बिल्ली जो इंसान बनती थी

(16)
  • 66
  • 0
  • 3.1k

Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात होते ही सन्नाटा उसकी छाती पर बैठ जाता। फोन में न कोई मैसेज, न किसी की कॉल। बस दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक। उस दिन भी ऑफिस से लौटते हुए उसने खुद से कहा — अब और नहीं… मुझे कोई चाहिए।

1

बिल्ली जो इंसान बनती थी - 1

Heroine: शानवी सिंहHero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान)शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था।बड़े शहर में छोटी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात होते ही सन्नाटा उसकी छाती पर बैठ जाता।फोन में न कोई मैसेज, न किसी की कॉल। बस दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक।उस दिन भी ऑफिस से लौटते हुए उसने खुद से कहा —अब और नहीं… मुझे कोई चाहिए।और उसी शाम, वो एक बिल्ली ले आई। एक सफेद सा, बहुत मासूम सा बिल्ली का बच्चा। उसकी आंखें अजीब सी गहरी थीं… जैसे कुछ कहना चाहती हों। वो बहुत प्यासा ...Read More

2

बिल्ली जो इंसान बनती थी - 2

कमरे में अंधेरा धीरे-धीरे फैल रहा था। शानवी खाना बनाकर टीवी के सामने बैठ गई। उसका बिल्ला… यानी कार्तिकेय…चुपचाप कोने में बैठा उसे देख रहा था। वो घड़ी की तरफ देखता।बार-बार।⏰ 10:30… 11:15… 11:50…उसके दिल की धड़कन तेज़ होती जा रही थी।कार्तिकेय बोला -बस थोड़ा सा और…फिर मैं खुद नहीं रहूँगा…फिर मैं वो बन जाऊँगा… जो मैं असल में हूँ…।वो मन ही मन सोच रहा था —कितना अजीब है…दिन में मैं उसके पैरों के पास घूमता हूँ,और रात में… उसी के पास बैठकर उसे देख भी नहीं सकता…।शानवी सोने की तैयारी करने लगी। उसने लाइट बंद की और बिस्तर ...Read More

3

बिल्ली जो इंसान बनती थी - 3

सोमवार की सुबह थी। शानवी को ऑफिस जाना था।वो एक इंजीनियर थी — समय की पाबंद और अपने काम सीरियस। उसने हल्के रंग का सूट-सलवार पहना, बाल ठीक किए और तैयार होकर आई। फिर उसकी नजर बिस्तर पर सो रहे उस सफेद बिल्ले पर पड़ी।शानवी बोली -तुम्हें अकेला छोड़ दूँ?फिर मुस्कुराई।बोली -नहीं… तुम्हें भी अपने साथ ले चलती हूँ।उसने बिल्ले को गोद में उठाया। वो बिना किसी विरोध के… बस “म्याऊँ” करके चुप हो गया। शानवी ने उसका बैग तैयार किया और उसे अपने साथ ऑफिस ले गई।उसने सोचा था —मेरा अपना पर्सनल केबिन है… वहीं रख दूँगी।वैसे भी ...Read More

4

बिल्ली जो इंसान बनती थी - 4

सुबह की हल्की धूप कमरे में फैल रही थी। खिड़की से आती रोशनी शानवी के चेहरे पर पड़ी…और उसकी टूट गई।लेकिन आज…वो उठते ही चौंक गई। उसका दिल…बिना किसी वजह के तेज़-तेज़ धड़क रहा था। साँसें थोड़ी भारी थीं।वो बोली -अजीब है...!उसे याद नहीं था कि उसने कोई बुरा सपना देखा हो…लेकिन फिर भी…उसके मन में एक बेचैनी थी। एक अजीब सा डर…जैसे…किसी ने बहुत दर्द सहा हो…और उसकी चीखें…कहीं न कहीं…उसके दिल तक पहुँच गई हों। उसने अपनी छाती पर हाथ रखा।वो बोली -क्यों ऐसा लग रहा है… जैसे कुछ बहुत गलत हुआ हो?उसी वक्त…बिस्तर के पास वही ...Read More

5

बिल्ली जो इंसान बनती थी - 5

सुबह से ही शानवी का मन भारी था। रात वाले सपने ने उसे अंदर तक हिला दिया था। फिर वो खुद को संभालकर ऑफिस चली गई। पूरा दिन…वो बस काम में लगी रही।खुद को बिज़ी रखने की कोशिश करती रही।लेकिन किस्मत…आज कुछ और ही तय करके बैठी थी।दोपहर के वक्त…अचानक उसका बॉस उसके केबिन में आ गया।और उसकी नजर…बैग के पास बैठे उस सफेद बिल्ले पर पड़ गई।Boss बोला -ये क्या है? ऑफिस में जानवर?उसकी आवाज़ सख्त थी। शानवी घबरा गई।शानवी बोली -सॉरी सर… वो ये बहुत शांत है… किसी को परेशान नहीं करेगा…।लेकिन बॉस गुस्से में थे।वो बोले ...Read More

6

बिल्ली जो इंसान बनती थी - 6

सुबह की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। शानवी की आँख खुली…लेकिन आज…उसका मन अजीब सा भारी था।जैसे बात अधूरी रह गई हो। वो कुछ पल छत को देखती रही…फिर करवट बदली। और उसकी नजर…अपने पास सो रहे उस सफेद बिल्ले पर पड़ी। कार्तिकेय। वो अभी भी चैन से सो रहा था। शानवी उसे देखने लगी। बहुत ध्यान से।उसका चेहरा…उसकी आँखें…उसकी नाक…सब कुछ वही था…लेकिन फिर भी… उसके दिल में एक आवाज़ आई —कल रात…जब मैंने छुआ था…ये… ऐसा नहीं लग रहा था…।उसका दिल तेज़ धड़कने लगा। वो याद करने की कोशिश करने लगी…नींद…आधी होश…और… किसी सख्त से ...Read More