गर्भ-संस्कार - भाग 8

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सत्सङ्ग संस्कारहीयते हि मतिः पुंसां हीनैः सह समागमात्। समैच्च समतामेति विशिष्टैश्च विशिष्टताम्।। : हितोपदेश अर्थ–“हीन लोगो की संगती से मनुष्य की बुद्धी भी हीन हो जाती है। श्रेष्ठ लोगो की संगती से बुद्धि भी निःसंयश श्रेष्ठ ही होती है।”इसलिए केवल सत्संग को ही प्राधान्य देना चाहिए। गर्भवती के कानो पर आने वाला हर शब्द, हर एक अच्छा एवं बुरा शब्द गर्भज्ञान को अच्छा या बुरा बनाता रहता है। कहा गया है कि कुसंग से सती की भी मति भ्रष्ट हो जाती है तो सुकोमल गर्भ की बुद्धी भ्रष्ट हो जाये इसमें क्या आश्चर्य है?सत्संगति बुद्धि की जड़ता को हरती है, वाणी में सत्य