दीवाने की दिवानियत

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एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर सरकारी कायदे-कानून को मानने वाले इंसान थे, जबकि भानु प्रताप ठाकुर के लिए उनका शब्द ही कानून था। उस दिन हवेली के बगीचे में 8 साल का पृथ्वी और 5 साल की सनाया खेल रहे थे। "पृथ्वी! दम है तो पकड़ के दिखाओ!" सनाया अपनी फ्रॉक संभालते हुए तेजी से भागी। पृथ्वी उसके पीछे दौड़ रहा था और बार-बार चिल्ला रहा था, "सनाया, रुक जा! गिर जाएगी तो चोट लगेगी, फिर मत रोना।" लेकिन सनाया कहाँ सुनने वाली थी? वो बस भागती रही और अचानक उसका पैर एक ईंट से टकराया। वो धड़ाम से गिरी और उसके घुटने से खून निकलने लगा।

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 1

एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोटदरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर सरकारी कायदे-कानून को मानने वाले इंसान थे, जबकि भानु प्रताप ठाकुर के लिए उनका शब्द ही कानून था।उस दिन हवेली के बगीचे में 8 साल का पृथ्वी और 5 साल की सनाया खेल रहे थे।"पृथ्वी! दम है तो पकड़ के दिखाओ!" सनाया अपनी फ्रॉक संभालते हुए तेजी से भागी।पृथ्वी उसके पीछे दौड़ रहा था और बार-बार चिल्ला रहा था, "सनाया, रुक जा! गिर ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 2

नफरत का सामना और पुरानी यादेंदरभंगा की सड़कों पर आज अजीब सा सन्नाटा था। खबर फैल चुकी थी कि में एक नया कड़क ऑफिसर आया है जिसने ज्वाइन करते ही ठाकुर साहब के दो खास गुर्गों को हवालात में डाल दिया है। ये खबर जब ठाकुर हवेली पहुँची, तो वहां का माहौल गरम हो गया।सनाया का दबदबाहवेली के बरामदे में 30 साल की सनाया ठाकुर बैठी थी। वो अब वो 5 साल की बच्ची नहीं थी जो गिरकर रोने लगती थी। आँखों में काजल, गले में सोने की पतली चैन और चेहरे पर एक ऐसी कड़वाहट जो बरसों की ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 3

एपिसोड 3: वफादारी की अग्निपरीक्षातालाब के किनारे सन्नाटा था, बस सनाया की तेज चलती सांसों की आवाज सुनाई दे थी। पृथ्वी का कंधा खून से लथपथ था, लेकिन उसकी नजरें सनाया के चेहरे पर टिकी थीं।"तुमने मुझे क्यों बचाया, सनाया?" पृथ्वी ने दबी आवाज में पूछा।सनाया ने बिना कोई जवाब दिए अपने दुपट्टे का एक हिस्सा फाड़ा और मजबूती से पृथ्वी के जख्म पर बांध दिया। उसकी आंखों में खौफ और गुस्सा एक साथ था। "ये मत समझना कि मैंने तुम्हें माफ कर दिया है। मैं बस नहीं चाहती कि मेरे शहर की बदनामी हो कि ठाकुरों ने किसी ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 4

बगावत के सुरशहर में खबर फैल गई कि स्टेशन की जमीन पर काम फिर से शुरू हो गया है। बार पृथ्वी राठौर खुद अपनी जिप्सी लेकर वहां तैनात था, और उसके साथ भारी पुलिस बल था। यह सीधा चैलेंज था भानु प्रताप ठाकुर की सल्तनत को।हवेली का कोहरामभानु प्रताप के खास आदमी, कालिया ने रात वाली पूरी बात ठाकुर साहब के कानों में डाल दी थी। हवेली के बैठक में सन्नाटा था, लेकिन भानु प्रताप की आँखों में अंगारे दहक रहे थे।"सनाया!" भानु प्रताप की आवाज गूँजी।सनाया सीढ़ियों से नीचे उतरी, उसने देखा कि उसके पिता की लाइसेंसी बंदूक ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 5

एपिसोड 5: नई आग के सुरनई सुबह की उम्मीदसूरज की पहली किरणें दरभंगा के स्टेशन इलाके पर पड़ रही मशीनें गरजने लगी थीं, और मजदूर काम में जुटे थे। सनाया अभी भी उसी पत्थर पर बैठी थी, जहां कल शाम पृथ्वी ने उसका हाथ थामा था। उसकी आंखें सूजी हुई थीं, लेकिन दिल में एक अजीब शांति थी। 25 साल की दुश्मनी खत्म हो चुकी थी, पर उसके पिता की हथकड़ी उसके सीने पर भारी पड़ रही थी।पृथ्वी जिप्सी से उतरा और उसके पास आया। उसके चेहरे पर थकान थी, लेकिन आंखों में चमक। "सनाया, चलो। IG साहब बुला ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 6

बगावत के सुरएपिसोड 6: नई जड़ें, पुराने कांटेनई शुरुआत की कसौटीदरभंगा की शामें अब शांत हो चुकी थीं। स्टेशन पर काम जोर-शोर से चल रहा था, और पृथ्वी राठौर हर सुबह साइट पर पहुँचते ही सनाया को एक मैसेज भेजते: "आज भी सब ठीक। तुम बस मुस्कुराती रहो।"सनाया अब हवेली छोड़ चुकी थी। एक छोटे से फ्लैट में शिफ्ट हो गई, जहाँ वो दिन-रात अपने पिता के केस की फाइलें देखती। भानु प्रताप जेल में था, लेकिन कोर्ट में अपील की खबरें आ रही थीं। सनाया का दिल भारी था—पिता का अपराधी बनना उसकी जीत नहीं, हार लग रही ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 7

बगावत के सुरएपिसोड 7: न्याय की आग, बदले की छायादरभंगा की सुबहें अब साये से भरी थीं। स्टेशन प्रोजेक्ट साइट पर मजदूर तेजी से काम कर रहे थे, लेकिन पृथ्वी राठौर की आँखें हर कोने पर टिकी रहतीं। कालिया भाग चुका था, और वो जानता था—ये जंग अभी अधर में लटकी है। सनाया उसके साथ साइट पर आती, फाइलें चेक करती, लेकिन उसकी आँखों में डर साफ झलकता। भानु प्रताप की डायरी ने सब बदल दिया था। पिता का कत्ल—ये राज पृथ्वी के सीने में आग की तरह सुलग रहा था।कालिया की साजिशरात के अंधेरे में कालिया अपने ठिकाने ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 8

बगावत के सुरएपिसोड 8: छिपा मास्टरमाइंड, टूटती नींवदरभंगा की बारिश रुकी नहीं थी। जेल की सलाखों के पीछे भानु चिट्ठी पढ़कर मुस्कुरा रहा था। कालिया पकड़ा गया, लेकिन उसकी आँखों में चमक थी। बाहर, पृथ्वी राठौर सनाया के फ्लैट में बैठा चिट्ठी को बार-बार पढ़ रहा था। "भानु प्रताप अकेला नहीं। बड़ा मास्टरमाइंड बाहर है।" सनाया ने उसका हाथ थामा। "ये खत खत्म नहीं कर सकता हमें। स्टेशन प्रोजेक्ट रुका नहीं है। कल इंस्पेक्शन है, चलो वहाँ।" पृथ्वी ने सिर हिलाया, लेकिन मन में शक का बीज बो चुका था। कौन है ये मास्टरमाइंड? कोई पुराना दुश्मन या नया?स्टेशन ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 9

जेल में राय और भानु प्रताप का सामना हुआ। भानु चिल्लाया, "तूने मुझे बेचा!" राय बोला, "तूने मेरी कमाई दोनों के राज खुल गए। कोर्ट में डायरी और रिकॉर्डिंग से केस मजबूत। स्टेशन प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली।नई शुरुआतएक हफ्ते बाद, साइट पर पूजा हुई। पृथ्वी और सनाया नींव रख रहे थे। रमेश पट्टी बाँधे मुस्कुरा रहा। सनाया ने कहा, "अब पुरानी दुश्मनी खत्म। हमारा स्टेशन दरभंगा बदलेगा।" पृथ्वी ने उसे गले लगाया। "और हमारा प्यार भी। शादी करेंगे, सनाया। नई जिंदगी।" शाम ढली, दोनों बालकनी में बैठे। सूरज डूबा, लेकिन उम्मीद चमकी।लेकिन कोर्ट से एक चिट्ठी आई। भानु ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 10

बगावत के सुरएपिसोड 10: अंतिम जंग, नई सुबह )दरभंगा की सर्द हवाएँ अब गर्माहट से लबरेज़ हो चुकी थीं। स्टेशन प्रोजेक्ट चमक-दमक के साथ तैयार खड़ा था—चकाचौंध प्लेटफॉर्म, आधुनिक सिग्नलिंग, ट्रेनों की सीटी गूँज रही। उद्घाटन का दिन करीब था। पृथ्वी राठौर और उनकी पत्नी सनाया राठौर (पहले ठाकुर) हनीमून के बाद नई जिंदगी बसा चुके थे। हर सुबह सनाया चाय बनाती, पृथ्वी साइट का निरीक्षण करता। विक्रम, सनाया का सौतेला भाई, पूरी तरह सुधर चुका—अब साइट का सुपरवाइजर। रमेश सिक्योरिटी चीफ। लेकिन जेल से भानु प्रताप का मैसेज भूल न पाए। "मेरा आखिरी हथियार बाकी। स्टेशन उद्घाटन पर ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 11

मंच पर उद्घाटन फिर शुरू। मंत्री ने रिबन काटा। पहली ट्रेन सीटी बजा कर आई। पृथ्वी-सनाया ने प्लेटफॉर्म पर होकर तालियाँ सुनीं। शहर ने जश्न मनाया। शाम को घर लौटे। सनाया ने कहा, "सब खत्म। अब हमारा बच्चा आएगा—स्टेशन की तरह मजबूत, प्यार से भरा।" पृथ्वी हँसा, गले लगाया। "हाँ, बेटा हो या बेटी—राठौर-ठाकुर का वारिस। बगावत के सुर हमेशा के लिए शांत।"एपिलॉग: नई सुबहमहीनों बाद स्टेशन चहल-पहल से गुलजार। पृथ्वी स्टेशन मैनेजर, सनाया सोशल वर्कर—गरीबों के लिए ट्रेन टिकट स्कीम चला रही। विक्रम पार्टनर, शादीशुदा। रमेश प्रमोशन पा चुका। एक शाम बालकनी में सनाया बोली, "याद है वो ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 12

बगावत के सुर, एपिसोड 12: छिपी आग, नया संकटआरव के जन्म के छह महीने बाद दर्पंगा रेलवे स्टेशन चमक था। नई ट्रेनें, चमचमाते प्लेटफॉर्म, यात्री खुशहाल। पृथ्वी राठौर अब सीनियर मैनेजर, सनाया पार्ट-टाइम सोशल वर्कर। विक्रम सिक्योरिटी इन-चार्ज, रमेश उनका दाहिना हाथ। रुद्र जेल से बाहर, काउंसलिंग के बाद स्टेशन पर जूनियर स्टाफ। "भाई साहब, मैंने गलतियाँ सुधार लीं," रुद्र ने पृथ्वी से कहा। पृथ्वी ने कंधा थपथपाया, "परिवार एक है। भूल गए सब।"आरव अब नन्हा शरारती, सनाया की गोद में हँसता। एक शाम घर पर फैमिली डिनर। विक्रम ने तोasts किया, "नई पीढ़ी, नई शुरुआत!" लेकिन रात को ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 13

बगावत के सुर, एपिसोड 13:रहस्यमहीनों बाद स्टेशन पर बड़ा उद्घाटन—नई इलेक्ट्रिक ट्रेन। पृथ्वी स्पीच दे रहा, "बगावत के सुर शांति के।" सनाया स्टेज पर आरव को गोद में। ताली बजी। लेकिन रात को घर पर अजीब घटना। आरव अचानक चीखा, आँखें लाल। सनाया घबरा गई। डॉक्टर ने चेक किया—सब नॉर्मल। लेकिन रुद्र ने फुसफुसाया, "दीदी, भानु प्रताप के खून में श्राप था। काला जादू। क्या आरव में...?" विक्रम ने डाँटा, "बकवास!" पृथ्वी चुप। एक पुरानी डायरी मिली भानु की—'मेरा खून अमर। नई पीढ़ी में जागेगा।'अगली सुबह स्टेशन पर सायरन बजा। सिग्नल फिर फेल। स्क्रीन पर मैसेज: "आरव मेरा है। ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 14

बगावत के सुर, एपिसोड 14:नया शत्रु, टूटती एकजुटआरव की पहली हँसी ने घर भर दिया। श्राप टूटा, स्टेशन पटरी पृथ्वी राठौर ने फैमिली को इकट्ठा किया। "कालिया जेल में, लेकिन उसका बेटा? सावधान।" सनाया बोली, "पृथ्वी, अब शांति दो। आरव को प्यार चाहिए।" विक्रम ने सिक्योरिटी चेक किया। रुद्र अब फुल-टाइम स्टाफ, "भाई साहब, मैं निगरानी रखूँगा।" रमेश ठीक हो गया, हँसा, "टीम सॉलिड!"नया चेहरादिन बीते। स्टेशन पर नया इंटर्न जॉइन—अर्जुन सिंह, 25 साल का स्मार्ट लड़का। मुंबई से, साइबर एक्सपर्ट। पृथ्वी ने इंटरव्यू लिया। "परिवार?" अर्जुन मुस्कुराया, "माँ अकेली। पापा... गुजरे।" काम शानदार। सब प्रभावित। सनाया ने कहा, ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 15

भावुक टूटन और एकजुटजेल में कालिया से मुलाकात। पृथ्वी गया। "खत्म करो ये चक्र।" कालिया हँसा, "मेरा बेटा सुधरेगा। स्टेशन... हमारा हक।" पृथ्वी बोला, "नई पीढ़ी को छोड़ो।" कालिया चुप। घर लौटे। सनाया ठीक। आरव मुस्कुराया। लेकिन विक्रम ने खुलासा: "रुद्र, तू अर्जुन से मिला था गुप्त।?" रुद्र टूटा, "मैं... सुधारना चाहता था। परिवार।" झगड़ा। पृथ्वी ने सब संभाला, "एक रहो।"महीनों बाद स्टेशन पर ग्रैंड ओपनिंग। नई ट्रेन लॉन्च। अर्जुन जेल से चिट्ठी: "सॉरी। काउंसलिंग में।" सनाया ने पढ़ा, "माफ़ी?" पृथ्वी ने चुंबन दिया, "हाँ। बगावत खत्म।" फैमिली डांस। आरव ताली बजाया। लेकिन दूर ट्रेन सीटी—एक नया सुर। क्या ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 16

बगावत के सुर, एपिसोड 16: लौटती परछाईं, टूटा विश्वाससनाया का दूसरा बच्चा—एक बेटी का सपना। घर खुशियों से भरा। ने स्टेशन को सुपर-सिक्योर बनाया। विराट और अर्जुन काउंसलिंग से बाहर, स्टेशन पर जॉब। "भाई साहब, हम बदल गए," विराट बोला। रुद्र ने गले लगाया। विक्रम सिक्योरिटी हेड, रमेश उसका पार्टनर। आरव अब दो साल का, दौड़ता फिरता। सनाया की गोद में हँसता। "परफेक्ट लाइफ," पृथ्वी ने कहा। लेकिन वो चिट्ठी—'बगावत कभी खत्म नहीं'—रुद्र के पास। अज्ञात।चिट्ठी का रहस्यसुबह स्टेशन। रुद्र ने चिट्ठी दिखाई। "हैंडराइटिंग... भानु जैसी।" पृथ्वी ने डिसमिस किया, "पुरानी बात।" लेकिन दोपहर को हादसा। प्लेटफॉर्म 3 पर ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 17

महायुद्ध मंदिरभोर मंदिर। माया चक्र बनाए। "आ गए? भानु जागेगा!" गुंडे घेरा। झड़प। रमेश ने गुंडों को भगाया। विक्रम से भिड़ा। "सच्चा बन!" विराट ने माया पर हमला। "मौसी, गलत!" माया हँसी, मंत्र। आग लगी। छायाएँ हमला। सनाया चक्कर खाई। पृथ्वी बचाया। "प्यार से हार जाओगी!"रुद्र ने भानु की फोटो जलाई। मंत्र उल्टा पढ़ा। माया चीखी। "नहीं!" तूफान। मंदिर ढहा। माया फँसी। विराट ने खींचा। पुलिस आई। माया गिरफ्तार। लेकिन विराट घायल। अस्पताल। अर्जुन आया, "भाई, सॉरी।"टूटा विश्वास, नई शुरुआतसनाया ठीक। बेटी सुरक्षित—नाम: आर्या। घर जश्न। लेकिन विराट की हालत गंभीर। बेड पर: "मैं... गलत। परिवार स्वीकार?" पृथ्वी ने ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 18

टूटन और एकताघर पर ड्रामा। विक्रम की फियान्से डरी, "शादी कैंसल?" विक्रम: "नहीं। फैमिली पहले।" रुद्र ने कबूला, "विराट मौत मेरी गलती?" पृथ्वी ने सब इकट्ठा। "खून से ऊपर प्यार। एक हो।" सनाया बोली, "प्रिया को सुधारें?" इमोशनल हग। रमेश ने प्लान: रेड।रात शेड। तारा मंत्र पढ़ रही। भानु फोटो। "आ गए?" गुंडे। बड़ी फाइट। रमेश गोली खाई। विक्रम ने तीन गुंडे गिराए। रुद्र तारा से भिड़ा। "बहन, रुको! माया गलत।" तारा: "माँ जेल में मरी। बदला!" पृथ्वी आया। "बेटी, परिवार बन।" तारा टूटी। फ्लैशबैक: माया की कहानी। आँसू। सरेंडर। ट्विस्ट! तारा का बटन—स्टेशन पर बॉम्ब। टाइमर 5 मिनट। ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 19

बगावत के सुर, एपिसोड 19सुबह की पहली किरण स्टेशन पर पड़ी। पृथ्वी ने नीरा को पुलिस के हवाले किया लेकिन मन में बेचैनी। सनाया ने चाय बनाई, बच्चे स्कूल के लिए तैयार। आरव ने पूछा, "पापा, नीरा दीदी जेल?" आर्या ने आंसू पोंछे। पृथ्वी ने गले लगाया, "सब ठीक हो जाएगा।" विक्रम ने मीटिंग बुलाई। रुद्र बोला, "राज भागा, उसका भाई आया। चिट्ठी मिली।" तारा अस्पताल से लौटी, घायल लेकिन मजबूत। "नीरा ने कबूल किया—राज का भाई, विक्की, और खतरनाक। माफिया का नया प्लान।" सनाया डरी, "स्टेशन बेचना बंद नहीं हुआ?"स्टेशन पर तनावदोपहर स्टेशन हलचल से भरा। नीरा का ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 20

बगावत के सुर, एपिसोड 20: माफिया का मुखौटा का भ्रमसुबह की धुंध स्टेशन को ढक रही थी। पृथ्वी ने पढ़ी— "माफिया का बॉस बचा। असली खेल शुरू।" सनाया ने चाय दी, "पृथ्वी, रुको। पुलिस को दो।" लेकिन पृथ्वी ने झटक दिया। "ये हमारा स्टेशन। खुद संभालेंगे।" बच्चे स्कूल गए। आरव बोला, "पापा सुपरहीरो!" विक्रम ने मीटिंग बुलाई। रुद्र: "ली पकड़ा, लेकिन बॉस छिपा। नाम—ड्रैगन, चीनी माफिया किंग। विक्की ने बताया—वो भारत में छिपा।" तारा बोली, "नीरा कहती, ड्रैगन दादी माया का पुराना पार्टनर। स्टेशन स्मगलिंग के लिए चाहिए।" रमेश घायल, लेकिन तैयार। "ट्रैकिंग ऐप से सिग्नल मिला—पटना के बाहर ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 21

रोमांटिक ट्विस्टशाम घर। रमेश ठीक। फैमिली इकट्ठी। सनाया-पृथ्वी बालकनी। "ये सब खत्म?" पृथ्वी ने बाहों में लिया। "प्यार से गहरा आलिंगन, चुंबन। जुनून भरा पल। बच्चे सोए। आरव सपने में हँसा। लेकिन नीरा चुपके फोन: "ड्रैगन जेल, लेकिन उसका पार्टनर—भारतीय। कौन?"क्लाइमेक्स फाइटरात स्टेशन। ड्रैगन को पुलिस सौंपा। लेकिन ट्विस्ट—विक्रम का फोन: "मैं पार्टनर!" चौंक। विक्रम हँसा, "स्टेशन मेरा था। माया मेरा प्यार। पृथ्वी ने छीना।" गोली चलाई। पृथ्वी बच गया। रुद्र ने विक्रम को पकड़ा। "गद्दार!" सच्चाई: विक्रम ने माया को मारने में मदद की, स्टेशन हथियाया। पुलिस आई। विक्रम गिरफ्तार।नई शुरुआत?सुबह स्टेशन शांत। रमेश प्रमोशन। नीरा फ्री, तारा ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 22

रांची का रहस्यरांची के होटल। काव्या मिली। "भाई ने स्टेशन बनाया। पृथ्वी ने छीना।" पृथ्वी: "विक्रम गद्दार था!" काव्या "झूठ। माया अंकल की दोस्त।" झगड़ा। रुद्र ने गुंडों को भगाया। काव्या भागी। तारा ने पकड़ा। "नीरा की तरह मत बन।" काव्या टूटी, "दुबई माफिया ने भाई को मारा। बदला।" लेकिन प्लान जारी—स्टेशन को ब्लास्ट।रोमांटिक संकटरात रांची। सनाया बच्चे संभाल रही। पृथ्वी लौटा। "सॉरी, डराया।" सनाया लिपट गई। "प्यार मत तोड़ो।" होटल रूम में इंटिमेट मोमेंट। पुरानी यादें—शादी की रात। जुनून। "हमारा स्टेशन, हमारा प्यार।" सुबह प्लान। नीरा: "काव्या का बॉम्ब लोकेशन—स्टेशन वाटर टैंक।"स्टेशन पर घेराबंदीदोपहर स्टेशन। काव्या ने घेर ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 23

छिपा दुश्मनसुबह का स्टेशन हलचल से भरा था। लोग आते-जाते, बच्चे खेलते, और टीम अपने-अपने काम में लगी थी। पृथ्वी को एक रहस्यमयी चिट्ठी मिली—"माफिया का आखिरी कार्ड—तुम्हारा अपना।"पृथ्वी का चेहरा सख्त हो गया। सनाया ने चिंतित स्वर में पूछा, “कौन हो सकता है?”आरव मासूमियत से बोला, “रमेश अंकल?”रुद्र ने तुरंत मीटिंग बुलाई। “सभी की जाँच करो। किसी पर भरोसा मत करो।”नीरा ने कहा, “रमेश संदिग्ध है। उसके घाव झूठे लगते हैं।”तारा ने दृढ़ता से कहा, “ट्रस्ट नो वन।”इसी बीच रमेश आया और बोला, “बॉस, सब तैयार है।” लेकिन जब उसका फोन चेक किया गया, तो उसमें माफिया से ...Read More

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 24

रहस्यमयी बच्चारात का स्टेशन शांत था। जीत की खुशी अभी भी परिवार और टीम के चेहरों पर झलक रही लेकिन तभी ट्रेन से उतरे उस छोटे बच्चे ने सबकी धड़कनें रोक दीं। उसके हाथ में एक चिट्ठी थी—"बगावत की अगली पीढ़ी।"पृथ्वी ने बच्चे को देखा। उसकी आँखों में मासूमियत थी, लेकिन चिट्ठी का संदेश खतरनाक। सनाया ने बच्चे को गले लगाया। “ये कौन है?”बच्चा बोला, “मुझे भेजा गया है। मेरा नाम आर्यन है। माया का वारिस।”टीम सन्न रह गई। नीरा ने कहा, “तो खेल खत्म नहीं हुआ। माया ने अगली पीढ़ी तैयार कर दी।”---नई साजिश की गंधसुबह मीटिंग हुई। ...Read More