लाल दाग़

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कक्षा में अचानक ठहाकों की आवाज़ गूँज उठी।Sneha ने इधर-उधर देखा तो पाया कि सब बच्चे उसी की ओर घूर-घूरकर देख रहे थे और हँस भी रहे थे।लड़कियाँ Sneha को देख कर अजीब-सी मुस्कान लिए खड़ी थीं, मानो किसी राज़ को पकड़ लिया हो।तभी Sneha को लगा—“क्या सब मेरी बातें कर रहे हैं? ऐसा अचानक क्या हो गया?”वह अभी सिर्फ़ 12 साल की ही तो थी—दुबली-पतली सी, काले घुँघराले बालों में दो चोटी बनाए हुए। उसकी आँखों में मासूमियत झलकती थी और पतले होंठ डर से सिमटे हुए थे।

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लाल दाग़ - 1

कक्षा में अचानक ठहाकों की आवाज़ गूँज उठी।Sneha ने इधर-उधर देखा तो पाया कि सब बच्चे उसी की ओर देख रहे थे और हँस भी रहे थे।लड़कियाँ Sneha को देख कर अजीब-सी मुस्कान लिए खड़ी थीं, मानो किसी राज़ को पकड़ लिया हो।तभी Sneha को लगा—“क्या सब मेरी बातें कर रहे हैं? ऐसा अचानक क्या हो गया?”वह अभी सिर्फ़ 12 साल की ही तो थी—दुबली-पतली सी, काले घुँघराले बालों में दो चोटी बनाए हुए। उसकी आँखों में मासूमियत झलकती थी और पतले होंठ डर से सिमटे हुए थे।घबराकर उसने पीछे हाथ लगाया तो उसकी उंगलियाँ खून से लाल हो ...Read More

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लाल दाग़ - 2

जैसे-जैसे Sneha घर के करीब पहुँच रही थी, उसके मन में एक अजीब-सी उम्मीद जाग रही थी।उसे लग रहा घर पहुँचते ही इस परेशानी से छुटकारा मिल जाएगा। शायद मम्मी सब ठीक कर देंगी।जैसे ही Sneha ने घर की चौखट के अंदर कदम रखा, सामने आँगन का रोज़ का ही दृश्य था—दादा और दादी चारपाई पर बैठे हुक्का और चिलम पी रहे थे।मम्मी भैंसों के पास काम कर रही थीं।Sneha धीरे-धीरे सबकी नज़रों से बचते हुए मम्मी की तरफ बढ़ी।वह बस मम्मी की गोद में छुप जाना चाहती थी—जैसे बचपन में हर डर से बच जाती थी।जैसे ही मम्मी ...Read More