हवाई अड्डे की भीड़ में मेहरीश एक पतली सी रेखा की तरह खड़ी थी। उसके कंधे पर एक छोटा सा बैग था, हाथ में एक किताब, और आँखों में एक ऐसी थकान जो सालों की नहीं, जन्मों की लगती थी। उसकी माँ की मौत को एक साल हो गया था। एक साल जिसमें हर दिन एक सवाल था: "क्या मैं और कर सकती थी?" उसका फोन वाइब्रेट हुआ। चाची का मैसेज: "तू ठीक तो है ना? मेहरीश ने जवाब नहीं दिया। वह जानती थी इस साइलेंट रिट्रीट के नियम। "साइलेंस सर्कल" जहाँ लोग 3 दिन के लिए खुद से, अपने दर्द से, अपने सवालों से रूबरू होने आते थे। बोलना म
अनकही - 1
Ep1 साइलेंट रिट्रीटहवाई अड्डे की भीड़ में मेहरीश एक पतली सी रेखा की तरह खड़ी थी। उसके कंधे पर छोटा सा बैग था, हाथ में एक किताब, और आँखों में एक ऐसी थकान जो सालों की नहीं, जन्मों की लगती थी। उसकी माँ की मौत को एक साल हो गया था। एक साल जिसमें हर दिन एक सवाल था: "क्या मैं और कर सकती थी?"उसका फोन वाइब्रेट हुआ। चाची का मैसेज: "तू ठीक तो है ना?मेहरीश ने जवाब नहीं दिया। वह जानती थी इस साइलेंट रिट्रीट के नियम। "साइलेंस सर्कल" जहाँ लोग 3 दिन के लिए खुद से, अपने ...Read More
अनकही - 2
Ep2 आई कॉन्टैक्टसुबह 7:00 बजे, मेडिटेशन हॉलमेहरीश सक्सेना आँख खोलते ही पहली बात यह सोची कि कल रात वह गहरी नींद में सोई थी। उस पत्थर के स्पर्श ने, रयान मल्होत्रा की चुप्पी ने, उसे एक अजीब सी शांति दी थी। वह उठी और अपने बैग से वह सफेद पत्थर निकाला। चिकना, ठंडा, सुंदर। उसने उसे मुट्ठी में भींच लिया, जैसे वह कोई ताकत का स्रोत हो।डाइनिंग हॉल में नाश्ते का समय था। मेहरीश ने देखा कि रयान पहले से ही एक टेबल पर बैठा था। अकेला। वह ध्यान से अपनी प्लेट में देख रहा था, जैसे उसमें कोई ...Read More
अनकही - 3
सुबह 7:00 बजे, मेडिटेशन हॉलमेहरीश सक्सेना आँख खोलते ही पहली बात यह सोची कि कल रात वह कितनी गहरी में सोई थी। उस पत्थर के स्पर्श ने, रयान मल्होत्रा की चुप्पी ने, उसे एक अजीब सी शांति दी थी। वह उठी और अपने बैग से वह सफेद पत्थर निकाला। चिकना, ठंडा, सुंदर। उसने उसे मुट्ठी में भींच लिया, जैसे वह कोई ताकत का स्रोत हो।डाइनिंग हॉल में नाश्ते का समय था। मेहरीश ने देखा कि रयान पहले से ही एक टेबल पर बैठा था। अकेला। वह ध्यान से अपनी प्लेट में देख रहा था, जैसे उसमें कोई जवाब छिपे ...Read More
अनकही - 3 - 2
सुबह 8:00 बजे, ब्रेकफास्ट हॉलनाश्ते का टाइम था। मेहरीश अपनी प्लेट में देख रही थी, पर उसका ध्यान टेबल दूसरे सिरे पर बैठे रयान पर था। कल का टास्क याद था: "बिना बोले अपने पार्टनर के बारे में एक चीज़ पता करो।"तभी रयान ने उठकर जूस लेने का फैसला किया। जब वह वापस आया और बैठा, तो उसकी शर्ट की आस्तीन ऊपर खिंच गई। और मेहरीश ने देखा।उसकी कलाई के ठीक ऊपर, एक टैटू था। संस्कृत में लिखा हुआ। उसे संस्कृत नहीं आती थी, पर वह देवनागरी पढ़ सकती थी। उसने ध्यान से देखा। शब्द थे: "शांतिर्भूत:"उसकी साँस रुक ...Read More
अनकही - 4
ट्रेन से उतरते ही मेहरीश को वही शोर, वही भीड़, वही ज़िंदगी का प्रेशर महसूस हुआ। तीन दिन की के बाद यह शहर की आवाज़ें उसके कानों में चिल्लाने लगी थीं। हॉर्न, लोगों के झगड़े, मोबाइल की घंटियाँ, सब कुछ बहुत ज़्यादा लग रहा था।उसका फोन ऑन करते ही 12 मिस्ड कॉल्स और 25 मैसेजेस आए। चाची, ऑफिस, बैंक, डॉक्टर। रियल वर्ल्ड ने उसे याद दिला दिया कि उसकी ज़िंदगी साइलेंस के लिए नहीं बनी है।घर पहुँची तो चाची बैठी थीं। "कहाँ थी तू? किसी को बताया नहीं! हम सब परेशान थे!"मेहरीश ने सिर्फ सिर झुकाया। उसकी ज़ुबान फिर ...Read More
अनकही - 5
मेहरीश ने चाबी को अपने बैग में रखा और पूरा दिन सोचती रही। हर बार जब वह कंप्यूटर स्क्रीन तो उसकी नज़र बैग पर चली जाती। वह चाबी सिर्फ धातु का टुकड़ा नहीं थी, वह एक चुनाव थी। एक दुनिया में कदम रखने का निमंत्रण जो उसकी अपनी दुनिया से कोसों दूर थी।शाम को घर लौटते हुए उसने रयान को मैसेज किया: "मुझे एक दिन और चाहिए।"रिप्लाई तुरंत आया: "टेक ऑल द टाइम यू नीड। आई विल वेट।"उस रात मेहरीश ने अपनी माँ की तस्वीर के सामने बैठकर बात की, जैसे वह हमेशा करती थी जब उसे कोई बड़ा ...Read More