Saakshatkaar - 2 in Hindi Anything by Piyush Goel books and stories PDF | साक्षात्कार… - 2

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साक्षात्कार… - 2

1.अपने बारे में बताईए।
मैं माता रविकांता गोयल ब पिता डॉ देवेंद्र कुमार गोयल के यहाँ १०.०२.१९६७ को पैदा हुआ, एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूँ यांत्रिक अभियंता, दर्पण छवि लेखक, कार्टूनिस्ट, क्रिकेट अंपायर, दुनियाँ की पहली पुस्तक सुई से लिखने वाला और गणित के ३ पेपर इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल में प्रकाशित,पीयूष गोयल दर्पण छवि के लेखक,पीयूष गोयल 1७ पुस्तकें दर्पण छवि में लिख चुके हैं,सबसे पहली पुस्तक( ग्रन्थ) "श्री भगवद्गीता"के सभी 18 अध्याय 700 श्लोक हिंदी व् इंग्लिश दोनों भाषाओं में लिखा हैं इसके अलावा पीयूष ने हरिवंश राय बच्चन जी द्वारा लिखित पुस्तक "मधुशाला"को सुई से लिखा हैं ,और ये दुनिया की पहली पुस्तक हैं जो सुई से व् दर्पण छवि में लिखी गई हैं इसके बाद रबीन्द्रनाथ टैगोर जी की पुस्तक "गीतांजलि"( जिसके लिए रबीन्द्रनाथ टैगोर जी को सन 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था) को मेहंदी कोन से लिखा हैं. पीयूष ने विष्णु शर्मा जी की पुस्तक "पंचतंत्र"को कार्बन पेपर से लिखा .अटल जी की पुस्तक "मेरी इक्यावन कवितायेँ"को मैजिक शीट पर लकड़ी के पैन से लिखा और अपनी लिखित पुस्तक "पीयूष वाणी" को फैब्रिक कोन लाइनर से लिखा हैं सं 2003 से 2022 तक 17 पुस्तके लिख चुके हैं.
2. 17 पाण्डुलियाँ हाथ से लिखने का विचार कब आया? सन २००० में मेरा भयंकर एक्सीडेंट हो गया,पूरे शरीर में १० फ़्रैक्चर क़रीब ९ महीने के ईलाज के बाद मैं चलने लायक़ हुआ और सन २००३ में मुझे डिप्रेशन हो गया उसी दौरान मेरे एक मित्र ने मुझे श्रीमदभगवद्गीता दी मैंने प्रसाद समझ कर ग्रहण किया और जैसे ही मैंने पूरे १८ अध्याय,७०० श्लोक पढ़े सच में मेरा डिप्रेशन ख़त्म हो गया,अब चुकी मैं दर्पण छवि में लिखना जानता था मैंने दर्पण छवि में पूरी श्रीमदभगवद्गीता हिन्दी और इंगलिश में लिख दी,बहुत सारे अख़बारों में छपा,लोगो ने पूछा आपकी इस श्रीमदभगवद्गीता को कौन पढ़ेगा, लोग सीधी नहीं पढ़ते इस दर्पण छवि में लिखी श्रीमदभगवद्गीता को कौन पढ़ेगा, फिर मैंने जवाब दिया, वाल्मीकि जी ने मरा-मरा बोला राम-राम निकला उन्होंने संस्कृत भाषा में रामायण लिख दी मेरा पूरी दुनिया को संदेश हैं सीधी नहीं तो उल्टी पढ़ लो मेरी ज़िंदगी बदली हैं आपकी भी बदलनी चाहिए अब चुकी मैं यांत्रिक अभियंता हूँ नई -नई चीजें सोचना मेरी आदत हैं फिर मैंने सुई से पुस्तक लिखी क्योंकि लिखी वो दर्पण छवि में हैं पर उसको पढ़ने के लिये शीशे की ज़रूरत नहीं होगी, लोग पूछते गये पीयूष भाई इस बार क्या नया बस सिलसिला शुरू हो गया और नये-नये तरीक़े से ऊपर वाले के आशीर्वाद व पूरे परिवार के सहयोग से सन २००३ से लेकर २०२२ तक १७ पुस्तकें पूरी हो गई, इस के पीछे एक मोटिवेशन भी हैं जो मैंने बचपन में पढ़ी थी, कौएँ ने घड़े में कंकड़ डाल कर पानी पी लिया फिर मैं क्यों नहीं लिख सकता 3. पांडुलिपियाँ तैयार करने में किन चीजों का इस्तेमाल आपने किया? पाण्डुलिपियों को लिखने के लिए अलग-अलग प्रयोग किए गये हैं पेन से तो सभी लिखते हैं,सुई से पुस्तक लिखी,मेहंदी से पुस्तक लिखी,कार्बन पेपर से पुस्तक लिखी,फ़ैब्रिक कोन लाइनर से पुस्तक लिखी, फ्लूइड पेन से पुस्तक लिखी, मैजिक शीट पर लकड़ी के कलम से पुस्तक लिखी,गम एंड ग्लू से पुस्तक लिखी और अभी नये प्रयोग जारी हैं 4. अपनी साहित्यिक यात्रा के बारे में बताइये। मेरी साहित्यिक यात्रा बचपन से ही थी किसी चीज को देखकर या महसूस करके कविता लिखने का शौक़ था जो लिखा कम गया पर अच्छा लिखा बीच में अलग-अलग तरीक़े से पुस्तकें लिखी गई साथ ही साथ आजकल लघुकथा लिख रहा हूँ . 5.उन कठिनाइयों के बारे में बताइये जो आपको इस यात्रा में हुई।जी जब आप कोई नया काम करते हैं कठिनाइयोंका सामना करना पड़ता हैं मैंने भी किया कई बार मन ने कहा क्या काम कर रहा हैं पीयूष बंद करो फिर शुरू किया यानी दो तीन बार ऐसा हुआ अब चुकी मन में ये आया पीयूष भगवान की पुस्तक( श्रीमदभगवद्गीता) है बीच में नहीं छोड़ते पूरा तो करना ही हैं फिर भगवान की कृपया से पूरे होते गये सच बताऊँ अब मुझे विश्वास नहीं होता कैसे इतनी शक्ति ईश्वर ने दी,अंत में मैं ये कहना चाहूँगा “मैं एक दिया हूँ मेरा काम हैं चमकना हो सकता हैं मेरी रोशनी कम हो पर दिखाई बहुत दूर से दूँगा”.