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सुबह की हल्की रोशनी धीरे-धीरे रेगिस्तान की ठंडी रेत पर फैल रही थी… रात की ठंड अब...
सुबह 7:30 बजे J. K. Commerce College कॉलेज बोहोत हरा भरा था। क...
6 किलोमीटर। सीधी रेखा में। लेकिन 2087 के पुरानी दिल्ली में कोई चीज़ सीधी रेखा मे...
प्रोफेसर शरद देशमुख यांच्या या भावूक कथेचा हिंदी अनुवाद खालीलप्रमाणे आहे. मी भाष...
निलु के इतना कहने पर गाड़ी अपने आप रुक जाती है। गाड़ी रुकने के बाद निलु गुस्से स...
Chapter 7 — धुंध की वापसीआर्यन ने उस जली हुई चाबी को अपनी मुट्ठी में इतनी ज़ोर स...
_______________________________गाँव के पश्चिम छोर पर एक कुआँ था। वह पुराना, गोल...
जिंदगी की दूसरे किनारा पार्ट 10और वही अब धीरे-धीरे समय देखा गया मेघना अब धीरे-धी...
Chapter 1: डर की शुरुआतरतनपुर…एक छोटा सा गाँव… गुजरात के किनारे बसा हुआ।दिन में...
Episode 6 – पहली खुली बातआउटिंग के बाद वाला दिन घर में थोड़ा शांत था।कोई खास हलच...
अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा। अब...
रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी। चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया। वह...
यह कहानी राजा विक्रमादित्य के समय की है, जिसे "विक्रम और बेताल" की कहानियों की शुरुआत माना जाता है। यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे राजा विक्रमादित्य ने एक साधु को दिए गए अ...
यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं। हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...
सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...
“राजू… उठ जा बेटा… चल, काम पर नहीं जाना है क्या?” राजू की माँ उसे रोज़ सुबह जल्दी जगा दिया करती थी, जिससे वह हमेशा चिढ़ जाता था। वह अपने कानों पर हाथ रखकर चादर फिर से मुँह तक खी...
निधि की नन्ही उम्मीद” (श्रृंखला: निधि – मौन प्रेम की कहानी) सुधांशु की अनुपस्थिति में जब निधि ने बेटी को जन्म दिया, तब पहली बार उसके चेहरे पर शांति की झलक आई थी। वो मुस्कुरा...
"कभी-कभी ज़िंदगी से भागने वाले, सबसे ज़्यादा ज़िंदा महसूस करने वाले होते हैं..." यह उपन्यास एक प्रेम कथा नहीं है, न ही कोई रहस्यपूर्ण थ्रिलर। यह उन साँसों की कहानी है, ज...
रामेसर अब गाँव का भोला-सा लड़का नहीं रहा। समय ने उसे माँजा, अनुभवों ने उसे गढ़ा, और शिक्षा ने उसे ऊँचाई दी। अब वह अपने व्यक्तित्व में एक निखार लिए चलता है, साफ़-सुथरे कपड़े, चमचमात...
कुछ क्षण के लिए ऐसा प्रतीत हुआ जैसे वक्त ने खुद को रोक लिया हो। पेड़ से गिरती ओस की बूंद भी जैसे हवा में झूलने लगी। तभी एक तेज हवा का झोंका आया। जिसने मेरा भ्रम तोड़ दिया मैं झपट कर...
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