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अब मुझे यकीन हो गया है कि अगला नंबर हम दोनों का ही है। शायद हम इस घाटी से कभी बा...
ऋगुवेद सूक्ति-- (57) की व्याख्या एकं सद्विप्रा; बहुधा वदन्ति।ऋगुवेद --1/164/46अर...
"ले जाओ इसे... उसके पास... और दोनों को एक ही चिता पर जला दो।"यह सुनकर सत्या उन...
स्कूल के दिन आज अपने बेटे को स्कूल भेजते हुए ख्याल आया कि कभी हम भी स्कूल जाते...
कुछ ज्ञान की बातें 7 सागर और महासागर की कुछ बातें सात समुद्र ( seven seas ) ...
रात गहरा चुकी थी… मुंबई की भागती हुई एमएम धीरे-धीरे पीछे छूट रही थी…कृतिक और सुन...
अकेलापनभरी दोपहरी में भी सड़क सूनसान, चारों ओर सन्नाटा औरपुलिस वालों की मात्र पहर...
तीनों एकदम वहीं ठिठक गए।वह कोई गाना नहीं था… बस एक धुन थी।कोई शब्द नहीं, फिर भी...
हॉल के उस तनावपूर्ण माहौल के बाद रात धीरे-धीरे सुल्तान मेंशन पर हावी हो रही थी।...
------------------------------ अध्याय 8: मृत्यु और जीवन का उद्देश्य (अंतिम सच: श...
एक कर्तव्य ऐसा भी स्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्ध व तपस्वी आचार्य थे । उनके प्रसिद्ध राधा स्वामी आश्रम तीर्थयात्रियों व भक्तों के ठहरने व खा...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
सोने का पिंजरा हवेली बड़ी थी। इतनी बड़ी कि गौरी को बचपन में लगता था कि अगर वह एक कने से दौड़ना शुरू करे, तो साँस फल जाएगी दूसरे कोने तक पहुँचने से पहले। सेठ धरमचंद की इकलौती...
कलावती हॉस्पिटल के लेबर रूम में प्रसव पीड़ा को चुपचाप सहन कर रही थी रेशमा… ना कोई चीख, ना चित्कार… बस चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। पीला पड़ा चेहरा और सफेद होती आँखें किसी और ही...
कमरे में एसी चल रहा था, फिर भी संजना की हथेलियां पसीने से तर थीं। फोन को इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए थे — जैसे अगर उसने ज़रा भी ढील दी, तो कुछ छूट जाएगा...
दोपहर का समय था , घर की गैलरी में दो चारपाई बिछी हुई थी जिन पर दो बच्चे सो रहे थे जिसमे से एक की उम्र लगभग 4 महीने और दूसरे की लगभग 3 वर्ष होगी ।दोनों बच्चो के पास दो औरते बैठी बात...
हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन सी कितनी ट्रेनें हर वक्त बेवक्त गुजरती रहती थीं। सुबह सबेरे और आधी रात के वक्त के गुजरने के बाद ही...
केशव किसी तरह धक्कामुक्की से निकलते हुए सप्त क्रांति ट्रेन में चढ़ पाया। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन लोगों से खचाखच भरा हुआ था— किसी की आँखों में बिछड़ने का दर्द था, तो किसी के चे...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
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