यह कहानी पूर्ण रूप से सत्य है। इसमें कोई काल्पनिक बातें नहीं हैं, बल्कि इसे सच्चाई के रंगों से सजाया गया है। यह घटना आज से लगभग दो साल पहले, 9 मई 2024 को मेरे बड़े पापा के घर घटी थी। मई का महीना था, गाँव हरियाली से भरा था, किंतु हमारे घर में अचानक अंधकार छा गया। उस सुबह मम्मी ने केवल एक समय का खाना बनाया था, यह सोचकर कि शाम को अच्छा भोजन बनाकर सब साथ खाएंगे। हम सबने सुबह का खाना खा लिया था, और जो थोड़ा बचा था वह दोपहर में मेरे भाई ने खा लिया। शाम होते-होते मुझे बहुत तेज भूख लगी। मैं मम्मी को परेशान करने लगा कि खाना कब बनेगा? मम्मी ने कहा, "बेटा, बस एक-दो घंटे रुक जाओ, फिर बनाती हूँ।" मैं मान गया।
कहानी में छुपी एक सन्देश - 1
लेखक -एसटीडी मौर्यकटनी मध्य प्रदेशमोबाईल न. 7648959825यह कहानी पूर्ण रूप से सत्य है। इसमें कोई काल्पनिक बातें नहीं हैं, इसे सच्चाई के रंगों से सजाया गया है। यह घटना आज से लगभग दो साल पहले, 9 मई 2024 को मेरे बड़े पापा के घर घटी थी।मई का महीना था, गाँव हरियाली से भरा था, किंतु हमारे घर में अचानक अंधकार छा गया। उस सुबह मम्मी ने केवल एक समय का खाना बनाया था, यह सोचकर कि शाम को अच्छा भोजन बनाकर सब साथ खाएंगे। हम सबने सुबह का खाना खा लिया था, और जो थोड़ा बचा था वह दोपहर ...Read More