"वो सब आप हमें छोड़ दिजिये। आप बस शादी की तैयारी सूरु किजिये। और हां वृंदा को अभी कुछ दिन यहीं रहने दिजिए। सोनाली कहती है--->" ये खुश खबरी मैं अभी वृंदा के पापा को सुनाती हूं। ठीक है बहन अब रखती हूं। इतना बोलकर दोनो फोन कट कर देता है। एकांश हवेली पहूँच जाता है और अपने जूटे उतारने लगता है इंद्रजीत एकांश से पुछता है।--->" अरे बेटा आ गए तुम आज दिन भर कहा रह गए? आज कुछ लोग">

श्रापित एक प्रेम कहानी - 29 CHIRANJIT TEWARY द्वारा Spiritual Stories में हिंदी पीडीएफ

Shrapit ek Prem Kahaani by CHIRANJIT TEWARY in Hindi Novels
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थ...