निधि की नन्ही उम्मीद” (श्रृंखला: निधि – मौन प्रेम की कहानी) सुधांशु की अनुपस्थिति में जब निधि ने बेटी को जन्म दिया, तब पहली बार उसके चेहरे पर शांति की झलक आई थी। वो मुस्कुरा रही थी — जैसे किसी ने उसके घावों पर मरहम रख दिया हो। पर ये सुकून ज़्यादा देर टिक नहीं पाया। नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा – “बधाई हो, लड़की हुई है!” पर उसी क्षण, निधि की सास के चेहरे पर शिकनें गहरी हो गईं। “फिर लड़की?” उन्होंने जैसे हिकारत से कहा, “ये घर तो अभागन है! लड़का नहीं हो सकता इसे!”
अधूरा इश्क़ एक और गुनाह - 1
एपिसोड – “निधि की नन्ही उम्मीद”(श्रृंखला: निधि – मौन प्रेम की कहानी)सुधांशु की अनुपस्थिति में जब निधि ने बेटी जन्म दिया, तब पहली बार उसके चेहरे पर शांति की झलक आई थी।वो मुस्कुरा रही थी — जैसे किसी ने उसके घावों पर मरहम रख दिया हो।पर ये सुकून ज़्यादा देर टिक नहीं पाया।नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा –“बधाई हो, लड़की हुई है!”पर उसी क्षण, निधि की सास के चेहरे पर शिकनें गहरी हो गईं।“फिर लड़की?”उन्होंने जैसे हिकारत से कहा,“ये घर तो अभागन है! लड़का नहीं हो सकता इसे!”बाहर से नंद की आवाज़ आई —“दीदी, फिर लड़की हुई?अरे भगवान ...Read More
अधूरा इश्क़ एक और गुनाह - 2
जहां से निधि की शुरुआती होती है नए रिश्ते कीऔर कहानी की निधि — एपिसोड 1“कहानी वहीं से नहीं… टूटती है,कहानी वहाँ से शुरू होती है—जहाँ पहली धड़कन जागती है।”निधि की कहानी को लोग बीच से जानते हैं—उसके अपमान, उसके आँसू, उसके मौन प्रेम को…पर एक लेखक के तौर पर मैं आज पाठकों को वहाँ ले जाना चाहता हूँ जहाँ यह कहानी सचमुच शुरू हुई थी।जहाँ एक माँ की चिंता, एक बेटी की मासूमियत और एक अनदेखी मुस्कान का बीज पहली बार धरती को छूता है।--- रूपा चाची का आना और सीता की चिंता“बस… मेरी आँखों के सामने निधि ...Read More
अधूरा इश्क़ एक और गुनाह - 3
एपिसोड 3 — “वो दिन… जब सपने विदाई में खो गए”"कभी सोचा था, शादी सिर्फ एक रिश्ता नहीं… बल्कि नए घर की ओर पुल होती है।पर किसे पता, उस पुल के दूसरे छोर पर काँटे भी हो सकते हैं…”वो दिन आ ही गया था।आँगन में हल्दी की खुशबू इस तरह फैली हुई थी, जैसे हर दीवार, हर कोना निधि की नई शुरुआत का गीत गा रहा हो। उधर, दूर खड़ा सुधांशु अपने दोस्तों के बीच हँसता, खिलखिलाता बारात की तैयारी कर रहा था।निधि के मन में एक अजीब-सी हलचल थी…जैसे कोई अनदेखा भविष्य धीरे-धीरे उसके कान में कह ...Read More
अधूरा इश्क़ एक और गुनाह - 4
अब तक आपने देखा होगा कि निधि कैसे एक लड़की को जन्म देती है । जहां से कहानी की हुईकहानी का भाग दिखाते हैंतो शुरुआत करते हैं जहां से निधि और सुधांशु की जीवन की नई शुरुआत हुईशादी की लंबी रस्में पूरी हो चुकी थीं। सजी-धजी, आँखों में अनगिनत सपने और होंठों पर हल्की-सी मुस्कान लिए निधि जब विदाई की कार में बैठी, तो मन में सिर्फ एक ही बात थी—“अब मेरा अपना घर… अपना परिवार…”निधि को क्या पता था कि जिस घर को वह ‘अपना’ सोचकर चली आ रही है—वहीं से उसके धैर्य और सहनशीलता की पहली परीक्षा ...Read More
अधूरा इश्क़ एक और गुनाह - 5
एपिसोड 3— “निधि का पहला दिन”ससुराल के बड़े-से आँगन में आज गहमा-गहमी थी। रिश्तेदारों की भीड़, हंसी-ठिठोली, गहनों की और पकवानों की खुशबू… सब मिलकर एक नया घर-परिवार बसने की ख़ुशी का ऐलान कर रहे थे।निधि, जो अभी कुछ घंटों पहले ही इस घर की नई बहू बनी थी, अपने पति सुधांशु के साथ पहली बार दहलीज़ लांघ चुकी थी। चेहरे पर लाली, आँखों में हल्की-सी झिझक, और होंठों पर आधी-अधूरी मुस्कान—वह अपने आप में ही सिमटी बैठी थी।मुंह दिखाई की रस्म चल रही थी।सास के कमरे को हस्बैंड-वाइफ का बेडरूम कहा जाता था, और वहीं एक ओर पलंग ...Read More
अधूरा इश्क़ एक और गुनाह - 6
निधि हमेशा सोच-समझकर काम करती थी। घर में सबका ख्याल रखना उसका स्वभाव था। लेकिन कुछ लोग—खासकर उसकी सास—उसकी छोटी खुशी में भी रुकावट डालते।एक दिन सासू मां ने निधि से कहा,“यह सूट मत पहनो। रंग उड़ गया है, खराब हो गया है। मैं तुम्हारे लिए नया दिलाऊंगी।”निधि ने मुस्कुराते हुए सूट को साइड में रख दिया। उसने सोचा, “अगर सासू मां को यह पसंद नहीं है, तो मैं इसे क्यों पहनूँ?”सुधांशु चुपचाप देख रहा था, समझ नहीं पा रहा था कि निधि इतनी संयमित और शांत कैसे रह सकती है। लेकिन उसके कानों में अब सास की आवाज ...Read More