लाल इश्क.

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बाहर मुंबई की कभी न थमने वाली रफ़्तार थी और केबिन के अंदर एक गला घोंटने वाली खामोशी। पुराने एयर कंडीशनर की घरघराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें ले रहा हो। आरंभी शास्त्री के लिए बस वही एक आवाज़ थी जो उसे बेहोश होने से बचा रही थी। सामने मेज पर फाइलों का अंबार लगा था—सफेद कागजों के वे ढेर किसी 'कब्रिस्तान' की तरह लग रहे थे, जहाँ उसके पिता दिग्विजय शास्त्री के बिजनेस साम्राज्य की लाश दफन थी। आरंभी जैसे-जैसे पन्ने पलटती, वे डिजिटल नंबर्स उसे डसने लगते। बैलेंस शीट कभी बैलेंस नही

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लाल इश्क - 1

बाहर मुंबई की कभी न थमने वाली रफ़्तार थी और केबिन के अंदर एक गला घोंटने वाली खामोशी। पुराने कंडीशनर की घरघराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें ले रहा हो। आरंभी शास्त्री के लिए बस वही एक आवाज़ थी जो उसे बेहोश होने से बचा रही थी।सामने मेज पर फाइलों का अंबार लगा था—सफेद कागजों के वे ढेर किसी 'कब्रिस्तान' की तरह लग रहे थे, जहाँ उसके पिता दिग्विजय शास्त्री के बिजनेस साम्राज्य की लाश दफन थी। आरंभी जैसे-जैसे पन्ने पलटती, वे डिजिटल नंबर्स उसे डसने लगते। बैलेंस शीट कभी बैलेंस नहीं हो रही ...Read More

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लाल इश्क - 2

'शास्त्री निवास' तक का वह रास्ता किसी लो-बजट हॉरर फिल्म के पैनिक अटैक जैसा था। बाहर धुंधली नियॉन लाइट्स गाड़ियों के जहरीले धुएं का शोर था। आरंभी कंपनी की सेडान की पिछली सीट पर किसी कैदी की तरह बैठी थी। उसकी नज़रें बार-बार 'रियरव्यू मिरर' की डिजिटल स्क्रीन पर लॉक हो जातीं। उसे लग रहा था जैसे कोई काली परछाईं उसका पीछा कर रही है। जब भी कोई स्पोर्ट्स बाइक कान फाड़ देने वाले शोर के साथ पास से गुजरती, आरंभी का सांस लेना मुश्किल हो जाता। उस 'कातिल' का चेहरा उसके दिमाग में एक 4K रिज़ॉल्यूशन की तस्वीर ...Read More

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लाल इश्क - 3

अगला एक हफ्ता किसी धुंधले और खौफनाक सपने जैसा था—रेशम, लेस और बंदूकधारी गार्ड्स के बीच बीता एक ऐसा जिसने आरंभी शास्त्री की दुनिया की नींव हिला दी थी। शास्त्री निवास विला अब वह सुकून भरा घर नहीं रहा था; वह एक 'स्टेजिंग ग्राउंड' बन चुका था जहाँ किसी कीमती सौदे की प्रदर्शनी लगनी थी। विला की सफेद दीवारें और सुनहरे झूमर अब भी अपनी भव्यता में चमक रहे थे, लेकिन हर दरवाजे पर डार्क सूट पहने खड़े आदमियों ने उस चमक को खौफ के साये में बदल दिया था। उनकी आँखें काले चश्मों के पीछे पत्थर की तरह ...Read More

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लाल इश्क - 4

शादी की रस्में अग्नि और मंत्रोच्चार के शोर में किसी 'बफरिंग' होती मेमोरी की तरह धुंधली लग रही थीं। को महसूस हुआ कि उसका शरीर किसी 'ऑटो-पायलट' मोड पर चलने वाली कठपुतली की तरह रस्में पूरी कर रहा था, लेकिन उसका मन एक 'एनक्रिप्टेड फायरवॉल' के पीछे कैद होकर चीख रहा था।जब भी अग्नि में आहुति देने के लिए उनके हाथ एक-दूसरे को छूते, आरंभी को किसी 'हाई-वोल्टेज' शॉर्ट सर्किट जैसा झटका लगता। आर्यवर्धन अग्निहोत्री ने अपनी नजरें उससे एक सेकंड के लिए भी नहीं हटाई थीं। वह उसे किसी 'क्लीनिकल इन्वेस्टिगेशन' की तीव्रता से देख रहा था, मानो ...Read More

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लाल इश्क - 5

स्थान: 'द गॉथिक फोर्ट' एक प्राइवेट इस्टेट - अग्निहोत्री मेंशनसमय: रात २:०० बजेकाव्या आरंभी को लेकर ऊपरी मंजिल पर आर्यवर्धन के बेडरूम के ठीक बगल वाले गेस्ट रूम तक लेकर गई। वह शयनकक्ष कांच और कंक्रीट से भी अधिक डार्क पत्थरों और पूरी तरह ब्लैक कलर से बनाया गया था, जो किसी महल का हिस्सा नहीं, बल्कि एक 'ब्लैक लग्जरी प्रिज़न' (विलासितापूर्ण जेल) जैसा लग रहा था। आरंभी ने जैसे ही उस कमरे की ठंडी और भारी हवा में सांस ली, उसका दम घुटने लगा। रिसेप्शन पर जबरदस्ती खिलाया गया वह मांस का टुकड़ा उसके पेट में किसी 'एसिडिक ...Read More

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लाल इश्क - 6

स्थान: 'द गॉथिक फोर्ट' - राणा मेंशनसमय: सुबह ५:३० बजेआरंभी की नींद सूरज की कोमल किरणों से नहीं, बल्कि भयानक 'नाइटमेयर' की वजह से खुली। वह पसीने से तर-बतर, हाँफते हुए बिस्तर पर उठ बैठी। तभी हवा के झोंके के साथ एक रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज़ कमरे में दाखिल हुई।"आह्ह्ह... सर... प्लीज... मर जाऊंगा... खुदा के लिए छोड़ दीजिए!""य... ये कैसी आवाज है?" वह बुदबुदाई। उसका दिमाग तेज़ी से दौड़ने लगा। 'आरंभी, शांत हो जा। शायद तू कोई सपना देख रही है। इस साइको किलर के डार्क एम्पायर में उसके, उन बेजान गार्ड्स और उसकी उस इमोशनलेस ...Read More

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लाल इश्क - 7

स्थान: 'द गॉथिक फोर्ट' - राणा मेंशनसमय: सुबह १०:०० बजेआरंभी को जब होश आया, तो उसे अपना अस्तित्व किसी हुए सर्वर की तरह बिखरा हुआ महसूस हुआ। जैसे ही उसने आँखें खोलीं, सुबह ५:३० बजे का वह रूह कंपा देने वाला मंजर—वह खून से सना खंजर, वह दर्दनाक चीख और आर्यवर्धन का वह क्रूर चेहरा—उसके दिमाग में '4K रेजोल्यूशन' में फ्लैश होने लगा।खिड़की से उस 'डेथ-लीप' (छलांग) की वजह से उसकी पीठ और बाहों पर नीले निशान उभर आए थे, लेकिन वह दर्द उस 'मेंटल ट्रॉमा' के सामने कुछ भी नहीं था जिसे उसने अभी अनुभव किया था। तभी, ...Read More