सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस जमी थी, लेकिन भीतर का माहौल गर्माहट और काम की हड़बड़ाहट से भरा था। काया, जो इस घर की धड़कन थी, रसोई के स्लैब पर बिजली की तेजी से हाथ चला रही थी। वह पैंतीस वर्ष की थी, लेकिन उसकी फुर्ती किसी किशोर से कम नहीं थी। सांवला सलोना रंग, चेहरे पर एक स्थायी गंभीरता और आँखों में गजब की सतर्कता। उसने अपने घने बालों का एक जूड़ा बना रखा था ताकि काम में बाधा न आए। उसके हाथों की चूड़ियाँ आपस में टकराकर एक लयबद्ध संगीत पैदा कर रही थीं। कभी वह गोभी काटती, तो अगले ही पल परांठे बेलने लगती।
डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 1
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस जमी थी, लेकिन भीतर का माहौल गर्माहट और काम की हड़बड़ाहट से भरा था।काया, जो इस घर की धड़कन थी, रसोई के स्लैब पर बिजली की तेजी से हाथ चला रही थी। वह पैंतीस वर्ष की थी, लेकिन उसकी फुर्ती किसी किशोर से कम नहीं थी। सांवला सलोना रंग, चेहरे पर एक स्थायी गंभीरता और आँखों में गजब की सतर्कता। ...Read More
डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 2
सुबह की सुनहरी धूप अब तीखी होने लगी थी। भूपेंद्र के ऑफिस जाने के बाद घर की हलचल थमी थी, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया था। वंशिका अपने कमरे में शीशे के सामने खड़ी थी। वह अपनी फिटनेस को लेकर जितनी संजीदा थी, उतनी ही सचेत वह अपने पहनावे को लेकर भी रहती थी। उसने गहरे नीले रंग की ब्रांडेड जिम-लेगिंग और स्पोर्ट्स टी-शर्ट पहन रखी थी। बालों को ऊँची पोनीटेल में कसकर बांधते हुए उसने एक बार फिर आईने में खुद को निहारा।वंशिका का जिम, जो उसकी पहचान और गर्व का केंद्र था, उनकी ही पॉश कॉलोनी के ...Read More
डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 3
दोपहर के डेढ़ बज रहे थे। सड़क पर स्कूल बसों के हॉर्न की आवाज़ें गूँजने लगी थीं। काया ठीक पर घर पहुँच चुकी थी। उसने अपनी चप्पलें दरवाजे के बाहर करीने से उतारीं और सीधे हाथ धोने के बाद रसोई की ओर बढ़ी। उसे पता था कि अगले दस मिनटों में घर का सन्नाटा बच्चों के शोर-शराबे में बदलने वाला है।जैसे ही डोरबेल बजी, काया ने दरवाजा खोला। सात साल का विहान और पाँच साल की नन्ही अवनी मानो तूफान की तरह भीतर दाखिल हुए। उनके कंधों पर लटके भारी बैग उनकी छोटी पीठ को थोड़ा झुका रहे थे, ...Read More