नहीं जा पाएंगी क्योंकि जिस तरह से हमारी शादी हुई है मेरी मां की सारे अरमान जो अपने बड़े बेटे की शादी को लेकर थे वो तो बस अरमान ही बनकर रह गए हैं तो कम से कम अपनी बहू को लेकर जो कुछ उनके अरमान है उन्हें निभा लेने दीजिए । तपस्या यहां पर थोड़ी सेटल हो जाए यहां पर सबके साथ थोड़ी घुल मिल जाए फिर आप के तरफ के बाकी के रस्म आराम से कर लेंगे और डोंट वरी मैं खुद उन्हें रायचंद हाउस छोड आऊंगा।"....विराट सपाट और सर्द अंदाज में बोला और बिना दूसरी तरफ से चित्रा जी की बात सुन फोन काट चुका था । सबके साथ-साथ तपस्या भी उसके अजीब बिहेवियर को देख रही थी विराट ने फोन काटा और तपस्या की तरफ उसका फोन बढ़ा दिया।
"क्यों आपने पग फेरे की रस्म के लिए मां को मना किया??हम कहां हमेशा के लिए जाने वाले थे विराट!! सुबह जाते और शाम को वापस आ जाते। मां को कितना बुरा लगा होगा ।"...तपस्या नाराजगी से भरी रुआंसी आवाज में बोली ।
"मैने मना कहां किया है प्रिंसेस बस आज जाने के लिए मना किया है ।अभी अभी तो आपने कहा कि आपको यहां पर मां के साथ सारे रस्में निभानी है तो निभाइए अपने घर की रस्म बाद में निभा लीजिएगा।"... विराट सर्द आवाज में बोला और पलट कर जाने लगा ।
"क्या इसका मतलब हम ये समझें कि हमें हमारे घर जाने के लिए भी आपकी परमिशन की जरूरत पड़ेगी???".... तपस्या उसे बिना रोके ही ठंडे अंदाज में बोली ।
"नहीं बिल्कुल नहीं आपको कुछ भी करने के लिए मेरी परमिशन की कोई जरूरत नहीं है आप जो चाहे कर सकते हैं लेकिन मेरी एक बुरी आदत है जो चीज मेरे हिसाब से या मेरी मर्जी से नहीं होती उसे मैं होने ही नहीं देता। "...विराट पलट कर तपस्या की तरफ बढ़ते हुए शांत अंदाज में बोला ।लेकिन उसके चेहरे पर बिल्कुल वैसे ही शांति थी जैसे तूफान से पहले चारों तरफ शांति होती है।
"तो आप हमें धमकी दे रहे हैं ??"तपस्या अब गुस्से से बोली ।विराट एकदम उसके सामने आकर खड़ा हो गया ।
"बिल्कुल नहीं प्रिंसेस आपको कैसे धमकी दे सकता हूं मैं!!! मैं तो बस आपको ये समझा रहा हूं के आप कोई भी एक्शन लेने से पहले उसके रिएक्शन के बारे में एक बार सोच लीजिए ।"....विराट धीमी और शांत आवाज में बोला और तपस्या के चेहरे पर बिखरे बालों को अपनी उंगलियों से कान के पीछे किया । तपस्या भरी हुई पलकों से विराट के चेहरे और आंखों को ही देख रही थी। उन शांत आंखों में जो तूफान थे वो तपस्या को साफ दिख रहे थे ।लेकिन क्यों वो समझ नहीं पा रही थी।
"नई नवेली दुल्हन है आप प्रिंसेस और आंखों में इतनी सारी आंसू बिल्कुल भी जच नहीं रहा है। आपकी दादू को पता चलेगा तो वो वापस से आपकी वजह से मेरी बर्बादी की दास्तान ना लिख ले ।"... अजीब सी मुस्कान के साथ कहते हुए विराट ने उसकी आंखों से आंसुओं को अपने उंगलियों से साफ किया । तपस्या की आंखों में आंसू देख उसके कांपती उंगलियों से उसके दिल का दर्द साफ छलक रहा था जिसे वो पूरी तरह से जप्त करने की कोशिश कर रहा था।
"Mrs तपस्या विराट अग्निहोत्री अब से यही आपकी पहचान है प्रिंसेस ....तपस्या रायचंद को तो आपने कल ही अपने घर छोड़ आई है.... तो फिलहाल वहीं बन कर रहिए और बाकी रही आपके पग फेरे की रस्म तो वो उसी दिन होगी जिस दिन मैंने तय किया है।"... दोनों हाथों से तपस्या के चेहरे को भरकर विराट उसके माथे को चूम लिया। तपस्या ने अपनी आंखें कसकर बंद कर ली।
"शाम को जल्दी आ जाऊंगा और अपनी नाराज प्रिंसेस को मना भी लूंगा ।तब तक बस मुझे याद करते रहिएगा।" विराट मुस्कुरा कर बोला और पलट कर श्लोक की तरफ बहार आने का इशारा कर खुद वहां से चला गया। तपस्या वही हॉल में खड़ी तब तक विराट को जाते देखती रही जब तक विराट पूरी तरह से उसकी आंखों से ओझल ना हो गया ।उसकी नजर तंज से मुस्कुराती जानवी पर पड़ी जो तब से उसे ही देखे जा रही थी।
"हमें बताइए मां हमें कौन-कौन सी रस्म करनी है हम कर लेंगे ।"जानवी को पूरी तरह से इग्नोर करते हुए तपस्या अनुपम जी की तरफ देखकर बोली।
"एक फेरीटेल लव स्टोरी यही सोचा होगा ना तुमने अपनी और विराट की इस प्रेम कहानी को??? अचानक से तुम लंदन से इंडिया आई और अचानक से विराट से टकराई फिर तुम्हें उससे प्यार हो गया और वो भी तुम्हें दीवानों की तरह चाहने लगा और फिर तुम दोनों की शादी हो गई और कहानी का हैप्पी एंडिंग हो गया"..... कहते हुए जानवी हंसने लगी।
"जानवी मुझे लगता है कि तुम्हें भी यहां से जाना चाहिए तुम्हारे ऑफिस का वक्त हो रहा होगा।"... अनुपम जी थोड़ी सख्त अंदाज में जानवी से बोली।जानवी को कोई फर्क ही नहीं पड़ा।
"अभी-अभी तुमने क्या कहा था मुझ से!!!यही ना की सौतन बनी सहेली सिर्फ फिल्मों में या सीरियल में होती है तो फ़ेरिटेल भी सिर्फ किताबों में होती है तपस्या रायचंद और तुम्हारी ये प्रेम कहानी फेयरी टेल तो बिल्कुल भी नहीं है.... एक वेल विशर की नाते बस इतनी ही एडवाइस करूंगी की जितनी जल्दी सपनों की दुनिया से हकीकत में आ जाओ तुम्हें उतना कम दर्द होगा।"... कहते हुए जानवी तंज से मुस्कुरा कर पलट कर जाने लगी।
"Mrs तपस्या विराट अग्निहोत्री अभी अभी विराट ने तुम्हारे ही सामने मेरी यही पहचान बताई है ना !!हमें लगता है कि शायद तुम्हें भूलने की बीमारी हो गई है जानवी !!तपस्या रायचंद हम कल तक थे आज तो हम mrs तपस्या विराट अग्निहोत्री है और जिंदगी भर रहेगी तो सपनों की दुनिया से मैं नहीं तुम बाहर आ जाओ यही तुम्हारे लिए बेहतर है। विराट की और हमारी लव स्टोरी फेयरी टेल है या नहीं वो हमें नहीं पता लेकिन ये लव स्टोरी विराट की और हमारी ही है और किसी तीसरे का यहां पर कोई काम नहीं है ना ही हम किसी तीसरे को हमारी लव स्टोरी में घुसने देंगे।"... सर्द और सपाट अंदाज में बोलकर तपस्या किचन की तरफ चली गई ।जानवी गुस्से से हाथों की मुठिया कस ते हुए तपस्या की जाते रस्ते को घूर ती रही। अनुप मा जी जो वही खड़ी तपस्या की बातें सुन रही थी अचानक ही चेहरे पर एक सुकून सी मुस्कान लिए जानवी की तरफ आई।
"आई होप तुम्हें तुम्हारा जवाब मिल ही गया होगा जानवी विराट तुम्हारा अच्छा दोस्त है और उसके दिल में तुम्हारे लिए खास जगह है अपनी हरकतों से तुम बस उस खास जगह को ही नहीं बल्कि उसकी नजरों से भी गिरती जा रही हो। विराट और तपस्या दो अलग-अलग शख्स नहीं है बल्कि एक है तो तुम चाह कर भी उन्हें अलग नहीं कर पाओगी ।जितनी जल्दी ये बात तुम समझ जाओ तुम्हारे लिए ही अच्छा है।" अनुपम जी उसे समझाते हुए बोली और तपस्या के पास चली गई।.......................................
अग्निहोत्री इंडस्ट्रीज
"सर वो मिस्टर अभय रायचंद आपका वेट कर रहे हैं।".... जानवी और श्लोक के साथ बात करते हुए विराट ऑफिस के अंदर घुसा ही था की रिसेप्शनिस्ट ने उसे रोकते हुए कहा।
"अभय रायचंद यहां और इस वक्त !!"..विराट अपनी घड़ी की तरफ देखते हुए बोला जिसमें इस वक्त दुपहर के 12:30 बज रहे थे।
"ओहो भाई!!!अभी आप रायचंद खानदान के दामाद है तो आपकी खातिरदारी करने आए होंगे!! क्यों छिपकली???" श्लोक जानवी के तरफ देख मजाक के अंदाज में बोला तो जानवी तो उसे जला देने वाली नजरों से घूर ही रही थी साथ ही साथ विराट की तपती नजर भी उसे अंदर तक महसूस होने लगी।
"सॉरी भाई मैं तो ऐसे ही मजाक कर रहा था।" श्लोक थूक गटक ते हुए बोला और लिफ्ट ऑन कर उसके अंदर घुश गया।
लिफ्ट विराट के केबिन के फ्लोर पर रुकी तो विराट सीधे अपने केबिन की तरफ बढ़ा ।श्लोक उस से किसी प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए साथ-साथ ही जा रहा था और जानवी अपने केबिन की तरफ जाने लगी।
"तू मेरे साथ ही चल रही है मेरे केबिन में... कुछ बात करनी है तुझ से।"...विराट अपने फोन की तरफ देखते हुए ही जानवी से बोला।
"तू पहले अपनी फैमिली मीटिंग खत्म कर ले अपने साले साहब से मिल ले फिर मैं तो हमेशा ही फ्री रहती हूं तेरे लिए।"... जानवी आराम से बोली।
"मेरी फैमिली मीटिंग के बारे में सोचने की तुझे जरूरत नहीं है ...बोला ना के साथ चल।".... विराट अपने फोन ऑफ कर पैकेट में रखते हुए जानवी की कलाई खींच अपनी तरफ कर लिया और उसके कमर पर हाथ डाल उसे खुद से सटा ते हुए अपने केबिन के अंदर घुसा । जहां अभय पहले से ही बैठा उसका इंतजार कर रहा था। विराट की इस अचानक किए गए हरकत से जहां जानवी को एक शॉकिंग खुशी मिली वहीं साथ ही साथ श्लोक को और अभय को एक शॉकिंग धक्का।
"अरे मिस्टर अभय रायचंद आई एम शॉक्ड टू सी यू हेयर!!! आज आप हमारे छोटे से ऑफिस में कैसे???"... विराट अभय को देख मजाकिया अंदाज में बोला और जानवी के खुले कमर पर अपने हाथ डालते हुए ही केबिन के अंदर अपने चेयर की तरफ बढ़ा।
" शॉक्ड तो आपने हमें कर दिया है मिस्टर विराट !! कल रात को ही आपने हमारी बहन से शादी की और आज सुबह-सुबह ही उन पर इतना कब्जा जमा लिया कि उन्हें अपने ही घर आने की इजाजत नहीं मिली तो हमने सोचा कि शायद आप हमारी बहन के साथ कुछ खास वक्त बिताना चाहते हैं लेकिन यहां तो आप अपनी किसी खास के साथ.....
दांत पीसते हुए कहते कहते अभय अपने गुस्से को दबाकर रुक गया। और अभय की चेहरे पर ये गुस्सा देख विराट को अंदर से अजीब सी सुकून महसूस हुई। और उसी सुकून ओर एटीट्यूड के साथ वो अपने चेयर पर पैर पर पैर चढा कर बैठा अभय को मुस्कुराए देखने लगा।
"जान प्लीज मेरे लिए एक ब्लैक काफी और mr अभय केलिए एक कड़क चाय भेजो और हां लॉच पर मेरा वेट करना हम साथ करेंगे।".... अभय के ओर देखते हुए ही विराट ने जानवी से कहा।
"ओके बेबी"... जानवी ने प्यार से कहा और वहीं से ही विराट को फ्लाइंग किस दे कर बाहर चली गई। वो तो ऐसे ही मौके के इंतजार में बैठी रहती थी के विराट पर अपना हक जताए। हमेशा खुद को शांत रखनेवाले अभय के अंदर ज्वालामुखी उबल रही थी।
"आखिर ये लड़की है कौन जिसके कमर पर हाथ डाले अपने शादी के दूसरे दिन ही अपनी नई नवेली दुल्हन को छोड़ कर आप लंच करने जा रहे है??".. अभय अपने गुस्से भरे लहजे में फिर भी खुद को शांत रखते हुए पूछा। वो विराट और अपने बहन के रिश्ते की मान को बरकरार रखना चाहता था।
"आप का और dr प्रिया का इंगेजमेंट क्यों टूटा??"... विराट उसके बात को पूरी तरह इग्नोर कर किसी और दिशा में ही सवाल पूछा।
"व्हाट द हेल??? इस से आप को क्या मतलब?? ये हमारा पर्सनल मैटर है।"... अभय गुस्से से फुट पड़ा था। और अपनी चेयर से उठ खड़ा हुआ। विराट मुस्कुरा दिया।
"तो ये भी मेरा पर्सनल मैटर है और इससे भी आप का कोई लेना देना नहीं है।"... अभय बेपरवाह सा मुस्कुरा कर बोला।
"जिससे आप की शादी हुई वो बहन है मेरी। उसके साथ कोई भी धोखा और उसके आंखों में एक भी बूंद आसूं हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।".... अभय गुस्से से अपना आपा खोते हुए विराट के करीब बढ़ कर इसके कॉलर खींच कर चीख कर बोला । विराट के चेहरे पर कोई भाव नहीं उमड़े थे लेकिन आंखों में नफरत ओर गुस्से का सैलाब था। और आंखों में वही सैलाब लिए वो अभय को देख रहा था।
"कर्मा mr अभय रायचंद!!! कर्मा!! हो सकता है आप के वजह से भी किसी के बहन के आंखों में और किस्मत में जिंदगी भर केलिए आसूं लिख दिया गया हो और उसकी सजा अब आप की बहन को मिलने वाले हो!!"... विराट शांति से अभय के हाथों से अपना कॉलर छुड़ाते हुआ बोला।
विराट की बात सुन कर अभय के आंखों के आगे बस परी का ही चेहरा घूमने लगा। वो घबरा कर दो कदम पीछे हट गया। और घबरा कर गहरी गहरी सांस भरते हुए ही विराट के केबिन से बाहर निकल गया था। उसके जाते ही विराट के शांत चेहरे पर कई भाव आ कर गुजर गए। वो अपने पॉकेट से सिगरेट निकाल कर होठों के बीच दबाया और लाइटर लगा कर लंबी कस भरते हुए वही चेयर के हेड रेस्ट से केसिर टिका कर आंखे बंद कर चुका था। बंद पलकों में बस तपस्या का खिलखिलाता चेहरा ही था।
"पग फेरा!!!!! डोंट वरी प्रिंसेस! बहुत जल्द आपका पग फेरा होगा क्योंकि उस दिन का तो मुझे भी बेसब्री से इंतजार है के आप के पैर mrs विराट अग्निहोत्री बनकर आपके घर में पहली बार पड़ेंगे और रायचंद हाउस में पहला तूफान आएगा।".... बंद आंखों के साथ ही बेहद कड़वाहट के साथ वो बोला था।
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वहां दूसरी तरफ रायचंद हाउस में जब यशवर्धन रायचंद को ये मालूम हुआ कि विराट ने तपस्या को पग फेरे के लिए रायचंद हाउस भेजने से मना कर दिया उनके लिए यकीन करना नामुमकिन था। लेकिन जब यकीन हुआ तो वो गुस्से और फ्रस्ट्रेशन से भर चुके थे। उन्हें या उनके परिवार को कोई इनकार कर दे ये तो उनके सपनों के दायरे से ही बाहर था। ऊपर से वो वही विराट अग्निहोत्री था जो कल तक उन्हें अपना आइडल मानता था और उनके सामने इज्जत से सिर झुका लिया करता था ।
पहले सिद्धार्थ का वो वीडियो जिसमें उसने यशवर्धन रायचंद के बारे में अनावा सनाव बका था उसके बाद तपस्या का शादी टूटना फिर अब रातों-रात विराट का यूं बदले मिजाज !!उन्हें अपना रुतबा ढलता महसूस होने लगा था या फिर यूं कह सकते हैं कि वो खुद में ही इनसिक्योर महसूस करने लगे थे।
"नहीं नहीं नहीं!!!!यशवर्धन रायचंद हमेशा उगता सूरज था है और रहेगा जिसके सामने हर किसी को घुटने टेकने ही पड़ेंगे... जिसकी तपिश हर किसी को जलाने की ताकत रखती हो और ये तपिश कभी ठंडी नहीं पड़ सकती ....चाहे वो उसका परिवार हो या बाहर का कोई भी इंसान सभी को मेरे सामने हमेशा झुक कर ही रहना पड़ेगा ।"... वो बौखलाते हुए खुद से ही बड़बड़ाए और फोन उठाकर विराट को कॉल लगा दिया।
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विराट अपने केबिन के चेयर में आराम से टिक कर सिगरेट के कश भर रहा था और उसकी नजर अपने टेबल पर रखे फोन पर टिकी हुई थी जिसमें बार-बार यशवर्धन जी का कॉल आ रहा था।
"भाई!!यशवर्धन रायचंद का कॉल आ रहा है उठाएंगे नहीं??"... श्लोक जो सामने चेयर पर बैठे न जाने कब से विराट को ही देखे जा रहा था और उसके अगले आर्डर का वेट कर रहा था एक्साइटेड होकर बोल पड़ा।
"इतनी जल्दी भी क्या है श्लोक अभी तो उनकी बौखलाहट शुरू हुई है। अभी तो बस अपना रुतबा नाम और गुरुर को खो देने का डर ही आया होगा उनके दिलों दिमाग में ....जब सचमुच एक-एक करके उनकी सारी अकड़ टूटेगी मजा तो तब आएगा।"सिगरेट की लंबी कश भरकर हवाओं में धुआं छोड़ते हुए विराट एक डेविल स्माइल के साथ बोला।
"भाई लेकिन इन सब में भाभी की कोई गलती नहीं है। पहले उन्हें जानता नहीं था लेकिन इन कुछ दिनों में जितना उन्हें जाना है और कल से आज तक जितना उन्हें देखा है वो बहुत क्यूट और मासूम है उन्हें जब सारी सच्चाई पता चलेगी और आपके धोखे के बारे में वो जानेंगी तब वो बिल्कुल टूट जाएंगी।"... श्लोक थोड़ा अफसोस से बोला।
"12 साल पहले ऐसे ही बहुत से मासूम जिंदगियों किसी के गुरूर और नफरत के आगे बलि चढ़े थे कुछ नया नहीं है इस कहानी में श्लोक बस किरदार बदल गए हैं। तब मोहरा कोई और बना था आज कोई और बन रहा है। मासूमियत तब भी बलि चढ़ी थी और आज भी।.... अफसोस के लिए जगह नहीं है इस दिल में अब।"..... बिना किसी एक्सप्रेशन शांत आवाज में बोलकर विराट अपना कोट उठाए वहां से जाने लगा।
"अफसोस तो आपको हो रहा है भाई चाहे आप माने या ना माने ।जब-जब भाभी को दर्द होता है उसका एहसास आपकी आंखों में दिखती है।".... श्लोक धीमी आवाज में बोला था लेकिन विराट के कदम दरवाजे के पास ही रुक गए।
"जब दर्द और दवा एक बन जाते हैं ना श्लोक!! तब जिंदगी और मौत भी एक ही समान बन जाती है... तू नहीं समझेगा।"..... विराट की आवाज में एक ठहराव था और लफ्जों में थकावट।
कहानी आगे जारी है ❤️ ❤️