कुंवारी कन्या

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दूर कही एक सुनसान घना जंगल था। जहां चारों तरफ एक खामोशी छाई हुई थी उस जंगल में कोई भी जानवर आने से डरता था उसी जंगल के बीच से होकर उदयपुर तक जाने का एक रास्ता था दिन को तो लोग उस रास्ते से आते जाते रहते पर रात होते ही रास्ते पर कोई भी नहीं जाता था सब दूसरे रास्ते से चले जाते थे भले ही वह रास्ता बड़ा ही क्यों न हो फिर भी रात को लोग बड़े रास्ते से ही चले जाते थे क्योंकि काफी लोगों ने उस रास्ते के बारे में डरावनी बाते सुनी हुई थी।

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कुंवारी कन्या - 1

दूर कही एक सुनसान घना जंगल था। जहां चारों तरफ एक खामोशी छाई हुई थी उस जंगल में कोई जानवर आने से डरता था उसी जंगल के बीच से होकर उदयपुर तक जाने का एक रास्ता था दिन को तो लोग उस रास्ते से आते जाते रहते पर रात होते ही रास्ते पर कोई भी नहीं जाता था सब दूसरे रास्ते से चले जाते थे भले ही वह रास्ता बड़ा ही क्यों न हो फिर भी रात को लोग बड़े रास्ते से ही चले जाते थे क्योंकि काफी लोगों ने उस रास्ते के बारे में डरावनी बाते सुनी हुई ...Read More

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कुंवारी कन्या - 2

अपने दादा की बात की तुम्हारे दोस्त वो अब आ नहीं पाएंगे यह सुन कर आनंद को चिंता होने उसने अपने दादा से पूछने की कोशिश की पर दादा खामोश हो कर वहां से चले गए दादा की इस खामोशी को देख अब वह और भी परेशान होने लगा उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे तभी पीछे से उसके पापा आए उन्होंने आनंद के कंधे पर हाथ रखा आनंद पहले से डरा हुआ था और उस हाथ के स्पर्श होने से वह डर गया अपने बेटे को डरा हुआ देख पापा ने कहापापा..........आनंद क्या हुआ ...Read More