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ओ तो मेला miku इतना बड़ा हो गया कि वो अब अपने डैडी को punish कलेगा ... एक लड़के...
परिदृश्य: गाड़ी के अंदर का माहौल और जयपुर की गलियाँ।गाड़ी अब जयपुर के पुराने परको...
अध्याय 1: अधूरा सपना एक आलीशान बंगला था, जिसके बाहर महंगे संगमरमर की नेम प्लेट ल...
संत रहीम दास जी का यह दोहा समाज में ऊंच-नीच के भेद को मिटाकर हर व्यक्ति का सम्मा...
आज मन काफी उदास है। मुझे प्रयागराज के एक छोटे से कमरे में रहते हुए लगभग तीन साल...
------------------------------ अध्याय 3: असफलता से कैसे निपटें (हार का मनोविज्ञा...
अन्धा प्रेम राम जनपद के शङ्कर पुर गाँव में जयराम नामक एक युवक रहता है।...
प्रश्न 1 :- सनातन का अर्थ क्या है?आज के समय में "सनातन" शब्द बहुत सुनने को मिलता...
राघव और काशी गुफा से कबिले की ओर जा ही रहे होते है कि काशी ने पूछते हुए कहा, तुम...
कोई कहता: "इसकी शादी नहीं होगी, curse लग गया है।"मम्मी रोती थी। मैं उनको हंसाती...
गुलाबी शहर की धूप और टोक्यो की यादें दृश्य 1: जापान (टोक्यो) – निहाल का पेंटहाउस – सुबह का समय टोक्यो की सुबह हमेशा की तरह मशीनी और तेज़ थी। खिड़की के बाहर चमकती मेट्रो ट्रेनें और...
अभिशप्त रूह का तांडवदुनिया के नक्शे पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिन्हें कुदरत ने शायद स्वर्ग का द्वार बनाने के लिए रचा था, लेकिन इंसानी फरेब और खून ने उन्हें नर्क का रास्ता बना दिया।...
प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... .......
कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े झुमके, माथे पे बिंदी, खुले बाल जो कमर तक थे, हाथों में चूड़ियाँ ! वो खुद को देख ही रही थी ज...
वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...
हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर निकलना ही नहीं चाहते। मैं देखता हूँ कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी...
सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था उनका। सब कुछ घर मे था, नौकर चाकर घर जायदाद घोड़े गाड़ियों के अंबार! और प्रभु महादेव जी की अपार कृपा थी कि किस...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
कई वर्षों से देश मे एक नैरेटिव सेट कर दिया गया कि, की राणा पूंजा एक भील थे. जो सभी ने आसानी से मान लिया . जबकिं राणा पूंजा ,भीलों की सेना प्रतिनिधित्व करते थे, भीलों के राणा थे,...
जिंदगी किस मोड़ पर कैसे और कब बदल जाए ये कह नही सकते, ऐसा ही कुछ राजपुरोहित जी के साथ हुआ। हीरालाल जी बहुत ही संपन्न और प्रतिष्ठित कारोबारी थे। हर ओर उनकी प्रतिष्ठा, वैभवता की ख्या...
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