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जिस बात को आप बार-बार स्वीकार करते हैं, वही धीरे-धीरे आपके लिए दूसरों का व्यवहार...
रहस्यमयी मुखौटाभाग 1 – हँसी, रहस्य और एक अनोखी शुरुआतशिवपुर नाम का एक छोटा-सा कस...
यजुर्वेद सूक्ति~(1) की व्याख्या"त्रयम्बकं यजामहे"त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्ट...
पंजाब के एक शांत गाँव में, हल्की सर्द शाम ढल रही थी। आर्यन और रिया खेतों के किना...
Scene 1शाम के 7:45 pm हुए थे कृष्ण मंदिर के बाहर बेंच पर शौनक, दुष्यंत, रेवती, र...
कमिश्नर राकेश संध्या के बिल्कुल करीब आए और धीमी लेकिन बेहद सख्त आवाज में बोले, "...
“आठवें आयोग की आठ कलाएं” (व्यंग्य) हिंदी बेल्ट में आठवें नम्बर को जीवन में बहुत...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 23 : भूली हुई लड़की का नामपूरा शून्य सुनहरी रोशनी से...
बुआ जी ने हिम्मत कर दरवाजे को खोला और जैसे ही दोनों आगे बढ़ी और नजर बेड पर लेटे...
बीहड़ जंगल के अंदर कदम रखते ही...सब कुछ बदल गया। पेड़ इतने घने थे कि चाँदनी तक ज...
प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... .......
अभिशप्त रूह का तांडवदुनिया के नक्शे पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिन्हें कुदरत ने शायद स्वर्ग का द्वार बनाने के लिए रचा था, लेकिन इंसानी फरेब और खून ने उन्हें नर्क का रास्ता बना दिया।...
झूठ बोल कर निकली, ये कहानी शुरू होती है एक झूठ से, प्रतिज्ञा ने अपने घर पर सबको बोला था, कि वो कॉलेज ट्रिप पर जा रही है, लेकिन सच ये था कि, ये कोई आम कॉलेज ट्रिप नहीं थी, ये एक कपल...
हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़ "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने स...
गुलाबी शहर की धूप और टोक्यो की यादें दृश्य 1: जापान (टोक्यो) – निहाल का पेंटहाउस – सुबह का समय टोक्यो की सुबह हमेशा की तरह मशीनी और तेज़ थी। खिड़की के बाहर चमकती मेट्रो ट्रेनें और...
कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े झुमके, माथे पे बिंदी, खुले बाल जो कमर तक थे, हाथों में चूड़ियाँ ! वो खुद को देख ही रही थी ज...
वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...
हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर निकलना ही नहीं चाहते। मैं देखता हूँ कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी...
सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था उनका। सब कुछ घर मे था, नौकर चाकर घर जायदाद घोड़े गाड़ियों के अंबार! और प्रभु महादेव जी की अपार कृपा थी कि किस...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
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