Point Of View - 3 in Hindi Anything by ADRIL books and stories PDF | दृष्टिकोण - 3 - PURPOSE

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दृष्टिकोण - 3 - PURPOSE

3

PURPOSE...  

 

 

अगर आपको किसीने कहा,.. 

"बॉक्सिंग रिंग में जाकर चैम्पियन से भीड़ जाओ, में आपको दस हजार डॉलर दूंगा.." - तो आप क्या करेंगे ??

आप उसके मुँह पर उसे मना कर देंगे.. 

आप सीधे सादे इन्सान बिलकुल लालच में नहीं आएँगे.. और सीधा जवाब देंगे, "मुझे नहीं चाहिए दस हजार डॉलर भाई,...  जान है तो जहान है...  अपनी जान ज्यादा प्यारी है मुझे.. मुझे बेफालतू किसी के साथ नहीं ज़गड़ना.. वो भी चैम्पियन के सामने... नहीं चाहिए मुझे दस हजार डॉलर.. " 

 

यह समझदारी की बात है.. कोई भी नॉर्मल इंसान वही करेगा... 

 

मगर सोचो,.. 

वो ही आदमी अगर आपकी माँ या फिर आपकी बेटी के गले पे छुरी धरकर बोले,.. बॉक्सिंग रिंग में चैम्पियन का सामना कर"   तो आप क्या करेंगे ?  क्या आप तब भी इतना सोचेंगे ? –

बिलकुल नहीं... 

उस वक्त आपका बॉक्सिंग रिंग में जानेका एक Purpose होगा.. अपनी माँ या अपनी बेटी को बचाना... और उस वक्त, आपके सामने कोन है, ये बिना देखे, बिना जाने, और बिना सोचे आप ना सिर्फ खेलने की कोशिश करेंगे बल्कि उसे जितने की भी उतनी ही कोशिश करेंगे.. क्यों की अब आपके सामने वो एक सामान्य विकल्प नहीं है.. अब वो आपके लिए जान की बाजी हो गयी है.. 

आप ये अच्छी तरह जानते हो की चैम्पियन के सामने जितना मुश्किल है,.. आप ये भी जानते हो की अगर हार गए और सामने वाले इंसान ने आपकी माँ या तो आपकी बेटी के गले पर लगाई हुई छुरी चला दी तो माँ या बेटी जान से जा सकते है.. हो सकता है आप को खुद को भी शारीरिक नुक्सान भुगतना पड़े.. इस सब के बावजूद भी आप उस पहलवान से लड़ने को भीड़ जाओगे.. और डंट कर मुकाबला करोगे ... सिर्फ अपनी माँ या बेटी को बचाने के लिए... 

आप के लिए जीतकर जान बचाना या फिर हार कर जान दे देना मंजूर होता है मगर सरंडर करना मंजूर नहीं होता... और वो purpose आपको वो शक्ति देता है जिस से आप वो करने का साहस जुटा पाते हो जो आपने कभी नहीं किया है.. ... आपके लिए बात इस पार या उस पार जैसी हो जाती है.. 

जिंदगी में इसी तरह के मकसद आपको आगे जानेके लिए प्रोत्साहित करते रहते है... क्यों की ये वो काम है जीसमे परिणाम से ज्यादा आप का संतोष जरूरी है.. आप २५ साल के बाद भी इस बात का रिग्रेट नहीं करोगे.. क्युकी ये वो काम है जो २५  साल के बाद भी उतना ही जरुरी होता जितना की आज जरुरी है..  

 

जिस बात को ले कर आप हद से ज्यादा श्योर हो... वो बात आप तब समज सकते हो जब आप अपने मनमे क्लियर हो की आप को क्या चाहिए.. 

माँ को बचाने के लिए अखाड़े में उतरना सही हो या गलत,.. अच्छा हो या बुरा,.. फायदेमंद हो या ना हो,.. आप वो करेंगे। और ये समज हमे education से मिलती है... पढाई कर के ग्रेड नहीं लाते तो पेरेंट्स हल्ला मचा देते है... 

क्या पढाई का purpose सिर्फ कमाना है ?? 

पढाई का purpose एक अच्छा इन्सान बनना भी है,.. वैसा इन्सान जो सही गलत सोचना सीख ले और उसे समझना आ जाए.. कोई नेता हो या धर्मगुरु उसे बेवकूफ बनाकर उसका इस्तमाल ना कर सके.. उसे बेवकूफ ना बना सके...  वो चीजों को या बात को दुसरो के नजरिये से भी देख सके और उसे समज सके,.. उतना ही नहीं उसे स्वीकार भी सके... 

 

इस से वो तर्क कर सकता है.. और वो माँ को या बेटी को बचाने तर्क करके सही या गलत से ऊपर सोच कर फेंसला ले सकता है... 

हर इन्सान ज्यादातर काम कोई न कोई purpose से करता है,.. पर purpose भी सही होना बहोत जरुरी है..