लोगो की रोने की आने आने लगी है। दक्षराज कहता है---दक्षराज :- चलो दयाल बाहर जा कर देखते हैं। के उस कुम्भन ने क्या किया है। इतना बोलकर दक्षराज और दयाल हवेली से बाहर जाने लगता है। उधर वर्शाली और एकांश सुंदरवन पँहुच जाता है । जहां से अब उन्हे आगे पेदल ही जाना था। वर्शाली गाड़ी से धीरे धीरे उतरती है। वर्शाली आगे बढ़ने की कोशिस करती है पर कमजोरी के कारण वो डगमगाने लगती है जिससे वर्शाली गिरने लगती है। एकांश वर्शाली को संभालते हुए कहता हैं--एकांश :- तुम ठीक तो हो वर्शाली । वर्षाली हां में अपना सर