एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ थीं, जिनसे निरंतर मवाद बह रहा था। उसके शरीर से दुर्गंध फैल रही । उसके एक पैर पर इतना गहरा और जानलेवा घाव था कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा । "वह घिसटते-घिसटते जैसे-तैसे राज्य के द्वार तक पहुंचा ही था कि   पहरेदारों की नज़र उस पर पड़ी। उसकी दुर्दशा देखकर उन्होंने घृणा और क्रोध से वहां से भगा दिया परन्तु भिखारी फिर से दरवाज़े पर पहुंच गया ।राजमहल का भव्य द्वार मानो स्वर्ग के द्वार की

1

वरदान - प्रस्तावना

बहुत समय पहले एक राजा हुआ करते थे। राजा अत्यंत धर्मपरायण और न्यायप्रिय थे। उनके राज्य में प्रजा सुखी समृद्ध थी। राजा अपनी प्रजा को अपनी संतान की तरह स्नेह करते थे। उनके न्याय और धार्मिक स्वभाव की दूर-दूर तक प्रशंसा होती थी, और लोग उन्हें सच्चे रक्षक व मार्गदर्शक मानते थे। राजा की दो पत्नियाँ थीं, और दोनों ही अत्यंत गुणी व सुन्दर थीं। राजा सदा दान–धर्म में लगे रहते थे। वे भूखों को भोजन कराते, निर्धनों को धन और वस्त्र देते, और अनाथों को सहारा बनते। उनकी उदारता की छवि इतनी विशाल थी कि लोग उन्ह ...Read More

2

वरदान - 1

एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ जिनसे निरंतर मवाद बह रहा था। उसके शरीर से दुर्गंध फैल रही । उसके एक पैर पर इतना गहरा और जानलेवा घाव था कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा । "वह घिसटते-घिसटते जैसे-तैसे राज्य के द्वार तक पहुंचा ही था कि पहरेदारों की नज़र उस पर पड़ी। उसकी दुर्दशा देखकर उन्होंने घृणा और क्रोध से वहां से भगा दिया परन्तु भिखारी फिर से दरवाज़े पर पहुंच गया ।राजमहल का भव्य द्वार मानो स्वर्ग के द्वार की ...Read More

3

वरदान - 2

दिन ढल रहा था और महल की ओर जाने वाले मार्ग पर हल्की धूप बिखरी हुई थी। तभी समाचार कि राज्य के द्वार पर एक अजीबोगरीब भिखारी पड़ा है, जिसकी दशा अत्यंत दयनीय है। यह सुनते ही राजा का हृदय विचलित हो उठा। वे नंगे पाँव ही सिंहासन से उठ खड़े हुए और तेज़ी से भागते हुए द्वार तक पहुँचे।जैसे ही उनकी नज़र उस भिखारी पर पड़ी, वे स्तब्ध रह गए। उसके कपड़े चिथड़ों में बदल चुके थे, शरीर पर जगह-जगह बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ थीं, जिनसे मवाद टपक रहा था। दुर्गंध से चारों ओर वातावरण दूषित हो रहा था। उसका ...Read More

4

वरदान - 3

भिखारी का रूप अचानक बदल गया।उसका जर्जर और घावों से भरा शरीर अब तेजोमय हो उठा। उसके अंगों से प्रकाश निकलने लगा।उसका चेहरा तेजस्विता से चमक रहा था क्षणभर में वह चार भुजाओं वाले एक देवता करूप में प्रकट हुआ। उनके शरीर पर रेशमी वस्त्र लहराने लगे और मस्तक पर स्वर्ण मुकुट सुशोभित हो गया। उनकी दिव्य आभा से सम्पूर्ण महल आलोकित हो उठा।"देवता का दिव्य रूप देखते ही राजा और उनकी समस्त प्रजा श्रद्धा से अभिभूत हो उठी। स्वयं राजा काँपते हुए अपने घुटनों पर बैठ गए और नतमस्तक होकर अपना सिर देवता के चरणों में रख दिया। ...Read More

5

वरदान - 4

राजमहल का प्रसव कक्ष उस समय दीपों की रौशनी और मंगल ध्वनियों से जगमगा रहा था। चारों ओर रेशमी लटक रहे थे, जिन पर सोने की महीन कढ़ाई की गई थी। फर्श पर स्वच्छ सफ़ेद चादरें बिछी थीं और हवा में चंदन और केसर की सुगंध फैली हुई थी।कक्ष के एक ओर वैद्य और दाइयाँ व्यस्त थीं, उनकी आँखों में उत्सुकता और चेहरे पर गंभीरता थी। जैसे ही शिशु की पहली किलकारी गूँजी, वैद्य ने प्रसन्न होकर घोषणा की—'राजकुमार का जन्म हुआ है!' तुरंत दाइयों ने रत्नजड़ित थालियों में हल्दी-कुमकुम, पुष्प और दीप रखकर शुभ वाणी उच्चारी।छोटी रानी बिस्तर ...Read More

6

वरदान - 5

बड़ी रानी का दिखावा इतना सधा हुआ था कि छोटी रानी पूरी तरह उसके प्रभाव में आ गई। जब बड़ी रानी राजवर्धन को अपनी गोद में उठाती, उसे प्यार से खिलाती और उसके लिए चुपचाप उपहार बनवाती, तो छोटी रानी का हृदय भावुक हो उठता।छोटी रानी" मन ही मन सोचती:‘वाह! मेरी बड़ी दीदी तो सचमुच मुझसे भी अधिक मेरे पुत्र से प्रेम करती हैं। मैं तो भाग्यशाली हूँ कि राजवर्धन को ऐसी माँ-सा स्नेह देने वाली संगिनी मिली है।’वह कई बार बड़ी रानी से कहती भी—“दीदी, आप तो सचमुच मेरे बेटे को मुझसे भी अधिक दुलार देती हैं। कभी-कभी ...Read More

7

वरदान - 6

बड़ी रानी जो अब अस्थायी रूप से राजसिंहासन पर बैठी थी, उसके मन में एक गहरी चिंता घर कर थी। उसे भय सताने लगा कि जैसे ही राजकुमार राजवर्धन बड़ा होगा, प्रजा और राजा के वफ़ादार मंत्री उसे राजा घोषित कर देंगे। तब उसके हाथ से सारी सत्ता छिन जाएगी।इस भय ने ही उसे और भी निर्दयी और चालाक बना दिया। उसने सबसे पहले अपने रिश्तेदारों और भाइयों को दरबार के बड़े पदों पर बैठा दिया—कोई सेनापति बन गया, कोई कोषाध्यक्ष, तो कोई न्यायमंत्री। इस तरह महल और राज्य की बागडोर धीरे-धीरे उसके परिवार के हाथों में पहुँचने लगी।जो ...Read More

8

वरदान - 7

"बड़ी रानी ने तुरंत निर्णय लिया । उसने अपने भरोसेमंद सैनिकों को आदेश दिया—छोटी रानी और उसका पुत्र अब में नहीं रह सकते। बिना किसी दूसरे विचार के वे सैन्य दस्ता लेकर उस कक्ष की ओर बढ़े जहाँ छोटी रानी और राजवर्धन रहते थे।छोटी रानी को चेतावनी तक न दी गई। राजवर्धन को उसकी माँ की गोद से अलग किया गया—उसके हाथों को बाँधा गया और वह बेबसी से आँसू बहाने लगा। छोटी रानी झट से उठकर विरोध करने लगी, पर सिपाहियों ने कठोरता से उसे दबोच लिया।बड़ी रानी ने दरबार के सामने घोषित कर दिया—‘राज्य की सुरक्षा और ...Read More

9

वरदान - 8

माँ अपने बेटे को गोद में उठा कर दौड़ती रही उसे पता ही नहीं था कि वो कहा जा है।पीछे पड़े सैनिक ओर आगे भयानक जंगल ।उसे आगे का रास्ता ही नहीं पता था ।वो भागती रही, जब तक एक उफनती हुई नदी के किनारे नहीं पहुँची। लहरें गरज रही थीं, मानो स्वर्ग भी उनकी पीड़ा सुन रहा हो। पीछे से बड़ी रानी के सैनिकों की मशालें पास आती जा रही थीं।छोटी रानी ने अपने नन्हे बेटे को कसकर सीने से लगा लिया। उसकी आँखों में निराशा चमक रही थी।मेरे लाल… अगर आज इन निर्दयी हाथों ने हमें पकड़ ...Read More

10

वरदान - 9

एक दिन वरदान गाँव के कुछ लड़कों के साथ कंचे खेल रहा था।हर बार की तरह वह अपनी दोनों से खेल रहा था और हर बाज़ी जीतता जा रहा था।बाकी लड़के हैरान थे—“अरे, ये कैसे हर बार जीत जाता है!”तभी एक लड़का अपने साथ अपने एक दोस्त को लेकर आया।वह लड़का गाँव का नहीं था—वह पास के नगर के एक जौहरी का बेटा था।उसकी नज़र जैसे ही वरदान के हाथ में उन मणियों पर पड़ी, वह एकदम ठिठक गया।उस दिन खेल ख़त्म होने के बाद वह जौहरी का बेटा सीधे अपने घर पहुँचा।उसका मन बेचैन था—वह बार-बार उन्हीं मणियों ...Read More