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  • मनोज - एक ज़िद्दी लड़के की कहानी - 5

    पुलिस वाले पकड़े गए। कर्जा खत्म। पर अब मनोज के सामने सबसे बड़ी चुनौती है - भरोसा...

  • 1926 की अमावस की वो खौफनाक रात - 11

    यही कारण था महारानी, कि वह भोली-भाली लड़की अपने राजधर्म और तुम्हारे प्रति अपने क...

  • आशिकी.....अब तुम ही हो। - 14

    अध्याय:14जन्माष्टमी का भव्य कार्यक्रम समाप्त हो चुका था और श्रद्धालु अपने घर लौट...

  • राहें - 17

    मेरा-गाँव वर्षो बाद बुआ घर आई तो घर का सारा वातावरण ही बदलगया है। बुआ बड़े हसॅमु...

  • Mitalika - Ek Adhuri Prem Kahani - Part 10

    यह सब देखकर अक्षय जैसे पागल हो उठा. वह भागकर रिया के पास पहुँचा, उसे अपनी बाँहों...

  • Her Silent Secret - 9

    संयोगिता दीवार से टिककर बैठी थी। उसकी घायल बाँह से अब भी खून बह रहा था। लेकिन उस...

  • CCTV फुटेज

    सीसीटीवी फुटेजलेखक: विजय शर्मा एरीशहर की हलचल भरी रातों में भी कुछ जगहें ऐसी होत...

  • Anime - 1

    રોજ ની જેમ આજે સવાર કઈક અલગ હતી . એક એવી સવાર તો ખાલી આપડા મન માંજ આવી શકે આપડો...

  • पवित्र बहु - 18

    एक दिन दिव्यम चित्रा को स्कूटी चलाना सिखा रहा था। चित्रा अभी भी पूरी तरह आत्मविश...

  • काश! आसमान के भी पंख होते । - 1

    एक तारा जो अंतरिक्ष में कहीं दूर खो गया था । रात का समय था । चारों तरफ काली घटा...

पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । By miss k

क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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टूटता हुआ मन By prem chand hembram

(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...

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क्या सब ठीक है By Narayan Menariya

यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।
हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...

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अम्मा By Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा।

अब...

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विक्रम और बेताल. By Vedant Kana

यह कहानी राजा विक्रमादित्य के समय की है, जिसे "विक्रम और बेताल" की कहानियों की शुरुआत माना जाता है। यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे राजा विक्रमादित्य ने एक साधु को दिए गए अ...

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पर्दे के पीछे By ARTI MEENA

सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

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टूटता हुआ मन By prem chand hembram

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क्या सब ठीक है By Narayan Menariya

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अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा।

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पर्दे के पीछे By ARTI MEENA

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