कहानी - गाँव नहीं, भूतों का भंडार मैं हूँ रोहन शेखर, मैं 10वीं जमात का छात्र हूँ और दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहता हूँ। मेरे छोटे भाई का नाम रोहन शेखर है, मेरी बड़ी बहन का नाम निता शेखर और मम्मी का नाम प्रिया शेखर है। मेरे पापा एक डॉक्टर हैं। मेरी मम्मी का जुनून एक अध्यापिका बनने का था, और अब कुछ ही दिनों में उनकी 15 साल की नौकरी पूरी होने वाली थी। अब से मेरी गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो जाएँगी तो हम सबने सोचा — क्यों ना इस पूरे महीने नाना जी के यहाँ घूमने जाया जाए। सब तय हुआ और हम पैकिंग कर के चल पड़े। ट्रेन का सफ़र तीन दिनों का था और बेहद मज़ेदार।
Dont Look Behind the Mirror - Part 1
---कहानी - गाँव नहीं, भूतों का भंडारमैं हूँ रोहन शेखर, मैं 10वीं जमात का छात्र हूँ और दिल्ली में परिवार के साथ रहता हूँ। मेरे छोटे भाई का नाम रोहन शेखर है, मेरी बड़ी बहन का नाम निता शेखर और मम्मी का नाम प्रिया शेखर है। मेरे पापा एक डॉक्टर हैं। मेरी मम्मी का जुनून एक अध्यापिका बनने का था, और अब कुछ ही दिनों में उनकी 15 साल की नौकरी पूरी होने वाली थी।अब से मेरी गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो जाएँगी तो हम सबने सोचा — क्यों ना इस पूरे महीने नाना जी के यहाँ घूमने जाया ...Read More