Noukrani ki Beti - 41 in Hindi Human Science by RACHNA ROY books and stories PDF | नौकरानी की बेटी - 41

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नौकरानी की बेटी - 41

आनंदी का सपना पूरा हो रहा था।।

आनंदी ने कहा मैं हर एक चीज बहुत ही अच्छे से करूंगी।। कोई भी कमी नहीं होने दुंगी।।
जुहू में एक बहुत ही बड़े फाइव स्टार होटल में अन्वेशा के लिए पार्टी रखी गई थी।

सजावट फुलों से महक उठा था।

आनंदी, अन्वेशा और कृष्णा समय से पहुंच गए।

फिर अन्वेशा के सारे दोस्त आने लगें।


अन्वेशा ने एक बड़े से केक को काट कर अपना रेजल्ट सेलिब्रेट किया।

आनंदी ने भी अपने आफिस के सभी सदस्यों को बुलाया था।

सभी बहुत पार्टी इन्जाय करने लगे।

फिर सभी ने अन्वेशा को बहुत बधाई दिया और खाना खा कर चले गए।
खाना बफे सिस्टम में था।

काफी लोगों की भीड़ होती गई।
काफी रात भी हो गई थी।
एनजीओ के सभी सदस्यों को बुलाया गया था सभी बहुत ही खुश थे।

आनंदी और अन्वेशा कृष्णा को लेकर खाना खाने गए।
फिर सभी देर रात घर लौट आए।

अन्वेशा ने आनंदी को गले लगा लिया और कहा थैंक यू मां।
आनंदी ने कहा एनी टाइम। हमेशा युही तरक्की करो।
फिर सभी अपने अपने कमरे में जाकर सो गए।

अगले दिन सुबह जल्दी उठकर तैयार हो कर आनंदी मीटिंग के लिए निकल गई।

अन्वेशा भी तैयार हो कर कालेज चली गई।

उसने लंदन में पहले से ही एप्लाई कर दिया था।
डाक्टरी की पढ़ाई के लिए।।

फिर जल्दी ही आनंदी ने सबका एयर टिकट बुक करवाया लिया।
अगले महीने की २०तारिक को लंदन निकलना है ये आनंदी ने कहा।

अन्वेशा ने कहा हां मां मैंने तो अपने यहां से ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले लिया है और जो जो जरूरी है सब कुछ कर लिया।

आनंदी ने कहा बहुत अच्छा अन्वेशा।।

फिर कृष्णा ने भी पैकिंग शुरू कर दिया।
आनंदी ने कहा कि मां पहले हम रीतू दी के यहां जायेंगे उसके बाद अपने बंगले में।

कृष्णा ने कहा हां बेटा।

एक महीने युही निकल गए आज आनंदी लोग की फाल्इट है। चलो अब नहीं तो मिस हो जायेगा।
आनंदी ने कहा।
फिर सब मिलकर आनंदी को सी आफ करने एयरपोर्ट पहुंच गए।

आनंदी के आफिस की पुरी टीम और समर्पण एनजीओ के सभी सदस्य।
आनंदी ने कहा पुजा मुझे यकीन है कि तुम लोग सब सम्हाल लोगे।

सभी ने आनंदी को सम्मानित किया और आनंदी के बास ने कहा इस बार आनंदी अपनी बेटी के सपने को साकार करने जा रही है।
आनंदी सभी को नमस्कार किया और आगे बढ़ गई।

फिर सभी समय पूर्वक हवाई जहाज पर बैठ गए।

और एक बार फिर आनंदी एक नई उम्मीद के साथ उड़ान भरने को तैयार हो गई पर इस बार खुद के लिए नहीं अन्वेशा के लिए।।

सभी बैठ गए अपने सीट पर।।

आनंदी अपने पुराने दिनों को याद करते हुए रो पड़ी।

अन्वेशा ने कहा मां आप चिंता मत करो मैं आपका सपना पूरा करूंगी।

चार साल बाद मैं भी एक सफल डाक्टर बन जाऊंगी और हम वापस आयेंगे।



इसी तरह ये लोग लंदन एयरपोर्ट पहुंच गए।

शैलेश अपनी कार लेकर एयरपोर्ट पहुंच गए थे।

आनंदी ने देखते ही कहा शैलेश जी कैसे हो?

शैलेश ने कहा अच्छा हुं आनंदी पर तुम्हें तो चश्मा लग गया।

आनंदी ने कहा हां बुढ़ी हो गई।
सभी हंसने लगे।

सभी कार में बैठ गए।

आनंदी ने कहा लंदन बिल्कुल नहीं बदला।
अन्वेशा ने कहा वाह सपनों का शहर।

फिर दो घंटे बाद सब रीतू के नये बंगले में पहुंच गए।

कृष्णा ने कहा वाह रीतू बेबी का नया घर।।

अनु ,अमर बोले और कृष्णा कैसी हो?

कैसा रहा सफर।

अन्वेशा ने कहा अरे शना कहा है।
रीतू ने कहा अरे डांस क्लास।

अन्वेशा ने कहा वाह।


रीतू ने आनंदी को गले लगा लिया और कहा कितने साल बीत गए हैं ना।

आनंदी ने कहा हां दीदी बस यादें ताजा हो गई।

रीतू ने कहा चलो सब फेश हो जाओ।

आनंदी ने कहा राजू दादा कहा है।
अनु बोली अरे वो तो कनाडा में है आयेगा।

फिर सभी नाश्ता करने बैठ गए।

रीतू ने कहा पता है आनंदी ये है नैना मम्मी के साथ आयी है ।
पर मैंने इसको अपने पास रख लिया और इसका दाखिला एक अच्छे कालेज में करवा दिया।

आनंदी ने कहा अरे वाह दी ये बहुत अच्छा किया। मुझे इस में मेरी झलक मिल रही है।

नैना ने कहा आनंदी जी मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हुं।

आनंदी ने कहा अरे बाबा मैं कोई हिरोइन नहीं हुं हां पर तुम्हें खुद की फैन बनना होगा।


अन्वेशा ने कहा हां मां बिल्कुल ठीक कहा।

आनंदी ने कहा दीदी हम लोग एक हफ्ते बाद चले जायेंगे।

रीतू ने कहा हां ठीक है।

क्रमशः।